फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Election ›   Lok Sabha ›   Ground report: Fight between uncle, grandfather and wrestler in Sangli, Maharashtra

ग्राउंड रिपोर्ट: सांगली में काका-दादा और पहलवान के बीच सजा अखाड़ा, 19 में से 16 बार जीती कांग्रेस

Tue, 07 May 2024 06:32 AM IST
निर्मल कांत सुरेंद्र मिश्र, सांगली (महाराष्ट्र)
सुरेंद्र मिश्र, सांगली (महाराष्ट्र) Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 07 May 2024 06:32 AM IST
विज्ञापन
सार
Ground Report: महाराष्ट्र की सांगली लोकसभा सीट भी सियासी धुरंधरों के बीच बेहद चर्चित रहती है। यहां भाजपा के संजय पाटिल, शिवसेना (यूबीटी) के चंद्रहार पाटिल और निर्दलीय विशाल के बीच त्रिकोणीय लड़ाई होने की संभावना है। इस बहुचर्चित संसदीय क्षेत्र पर सुरेन्द्र मिश्र की रिपोर्ट
loader
Ground report: Fight between uncle, grandfather and wrestler in Sangli, Maharashtra
विशाल पाटिल, संजय पाटिल और चंद्रहार पाटिल (फाइल) - फोटो : चुनाव आयोग हलफनामा

विस्तार

महाराष्ट्र में कांग्रेस के वर्चस्व वाले सांगली लोकसभा सीट पर काका, दादा और पहलवान के बीच चुनावी अखाड़े में जोर आजमाइश हो रही है। उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस-एनसीपी (एसपी) से चर्चा के बिना दो बार के महाराष्ट्र केसरी पहलवान चंद्रहार पाटिल को मैदान में उतारकर कांग्रेस को लड़ाई से ही बाहर कर दिया। हालांकि, कांग्रेस के दिग्गज नेता व पूर्व मुख्यमंत्री बसंतदादा पाटिल के नाती विशाल (दादा) पाटिल ने निर्दलीय मैदान में उतकर इंडी गठबंधन को चौंका दिया है। इससे लड़ाई त्रिकोणीय हो गई है। विशाल एमवीए के वोटों में सेंध लगाएंगे, जिसका फायदा दो बार के सांसद और भाजपा प्रत्याशी संजय (काका) पाटिल को मिलने की उम्मीद है।


सांगली सीट 19 में से 16 बार कांग्रेस जीती है। 2014 में पहली बार भाजपा के काका ने वसंतदादा पाटिल के नाती प्रतीक पाटिल को हराया था। 2019 में यह सीट कांग्रेस के सहयोगी दल स्वाभिमानी शेतकरी (किसान) संगठन के खाते में गई थी, जिस पर बसंतदादा के घराने के विशाल पाटिल ने काका को कड़ी चुनौती दी थी। इस बार राजनीतिक समीकरण कुछ इस तरह बने हैं कि लड़ाई भाजपा बनाम एमवीए नहीं, बल्कि भाजपा बनाम निर्दलीय हो गई है।


स्थानीय गुटों का खेल  
सांगली में तीन पाटिलों की लड़ाई है। भाजपा का अपना मजबूत संगठन है। आरएसएस की ताकत है। छह विधानसभाओं में से तीन पर भाजपा के विधायक हैं। चंद्रहार पाटिल कहते हैं कि सांगली अब कांग्रेस का गढ़ नहीं रहा। हालांकि, विशाल पाटिल कांग्रेस की विरासत के सहारे ही चुनाव लड़ रहे हैं। सांगली की हर तालुका, विधानसभाओं में तीन से पांच गुट हैं, जो स्थानीय राजनीति में दबदबा रखते हैं। इन गुटों के लोग किसी पार्टी नहीं, बल्कि स्थानीय राजनीति, सत्ता का गणित और अर्थनीति के तहत अपनी भूमिका बदलते हैं। 

पिछले दो चुनावों का हाल
2019
उम्मीदवार          दल       मत%
संजय पाटिल    भाजपा    52.77
विशाल पाटिल    कांग्रेस    28.96

2014
संजय पाटिल    भाजपा    58.38
प्रतीक पाटिल    कांग्रेस    35.52
 
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed