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Hindi News ›   Election ›   Lok Sabha ›   Ground report: Dynasty-insurgency triangle in Shivamogga; Yediyurappa's elder son Raghavendra again in fray

ग्राउंड रिपोर्ट: शिवमोगा में वंशवाद-बगावत का त्रिकोण; येदियुरप्पा के बड़े बेटे राघवेंद्र BJP से फिर मैदान में

Sat, 04 May 2024 07:04 AM IST
निर्मल कांत नीरज तिवारी, शिवमोगा (कर्नाटक)
नीरज तिवारी, शिवमोगा (कर्नाटक) Published by: निर्मल कांत Updated Sat, 04 May 2024 07:04 AM IST
सार

Ground Report: तीन दशक से दो पीढ़ियों के इर्द-गिर्द घूमती शिवमोगा की सियासत में इस बार केएस ईश्वरप्पा स्वयंभू सनसनी बनकर आए हैं। भाजपा के बागी ईश्वरप्पा का एकमात्र उद्देश्य पूर्व सीएम बीएस येदियुरप्पा के परिवार को करारी शिकस्त देना है। इस बगावत ने कांग्रेस में उम्मीद की किरण पैदा कर दी है।

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Ground report: Dynasty-insurgency triangle in Shivamogga; Yediyurappa's elder son Raghavendra again in fray
केएस ईश्वरप्पा, बीवाई राघवेंद्र। - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

वंशवाद की बेल पर चढ़ी कर्नाटक की सियासत में बीएस येदियुरप्पा के गृहनगर शिवमोगा में इसकी जड़ें और गहरी हैं। भाजपा ने एक उपचुनाव मिलाकर लगातार तीसरी बार येदियुरप्पा के बड़े बेटे और सांसद बीवाई राघवेंद्र को मैदान में उतारा है। उनके खिलाफ पार्टी के बागी नेता ईश्वरप्पा निर्दलीय ताल ठोक रहे हैं। चुनाव से पहले तक येदियुरप्पा के करीबी रहे ईश्वरप्पा ने बेटे को टिकट न मिलने पर बगावत की है। कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री एस बंगारप्पा की बेटी गीता शिव राजकुमार को टिकट देकर वंशवाद के मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है।

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कर्नाटक में भाजपा की धुरी कहे जाने वाले येदियुरप्पा अपने गढ़ में ईश्वरप्पा की बगावत से भले ही दो-चार हो रहे हों, पर चुनाव दर चुनाव बढ़ा पार्टी का जनाधार उनसे दूर जाता नहीं नजर आ रहा। इस सीट पर दो उपचुनाव समेत कुल छह चुनावों में लगातार हार का सामना करने वाली कांग्रेस येदियुरप्पा-ईश्वरप्पा की लड़ाई का फायदा उठाने के लिए जातिगत समीकरणों को साधने में जुटी है। इडिगा समुदाय की गीता के पति शिव राजकुमार कन्नड़ फिल्मों के अभिनेता हैं। उनके ससुर मशहूर कन्नड़ अभिनेता राजकुमार का चंदन तस्कर वीरप्पन ने कभी अपहरण किया था। वह क्षेत्र में ससुराल पक्ष की लोकप्रियता को भी भुनाने की कोशिश में हैं।
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इन समीकरणों के बीच मतदाता भाजपा-कांग्रेस के अलावा तीसरे विकल्प की ओर नजर उठाकर भी देख नहीं रहा। ईश्वरप्पा किसे नुकसान पहुंचाएंगे? इस पर शहर के एक छात्र शिवु का कहना था, उनके लड़ने से भाजपा की जीत के अंतर पर फर्क पड़ सकता है, पर वह किसी को हरा नहीं पाएंगे। बता दें कि यहां लिंगायत, वोक्कालिगा, ब्राह्मण, मुस्लिम और दीवारू का रुख ही हार-जीत तय करता है।
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ईश्वरप्पा इसलिए पड़े येदियुरप्पा परिवार के पीछे
कुरुबा समुदाय के ईश्वरप्पा की बगावत के पीछे परिवारवाद की सियासत को परवान न चढ़ा पाने की उनकी असफलता है। वह मानते हैं कि उनके बेटे कांतेश को येदियुरप्पा के कारण हावेरी से टिकट नहीं मिला। चुनाव प्रचार में वह आरोप लगा रहे हैं कि प्रदेश भाजपा पर येदियुरप्पा परिवार ने कब्जा जमा रखा है।  

राघवेंद्र ने तोड़ा था बंगारप्पा की जीत का सिलसिला
लिंगायतों के बड़े नेता येदियुरप्पा से पहले वर्ष 1996 से 2005 के उपचुनाव तक शिवमोगा पर एस बंगारप्पा का दबदबा रहा। हालांकि, वर्ष 1998 में उन्हें भाजपा के अयानुर मंजूनाथ से पराजित होना पड़ा था। यहां भाजपा की पहली जीत भी थी। वर्ष 1999 में बंगारप्पा ने फिर से इस सीट पर कब्जा जमा लिया था। उनकी जीत का क्रम वर्ष 2009 के चुनाव में येदियुरप्पा के बेटे राघवेंद्र ने तोड़ा था।

शिव के नाम से शिवमोगा, इतिहास संजोए तुंगभद्रा
पौराणिक कथाओं के अनुसार शिवमोगा का नाम भगवान शिव को समर्पित है। इसकी स्थापना सम्राट अशोक के शासनकाल में ईसापूर्व तीसरी शताब्दी में हुई थी। नारियल, सुपारी, केले के साथ मक्का, ज्वार-बाजरा व धान की खेती बहुतायत है।


सपा भी जीत चुकी शिवमोगा का रण
एस बंगारप्पा शिवमोगा से चार बार सांसद रहे और हर बार अलग-अलग दल से। वर्ष 2005 के उपचुनाव में उन्होंने सपा से जीत हासिल की थी। दक्षिण के किसी राज्य में संभवत: यह सपा की पहली जीत थी।

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