{"_id":"661f1d064d1f592d690b0d6e","slug":"ground-report-bulandshahr-dissatisfaction-with-public-representatives-but-will-vote-2024-04-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ground Report Bulandshahr : सुरक्षित लोकसभा पर बुलंदी की तलाश, जनप्रतिनिधियों से नाराजगी...पर वोट तो देंगे","category":{"title":"Lok Sabha","title_hn":"लोकसभा","slug":"lok-sabha"}}
Ground Report Bulandshahr : सुरक्षित लोकसभा पर बुलंदी की तलाश, जनप्रतिनिधियों से नाराजगी...पर वोट तो देंगे
Wed, 17 Apr 2024 06:21 AM IST
दुष्यंत शर्मा
चंद्रभान यादव, बुलंदशहर
चंद्रभान यादव, बुलंदशहर
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 17 Apr 2024 06:21 AM IST
विज्ञापन
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
सार
आगे पढ़ने के लिए लॉगिन या रजिस्टर करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
फ्री ई-पेपर
सभी विशेष आलेख
सीमित विज्ञापन
सब्सक्राइब करें
नया गांव बाजार में लगी चुनावी चौपाल
- फोटो :
अमर उजाला
विस्तार
कहने को तो बुलंदशहर सुरक्षित लोकसभा सीट है, पर इसका मिजाज अलग ही रहा। दलित वोटबैंक की राजनीति करने वाली बसपा ने यहां दम तो दिखाया, पर कभी उसके हिस्से जीत नहीं आई। सपा अलबत्ता 2009 में यहां जीत का स्वाद चखने में कामयाब हुई थी। 1957 में अस्तित्व में आई इस सीट पर 16 चुनावों में 7 बार कमल खिल चुका है। कांग्रेस भी यहां पांच बार अपना परचम फहरा चुकी है। जनता दल, जनता पार्टी (एस) और भारतीय लोकदल ने भी यहां एक-एक बार अपना झंडा बुलंद किया। मतदाताओं में उत्साह तो है। पर, विकास की दौड़ में पिछड़ने की टीस भी है। कई स्थानों पर उम्मीदवारों को लेकर मतदाताओं में नाराजगी भी है।
2011 की जनगणना के अनुसार बुलंदशहर लोकसभा क्षेत्र में करीब 80 फीसदी आबादी हिंदू है। इसमें 19.81 फीसदी दलित हैं। छत्रपाल ने यहां लगातार चार बार भगवा परचम फहराया। 2004 में कल्याण सिंह भी यहां से जीते। पिछले दो चुनावों की बात करें तो भोला सिंह पर मतदाताओं ने खूब प्यार लुटाया। 2014 में अकेले उनके हिस्से में 59.86 प्रतिशत वोट आए। वहीं, 2019 में यह लकीर और बड़ी होकर 60.64 फीसदी पर पहुंच गई। भगवा खेमे ने फिर से उन्हें मैदान में उतारा है। वहीं विपक्षी गठबंधन में कांग्रेस से शिवराम वाल्मीकि ताल ठोक रहे हैं। तो बसपा ने नगीना से सांसद गिरीश चंद्र जाटव को मैदान में उतारकर मुकाबले को दिलचस्प बनाने की कोशिश की है।
दिल्ली के रास्ते बुलंदशहर की सीमा में प्रवेश करते ही नहर किनारे कांजी बड़ा की दुकानें सजी दिखती हैं। हम भी एक दुकान पर रुक लिए। यहीं कांजी बड़ा का स्वाद ले रहे रहमत अली वोट के सवाल को टाल जाते हैं। वह कहते हैं, यहां से दिल्ली दूर नहीं है, फिर भी जिला विकास में पिछड़ा है। रोजगार के साधन नहीं हैं।
बगल में खड़े प्रमोद वाल्मीकि उनकी बात को आगे बढ़ाते हुए कहते हैं, सिकंदराबाद औद्योगिक क्षेत्र की कई फैक्ट्रियां बंद हो गईं। कांजी बड़ा की दुकान चलाने वाले हाईस्कूल पास ईश्वर जोगी भी उनकी हां में हां मिलाते हैं। वह बताते हैं, पिता गन्ने का रस बेचते हैं और मैं कांजी बड़ा, तब जाकर परिवार चलता है। पर, वोट के सवाल पर तपाक से कहते हैं, भाजपा को वोट देंगे। वजह? मोदी को फिर प्रधानमंत्री बनाना है।
भूड़ चौराहे पर पहुंचने पर हमें प्लास्टिक पाइप के कारोबारी दिनेश सिंह मिले। वह कहते हैं, बुलंदशहर से सीधी ट्रेन सेवा का अभाव है। व्यापारियों को लखनऊ, दिल्ली व अन्य बड़े शहरों के लिए हापुड़, खुर्जा या अलीगढ़ से ट्रेन पकड़ना पड़ता है। इससे खर्च ज्यादा और मुनाफा कम होता है। 2017 में बना आउटर रिंग रोड का प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला गया। ऐसे में जाम की समस्या रहती है। वहीं, धतूरी के राकेश सिंह कहते हैं, यहां के कुछ गांवों को नोएडा अथॉरिटी ने अपने न्यू नोएडा प्लान में शामिल किया है। इस योजना को धरातल पर उतरने में वक्त लगेगा। इस चुनाव में उनका रुख किधर है, इस सवाल पर वह कहते हैं कि अभी विकल्प तलाश रहे हैं।
काला आम चौराहा पर मिले सुरजीत सिंह और कलीमुद्दीन विपक्षी गठबंधन प्रत्याशी को कमजोर जरूर बताते हैं, लेकिन गंगा नदी पर निर्माणाधीन पुल के गिरने की याद दिलाते हुए तंज भी कसते हैं। कहते हैं, यह पुल ही विकास का गवाह है।
जनप्रतिनिधियों से नाराजगी, पर वोट तो देंगे
लोध राजपूत बहुल नया गांव बाजार में मिले डाॅ. सतीश चंद्र चुनावी सवाल पर कहते हैं- उम्मीदवार की जनता से दूरी है, लेकिन मोदी जरूरी है। वह कहते हैं कि भाजपा सांसद तीसरी बार दिल्ली जाने की तैयारी में हैं, लेकिन वे इलाके में नहीं आए। ख्वाजपुर मीरपुर निवासी लखपत सिंह कहते हैं कि योगी- मोदी राष्ट्रहित में काम कर रहे हैं। कुछ ऐसा ही भोला सिंह भी कहते हैं। दौलतड़ गांव निवासी सरदार मनोहर सिंह भी सभी प्रत्याशियों को लेकर सवाल करते हैं। विनीत सिंह कहते हैं, हम तो सिर्फ मोदी की वजह से कमल को वोट करेंगे। हरकिशन सिंह भी प्रत्याशियों को लेकर सवाल उठाते हैं।
छुट्टा पशु बढ़ा रहे मुसीबत
शिकारपुर विधानसभा क्षेत्र के धतूरी गांव में मिले सुखवीर सिंह कहते हैं, देश के विकास के लिए भाजपा जरूरी है। वहीं, संजय सक्सेना और किसान प्रीतमचंद शर्मा छुट्टा पशुओं से हो रहे नुकसान को लेकर सवाल उठाते हैं। वोट को लेकर सवाल पर कहते हैं, यहां कोई मजबूत विकल्प नहीं है, इसलिए भाजपा को वोट करेंगे। कुछ ऐसी बातें कौशल कुमार सिंह भी कहते हैं।
यहां त्रिकोणीय मुकाबला
शाम करीब पांच बजे हम स्याना पहुंचे। वर्ष 2018 में गोकशी को लेकर भड़की हिंसा में इंस्पेक्टर और एक युवक की मौत की वजह से यह इलाका सुर्खियों में रहा था। कस्बे के अल्ताफ अंसारी कहते हैं कि वह गठबंधन उम्मीदवार के साथ हैं, तो राजेश राजपूत का दावा है कि कमल खिलना तय है। शिवेंद्र कहते हैं कि वे तो हमेशा से ही हाथी के साथ रहे हैं, उम्मीदवार चाहे जो हो।
आम बागवानों को सुविधाओं की दरकार
स्याना और अनूपशहर में सड़क के दोनों तरफ आम के बाग हैं, लेकिन बागवान निर्यात की व्यवस्था नहीं होने से परेशान हैं। वे कहते हैं, मजबूरन दिल्ली के व्यापारियों को पूरी बाग ही बेचनी पड़ती है। बागवान सुंदर सिंह लोधी कहते हैं, कई बार आम की गुणवत्ता जांचने और निर्यात योग्य आम तैयार करने के लिए प्रशिक्षण की मांग की गई, लेकिन नतीजा सिफर ही रहा।
समर के योद्धा
- भोला सिंह, भाजपा खटिक बिरादरी के भोला सिंह हैट्रिक बनाने के इरादे से मैदान में हैं। लोध मतदाताओं की नाराजगी रोकने की चुनौती है।
- शिवराम वाल्मीकि, कांग्रेस पहला चुनाव लड़ रहे हैं। सपा के हिंदू वोटरों को जोड़े रखने की चुनौती है।
- गिरीश चंद्र जाटव अभी नगीना से सांसद हैं। दलित वर्ग की गैर जाटव जातियों को गोलबंद करने की चुनौती है।