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Election Flashback: जब सरकार से अड़ गए थे निर्वाचन आयुक्त शेषन, रोक दिया था चुनाव, पढ़िए 1993 की कहानी

Wed, 27 Mar 2024 06:14 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Wed, 27 Mar 2024 06:14 AM IST
सार

जब टीएन शेषन मुख्य चुनाव आयुक्त बने तो कानून मंत्री विजय भास्कर रेड्डी ने चुनाव आयोग से संसद में पूछे सवालों का जवाब देने के लिए कहना शुरू कर दिया। शेषन ने विरोध करते हुए कहा कि आयोग सरकार का कोई विभाग नहीं है।

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Election Flashback story When Election Commissioner Seshan adamant with government stopped elections
EC

विस्तार

बात 1993 की है। चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन को सरकार की ओर से अक्सर तरह-तरह के दिशा निर्देश मिलते थे। पहले तो उन्होंने इन्हें गंभीरता से नहीं लिया, पर लगातार होते हस्तक्षेप से वह इतने परेशान हो गए कि उन्होंने 17 पेज का एक आदेश जारी कर दिया। उन्होंने लिखा कि जब तक सरकार चुनाव आयोग की शक्तियों को मान्यता नहीं देती, तब तक देश में कोई चुनाव नहीं कराया जाएगा।

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यहां तक कि दो साल बाद घोषित राज्यसभा, लोकसभा और विधानसभा के उपचुनाव भी स्थगित रहेंगे। अपने आदेश पर शेषन अडिग रहे। उन्होंने प. बंगाल की राज्यसभा सीट पर चुनाव नहीं होने दिया, जिसकी वजह से केंद्रीय मंत्री प्रणब मुखर्जी को पद से इस्तीफा देना पड़ा। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ज्योति बसु तो इस कदर नाराज हो गए कि उनकी तुलना जानवर से कर डाली।

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राव से कहा, मिस्टर प्राइम मिनिस्टर, मंत्री को सुधारिए
जब टीएन शेषन मुख्य चुनाव आयुक्त बने तो कानून मंत्री विजय भास्कर रेड्डी ने चुनाव आयोग से संसद में पूछे सवालों का जवाब देने के लिए कहना शुरू कर दिया। शेषन ने विरोध करते हुए कहा कि आयोग सरकार का कोई विभाग नहीं है। बकौल शेषन, रेड्डी ने पीएम नरसिंह राव की उपस्थिति में मुझसे कहा, आप सहयोग नहीं कर रहे हैं। मैंने प्रधानमंत्री की ओर मुड़ कर कहा, मिस्टर प्राइम मिनिस्टर...अगर आपके मंत्री का यही रवैया रहा तो मैं उनके साथ काम नहीं कर सकता।

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