राजस्थान: सियासत में पूर्व राजपरिवारों का दबदबा, राजनीति में लंबे समय से बरकरार है राजघरानों की धमक
धौलपुर राजघराने से दुष्यंत सिंह बीते 20 वर्षों से झालावाड़ सीट से सांसद हैं और इस बार भी चुनाव मैदान में हैं। जयपुर राजपरिवार की दीया कुमारी के स्थान पर राजसमंद सीट पर भाजपा ने उदयपुर राजघराने की महिमा विश्वेश्वर सिंह पर भरोसा जताया है।
विस्तार
रियासतकाल में राजा-रजवाड़ों के लिए मशहूर रहे राजस्थान में अभी भी ऐसे कई राजघराने मौजूद हैं, जिनका सूबे की सियासत में लंबे समय से दबदबा रहा है। हर चुनाव में इनके सदस्य लोकसभा-विधानसभा में जनता का प्रतिनिधित्व करते हैं। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही प्रत्येक चुनाव में इन चेहरों को लोकतंत्र के मैदान में उतारती रही हैं। मौजूदा चुनाव की बात करें तो धौलपुर राजघराने से दुष्यंत सिंह बीते 20 वर्षों से झालावाड़ सीट से सांसद हैं और इस बार भी चुनाव मैदान में हैं। जयपुर राजपरिवार की दीया कुमारी के स्थान पर राजसमंद सीट पर भाजपा ने उदयपुर राजघराने की महिमा विश्वेश्वर सिंह पर भरोसा जताया है। जयपुर सीट पर भी शाहपुरा पूर्व राजपरिवार के प्रमुख राव राजेन्द्र सिंह को भाजपा ने मैदान में उतारा है। पंकज चतुर्वेदी की रिपोर्ट
बीते 3 चुनावों में रजवाड़ी चेहरों पर दांव
लोकसभा 2019
- दुष्यंत सिंह- झालावाड़ से भाजपा प्रत्याशी, जीते
- भंवर जितेन्द्र सिंह- अलवर से कांग्रेस प्रत्याशी, हारे
- दीया कुमारी- राजसमंद से भाजपा प्रत्याशी, जीतीं
लोकसभा 2014
- चंद्रेश कुमारी- जोधपुर से कांग्रेस प्रत्याशी, हारीं
- दुष्यंत सिंह- झालावाड़ से भाजपा प्रत्याशी, जीते
- भंवर जितेन्द्र सिंह- अलवर से कांग्रेस प्रत्याशी, जीते
- चंद्रेश कुमारी- जोधपुर से कांग्रेस प्रत्याशी, जीतीं
भरतपुर: विश्वेन्द्र सिंह 9वीं, 13वीं और 14वीं लोकसभा में सांसद और राजस्थान में तीन बार विधायक रहे। उनके पिता बृजेन्द्र सिंह चौथी लोकसभा में निदर्लीय सांसद थे। पत्नी दिव्या सिंह भी 10वीं लोकसभा की सांसद रहीं। राजपरिवार सदस्य मान सिंह राजस्थान की पहली से सातवीं विधानसभा तक लगातार विधायक, कृष्णेन्द्र कौर दीपा 5 बार विधायक और एक बार सांसद रहीं। अरुण सिंह डीग से चार बार विधायक रहे।
कोटा: कोटा पूर्व राजघराने के बृजराज सिंह 5वीं लोकसभा में सांसद थे। उनके पुत्र इज्यराज सिंह 2009 में सांसद रहे। इज्यराज की पत्नी कल्पना सिंह लगातार दो बार से विधायक हैं।
धौलपुर: दुष्यंत सिंह बीते लगातार चार चुनावों से झालावाड़ से सांसद हैं। उनकी मां पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे इसी सीट से 5 बार सांसद रहीं। वे छह बार राजस्थान में विधायक बनीं। दो बार राजस्थान की मुख्यमंत्री रह चुकीं वसुंधरा ग्वालियर के सिंधिया राजघराने की बेटी हैं।
अलवर: भंवर जितेन्द्र सिंह फिलहाल बड़ा चेहरा हैं। 1998 और 2003 में दो बार विधायक और 2009 में अलव से लोकसभा में चुने गए। केन्द्र में मंत्री रहे। उनकी मां महेन्द्र कुमारी 10वीं लोकसभा में सांसद रहीं।
जोधपुर: गजसिंह राज्यसभा सदस्य रहे। उनकी मां पूर्व राजमाता कृष्णा कुमारी 5वीं लोकसभा में सांसद रही थीं। जोधपुर सांसद रहीं चंद्रेश कुमारी भी इसी परिवार से हैं।
उदयपुर: मेवाड़ के राजपरिवार के महेन्द्र सिंह मेवाड़ 9वीं लोकसभा में चित्तौड़ से चुने गए। विश्वराज सिंह फिलहाल मेवाड़ से विधायक हैं, जबकि उनकी पत्नी महिमा विश्वेश्वर सिंह को भाजपा ने राजसमंद से लोकसभा टिकट दिया है।
करौली: बृजेन्द्र पाल सिंह राजस्थान में पहली से पांचवी विधानसभा तक करौली से विधायक रहे। उनके परिवार की रोहिणी सिंह 2008 में इसी सीट से विधायक बनीं। रोहिणी के पति कृष्णचंद्र पाल ने भी चुनाव लड़ा, लेकिन हारे।
बीकानेर: करणी सिंह पहली से पांचवी लोकसभा तक बीकानेर सीट से सांसद रहे। इसी परिवार की सिद्धिकुमारी 2008 से लेकर अब तक बीकानेर पूर्व सीट से विधायक का चुनाव जीतती रही हैं।