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LS Polls 2024: एमपी की पहले चरण की इन तीन सीटों पर कांग्रेस को जीत की आस, पहली बार BJP को लग सकता है झटका

Fri, 19 Apr 2024 05:21 PM IST
शिव शरण शुक्ला डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Fri, 19 Apr 2024 05:21 PM IST
सार

छिंदवाड़ा प्रदेश की एकमात्र ऐसी सीट है, जिस पर कांग्रेस काबिज है। पूर्व सीएम कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ के बेटे इस सीट से दूसरी बार मैदान में हैं। जबकि भाजपा की तरफ से बंटी साहू फिर मैदान में हैं। साहू का ये पहला लोकसभा चुनाव है। इससे पहले वे दो बार कमलनाथ के सामने ही विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं।

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Congress hopes to win these three seats in first phase lok sabha polls voting of MP
लोकसभा चुनाव की लड़ाई। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लोकसभा चुनाव 2024 में मध्यप्रदेश की 29 में से 6 सीटों पर पहले चरण का मतदान हो रहा है। इनमें छिंदवाड़ा, मंडला, सीधी, बालाघाट, शहडोल और जबलपुर शामिल हैं। इनमें तीन सीटों पर कांटे की टक्कर नजर आ रही है। इन सीटों के नतीजे किसी भी तरफ जा सकते हैं। जबकि बालाघाट, शहडोल और जबलपुर में समीकरण भाजपा के पक्ष में जा रहे हैं। दोपहर 1 बजे तक 44.43 फीसदी मतदान हुआ।

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छिंदवाड़ा प्रदेश की एकमात्र ऐसी सीट है, जिस पर कांग्रेस काबिज है। पूर्व सीएम कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ के बेटे इस सीट से दूसरी बार मैदान में हैं। जबकि भाजपा की तरफ से बंटी साहू फिर मैदान में हैं। साहू का ये पहला लोकसभा चुनाव है। इससे पहले वे दो बार कमलनाथ के सामने ही विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं और दोनों ही चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा था। 2024 पर इस सीट पर कमल खिलाने के लिए भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी है। गृहमंत्री अमित शाह, मध्यप्रदेश के सीएम डॉ. मोहन यादव से लेकर कई केंद्रीय मंत्रियों ने यहां जमकर प्रचार किया। जबकि कमलनाथ ने अपने गढ़ को बचाने के लिए खुद मोर्चा संभाला हुआ है। वे लोगों से 40 साल के संबंधों का हवाला दे रहे हैं।
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मंडला लोकसभा सीट से एक बार फिर फग्गन सिंह कुलस्ते मैदान में हैं। कुलस्ते को हाल ही में विधानसभा चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा था। आदिवासी और स्थानीय लोग कुलस्ते से नाराज हैं। लेकिन कुलस्ते को अपने काम से ज्यादा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम और राम मंदिर लहर पर भरोसा है। कांग्रेस के ओमकार सिंह मरकाम आदिवासियों के बीच तेजी से लोकप्रिय हुए हैं। उन्हें इसका फायदा मिलता दिख रहा है। मंडला में विधानसभा में भी कांग्रेस 8 में से 5 सीटें जीती हैं। हाल ही में कुलस्ते को विधानसभा चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा था।
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बालाघाट सीट से भाजपा ने भारती पारधी को टिकट दिया है। वे पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ रही हैं। कांग्रेस ने पूर्व विधायक अशोक सरस्वार के बेटे सम्राट सिंह को मैदान में उतारा है। बसपा से कंकर मुंजारे के मैदान में उतरने से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। मुंजारे लोधी समुदाय से आते हैं। कांग्रेस को उम्मीद है कि बालाघाट विधायक और कंकर मुंजारे की पत्नी अनुभा मुंजारे के कारण लोधी वोट उन्हें मिल सकते हैं। जबकि भारती पारधी जिस पंवार समुदाय से आती हैं, उन्हें इस समाज के वोट मिलने की उम्मीद है।

सीधी लोकसभा सीट से कांग्रेस ने यहां से कमलेश्वर पटेल को मैदान में उतारा है। इसके उलट भाजपा ने मौजूदा सांसद रीती पाठक की जगह नए चेहरे डॉक्टर राजेश मिश्रा को मौका दिया है। सीधी में पेशाब कांड का वीडियो वायरल करने में डॉ. मिश्रा के बेटे की भूमिका की चर्चा है। इसे लेकर सीधी के पूर्व विधायक केदारनाथ शुक्ला भी डॉ. राजेश मिश्रा से नाराज हैं। इसी पेशाब कांड की वजह से शुक्ला का राजनीतिक करियर खत्म हुआ है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सीधी की पूर्व सांसद रीति पाठक भी यहां डॉ. मिश्रा के लिए पूरी ताकत नहीं लगा रही हैं। प्रदेश सरकार में मंत्री नहीं बनाए जाने से पाठक नाखुश बताई जा रही हैं।

शहडोल लोकसभा सीट पर मुकाबला हिमाद्री सिंह और कांग्रेस के फुंदेलाल मॉर्को के बीच है। मार्को को आखिरी समय में टिकट मिला है। यहां से कांग्रेस को जब कोई चेहरा नहीं मिला, तब मार्को को आगे किया गया। अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित शहडोल सीट भाजपा मजबूत नजर आती है।


जबलपुर लोकसभा सीट पर मुकाबला भाजपा के आशीष दुबे और कांग्रेस के दिनेश यादव के बीच है। कांग्रेस के नेताओं का यादव को समर्थन नहीं है। सभी ने चुनाव लड़ने से इनकार किया, तो यादव को चुनाव लड़ना पड़ा। कांग्रेस के महापौर जगत बहादुर अन्नू, पूर्व विधायक नीलेश अवस्थी समेत कई नेता भाजपाई हो गई है। यहां कांग्रेस अदरुनी लड़ाई से जूझ रही है।

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