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महाराष्ट्र: प्रतिष्ठा और साख की लड़ाई, विभाजित शिवसेना और दोफाड़ हुई NCP के लिए विदर्भ बना मुश्किल रणक्षेत्र

Thu, 28 Mar 2024 06:16 AM IST
यशोधन शर्मा सुरेन्द्र मिश्र, मुंबई।
सुरेन्द्र मिश्र, मुंबई। Published by: यशोधन शर्मा Updated Thu, 28 Mar 2024 06:16 AM IST
सार

महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में अप्रैल और मई में पारा 45 डिग्री को पार कर जाता है। हालांकि, यहां चुनावी तपिश मार्च से ही बढ़ गई है। पहले और दूसरे चरण के चुनाव में जिन लोकसभा सीटों पर मतदान होना है, उनमें विदर्भ की भी 10 सीटें हैं।

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Battle of reputation and credibility divided Shiv Sena and NCP Vidarbha becomes difficult battlefield
नितिन गडकरी और कांग्रेस से रश्मि बर्वे - फोटो : Social Media

विस्तार

विदर्भ में भाजपा के लिए जहां प्रतिष्ठा का चुनाव है, तो वहीं कांग्रेस के सामने खोई साख वापस पाने की चुनौती है। पिछले दो चुनावों में विदर्भ की जनता ने भाजपा और अविभाजित शिवसेना पर भरोसा किया था। पूर्वी विदर्भ में भाजपा तो पश्चिम में शिवसेना ने अपनी मजबूत पकड़ बनाई है।

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1960 से लेकर 2009 तक पूरा विदर्भ कांग्रेस का मजबूत गढ़ रहा था। आपातकाल के बाद 1977 के चुनाव में जब कांग्रेस की करारी हार हुई थी, उस वक्त भी विदर्भ की जनता ने सभी सीटें इंदिरा गांधी को भेंट की थीं। अब, विभाजित शिवसेना और दोफाड़ हुई एनसीपी के लिए विदर्भ का रण आसान नहीं रह गया है।
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विदर्भ यानी पूर्वी महाराष्ट्र के 11 जिलों का क्षेत्र। इस क्षेत्र में लोकसभा की 10 सीटें हैं। इनमें से पांच नागपुर, रामटेक, चंद्रपुर, गोंदिया-भंडारा और गढ़चिरौली सीटों पर पहले चरण में 19 अप्रैल को मतदान होगा। दूसरे चरण में 26 अप्रैल को अकोला, अमरावती, वर्धा, यवतमाल-वाशिम और बुलढाणा सीट पर मतदान होगा।
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रामटेक एससी, तो गढ़चिरौली-चिमूर (एसटी) आरक्षित सीट है। सभी सीटों पर शिवसेना उद्धव बालासाहब ठाकरे, एनसीपी शरद पवार व कांग्रेस के महा विकास आघाड़ी (एमवीए) गठबंधन और सत्तारूढ़ भाजपा-शिवसेना-एनसीपी (अजित गुट) की महायुति के बीच कड़ा मुकाबला है। 10 लोकसभा सीटों और 62 विधानसभा क्षेत्रों वाला विदर्भ क्षेत्र 2024 के चुनाव में सत्तारूढ़ महायुति और विपक्षी एमवीए गठबंधन के राजनीतिक भविष्य का इतिहास लिखेगा।

नागपुर में गडकरी के विकास को ठाकरे दे रहे चुनौती
नागपुर विदर्भ का प्रमुख शहर है, जहां हाईवे मैन का तमगा पा चुके केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी तीसरी बार चुनाव लड़ रहे हैं। वे हैट्रिक लगाने की तैयारी में हैं, जबकि कांग्रेस ने नागपुर दक्षिण के विधायक व कांग्रेस जिलाध्यक्ष विकास ठाकरे को मैदान में उतारकर कड़े मुकाबले की लकीर खींच दी है। वहीं, पड़ोस की चंद्रपुर सीट पर पिछली बार पूर्व केंद्रीय मंत्री हंसराज अहिर की हार के बाद भाजपा ने राज्य के तेज-तर्रार मंत्री सुधीर मुनगंटीवार पर दांव लगाया है। कांग्रेस ने दिवंगत बालू धानोरकर की पत्नी प्रतिमा को मैदान में उतारा है, जिससे मुकाबला रोचक होने के आसार हैं।

नागपुर के पास की ही रामटेक सीट पर कांग्रेस ने रश्मि बर्वे को टिकट दिया है। महायुति में यह सीट शिवसेना (शिंदे गुट) के पास है। कांग्रेस विधायक राजू पारवे के शिंदे गुट से चुनाव लड़ने की चर्चा है। पारवे ने हाल ही में कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता के साथ ही विधायक पद से इस्तीफा दिया है। इसी तरह, भंडारा-गोंदिया और गढ़चिरौली-चिमूर सीट पर भी महाविकास आघाड़ी और महायुति के उम्मीदवारों के बीच कांटे की टक्कर होने की संभावना है।

आम चुनाव में भाजपा का दबदबा
भाजपा ने 2014 के लोकसभा चुनाव में 6 और 2019 में 5 सीटों पर कब्जा किया था। इनमें नागपुर, वर्धा, गढ़चिरौली-चिमूर, गोंदिया-भंडारा और अकोला सीट पर जीत दर्ज कर वर्चस्व स्थापित किया था। वहीं, अविभाजित शिवसेना ने भी बुलढाणा, यवतमाल-वाशिम और रामटेक सीट पर जीत हासिल की थी। चंद्रपुर सीट कांग्रेस के खाते में गई थी। हालांकि, यहां से चुने गए बालू धानोरकर की मई 2023 में मृत्यु हो गई। वहीं, अमरावती में निर्दलीय नवनीत राणा ने एनसीपी के समर्थन से जीत दर्ज की थी। भाजपा ने यहां से नवनीत को अपना उम्मीदवार बनाया है।

विदर्भ की राजनीति
महाराष्ट्र की उपराजधानी नागपुर में आरएसएस का मुख्यालय है। यहां जीरो माइल भी है, जो भारत का केंद्र बिंदु है। पड़ोस में वर्धा निर्वाचन क्षेत्र महात्मा गांधी की कर्मभूमि रही है। वहीं, तीर्थनगरी रामटेक में प्रसिद्ध कवि कालिदास ने मेघदूत की रचना की थी। किसानों की खुदकुशी के लिए कुख्यात विदर्भ के प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र की अलग-अलग समस्याएं हैं। कपास और सोयाबीन मुख्य फसल होने के साथ-साथ यहां संतरे की भी बड़े पैमाने पर खेती होती है। चौसठ साल पहले विदर्भ क्षेत्र, मध्य प्रांत और बरार का हिस्सा था, जिसे नागपुर समझौते के तहत महाराष्ट्र में शामिल किया गया था। इसी समझौते के अनुसार, हर साल नागपुर में विधानमंडल का शीतकालीन सत्र आहूत होता है। हालांकि, इस शर्त को कई बार तोड़ा भी जा चुका है।


पहले पांच लोकसभा क्षेत्रों में मतदाता
नागपुर 22,22,434
रामटेक 20,48,126
भंडारा-गोंदिया 18,26,308
गढ़चिरौली-चिमूर 16,16,618
चंद्रपुर 18,37,357

विधानसभा चुनाव में घट गई थीं भाजपा की सीटें
महाराष्ट्र के 2019 के विधानसभा चुनाव पर नजर डालें तो विदर्भ की कुल 62 सीटों में से भाजपा ने 29, अविभाजित शिवसेना ने 4, एनसीपी ने 6, कांग्रेस ने 15 और अन्य ने 8 सीटें जीती थीं। हालांकि, इससे पहले 2014 में भाजपा ने विदर्भ में विधानसभा की 44 सीटों पर जीत का डंका बजाया था। विदर्भ की 15 विधानसभा सीटें खोने के चलते लोकसभा चुनाव में भी पार्टी के लिए चिंता कायम है।

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