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Ground Report Amravati: श्रीकृष्ण के ससुराल में महाभारत, भाजपा उम्मीदवार नवनीत राणा और कांग्रेस के बलवंत के बी

Thu, 25 Apr 2024 06:55 AM IST
जलज मिश्रा सुरेन्द्र मिश्र, अमरावती
सुरेन्द्र मिश्र, अमरावती Published by: जलज मिश्रा Updated Thu, 25 Apr 2024 06:55 AM IST
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सार

प्रतिभा पाटिल के रूप में पहली महिला राष्ट्रपति और पंजाबराव देशमुख के रूप में देश को पहला कृषि मंत्री देने वाले अमरावती से सियासत के कई धुरंधर निकले हैं। बीते कुछ वर्षों से सांसद नवनीत राणा चर्चा में हैं। आजादी के बाद पहली बार भाजपा यहां चुनाव लड़ रही है। प्रत्याशी हैं पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के घर के सामने हनुमान चालीसा पढ़ने की चुनौती देने वाली नवनीत राणा। तब उन्हें पति रवि राणा के साथ 12 दिन जेल में बिताने पड़े थे। उसके बाद से राणा दंपती हनुमान भक्त बन चुका है। 

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Amar ujala Exclusive Story Ground Report Amravati BJP candidate Navneet Rana Congress Balwant
ग्राउंड रिपोर्ट। - फोटो : amar ujala

विस्तार

चुनाव आयोग की सख्ती से चुनाव प्रचार का शोर तो नहीं दिख रहा, लेकिन अमरावती शहर में दाखिल होते ही प्रचार की रंगत दिखाई पड़ने लगती है। पौराणिक मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण की ससुराल पश्चिम विदर्भ के अमरावती में थी और यहां के कौंडण्यपुर में रुक्मिणी का मायका था। यह भी दंतकथा है कि राजा दशरथ की मां इंदुमति भी यहां की राजकुमारी थीं। पौराणिक महत्व वाले अमरावती में हिंदुत्व कभी चुनावी मुद्दा नहीं रहा। भाजपा प्रवक्ता रहीं नूपुर शर्मा के विवादित बयान के बाद केमिस्ट उमेश कोल्हे की हुई निर्मम हत्या के बाद यहां का सामाजिक तानाबाना बिगड़ा है। इसके चलते यहां हिंदुत्व की राजनीति के साथ ही जातिगत ध्रुवीकरण भी दिखाई दे रहा है।

प्रतिभा पाटिल के रूप में पहली महिला राष्ट्रपति और पंजाबराव देशमुख के रूप में देश को पहला कृषि मंत्री देने वाले अमरावती से सियासत के कई धुरंधर निकले हैं। बीते कुछ वर्षों से सांसद नवनीत राणा चर्चा में हैं। आजादी के बाद पहली बार भाजपा यहां चुनाव लड़ रही है। प्रत्याशी हैं पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के घर के सामने हनुमान चालीसा पढ़ने की चुनौती देने वाली नवनीत राणा। तब उन्हें पति रवि राणा के साथ 12 दिन जेल में बिताने पड़े थे। उसके बाद से राणा दंपती हनुमान भक्त बन चुका है। 

यहां के अजय बोबडे कहते हैं कि वह दिन में तीन बार हनुमान चालीसा का पाठ करती हैं। प्रतीक वारीकर बताते हैं कि राणा दंपती अमरावती शहर से बाहर 10 एकड़ में 111 फुट की विशालकाय प्रतिमा का निर्माण करवा रहा है। उन्होंने उमेश कोल्हे की हत्या का मुद्दा भी जोरशोर से उठाया था। अमरावती के मोहित कहते हैं, कोल्हे हत्याकांड को लोग भूले नहीं हैं। राणा परिवार के साथ ही यहां उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस की प्रतिष्ठा भी दांव पर है। 

पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल (1991-96) के बाद अमरावती में कांग्रेस दोबारा कभी नहीं जीत सकी है। इस बार विधायक बलवंत वानखड़े कांग्रेस की ओर से चुनौती पेश कर रहे हैं। एससी के लिए आरक्षित सीट पर दबंग विधायक ओम प्रकाश उर्फ बच्चू कड़ू की प्रहार जनशक्ति पार्टी से दिनेश बूब, बसपा से संजय कुमार गाडगे और निर्दलीय आनंदराज आंबेडकर सहित 37 प्रत्याशी मैदान में हैं। 

6 विधानसभा, भाजपा का एक भी विधायक नहीं
अमरावती विदर्भ का दूसरा बड़ा संभाग है। लोकसभा क्षेत्र में कुल छह विधानसभा क्षेत्र हैं, जिसमें अमरावती, बडनेरा, दर्यापुर, अचलपुर, तिवसा और मेलघाट शामिल हैं। बडनेरा से नवनीत राणा के पति रवि राणा निर्दलीय विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के तीन सुलभा संजय खोडके, तिवसा से यशोमती ठाकुर और दर्यापुर से बलवंत बसवंत वानखड़े विधायक हैं। मेलघाट व अचलपुर में प्रहार संगठन के राजकुमार पटेल और बच्चू कड़ू विधायक हैं। यहां भाजपा का कोई विधायक नहीं है। यहां शहर की तुलना में ग्रामीण मतदाताओं की संख्या दोगुनी है। दलित-आदिवासी, कुनबी, सिंधी और मुस्लिम के अलावा तीन लाख से अधिक हिंदीभाषी मतदाता हैं, जो निर्णायक साबित हो सकते हैं। दिनेश बूब लड़ाई को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश में हैं। 

धनशक्ति बनाम जनशक्ति की लड़ाई है : वानखड़े
कांग्रेस उम्मीदवार बलवंत वानखड़े कहते हैं, लड़ाई धनशक्ति बनाम जनशक्ति की है। नवनीत राणा के मैदान में आने से लड़ाई और आसान हो गई है। वानखडे डीएमके (दलित, मुस्लिम और कुनबी) के साथ हिंदीभाषियों को साधने में जुटे हैं। बलवंत वानखेड़े का अब तक का राजनीतिक सफर ग्राम पंचायत से विधायक तक का रहा है।  ग्राम पंचायत सदस्य चुने जाने के बाद सरपंच बने। उसके बाद वह जिला परिषद सदस्य और अध्यक्ष भी रहे। वह रोजगार, कपास के भाव और आदिवासियों के मुद्दे पर नवनीत राणा को घेर रहे हैं।

नागपुर की तर्ज पर करना है विकास : नवनीत
भाजपा उम्मीदवार नवनीत राणा कहती हैं कि वह अमरावती का विकास नागपुर की तर्ज पर करना चाहती हैं। स्वयं को मेलघाट (कुपोषण के लिए कुख्यात आदिवासी इलाका) की बेटी कहती हैं। नवनीत के पति रवि राणा का युवा स्वाभिमान संगठन है, जिसके माध्यम से उनका क्षेत्र में मजबूत जनसंपर्क है। जबकि नवनीत कट्टर हिंदुत्व के रुख के साथ चुनाव प्रचार कर रही हंै। वह क्षेत्र में लोकप्रिय हैं, लेकिन उनके दुश्मनों की भी कमी नहीं है। राणा परिवार का विरोधी दल के नेताओं से छत्तीस का आंकड़ा है। वहीं, भाजपा की अंदरुनी नाराजगी से निपटने की भी चुनौती है।

 

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