Bijuli Kalita Medhi: पेशे से शिक्षिका, डिप्टी मेयर रहीं, 42 लाख कार्यकर्ताओं में से चुनी गईं लोकसभा उम्मीदवार
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विस्तार
असम की गुवाहाटी लोकसभा सीट से भाजपा के टिकट पर इस बार मैदान में हैं बिजुली कलिता मेधी। ज्योतिनगर की कलिता निजी अंग्रेजी स्कूल में शिक्षिका रह चुकी हैं। उनके पति टिकेन मेधी दुखिया स्टोर के नाम से किराने की दुकान चलाते हैं। वह भी लंबे समय से भाजपा से जुड़े हैं। कलिता भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष और असम भाजपा की पूर्व महिला मोर्चा अध्यक्ष रह चुकी हैं। यह उनका पहला लोकसभा चुनाव है। 2019 में गुवाहाटी सीट से भाजपा की रानी ओजा सांसद थी। मेधी का मुकाबला कांग्रेस की मीरा बोरठाकुर से होगा। असम के 42 लाख कार्यकर्ताओं में से भाजपा नेतृत्व ने मेधी को चुना है।
बिजुली की हमेशा से ही राजनीति में गहरी रुचि रही। 1998 में मेधी कार्यकर्ता के रूप में भाजपा में शामिल हुईं। इसके बाद से वह पार्टी की सेवा में समर्पित रहीं। 2013 में उन्होंने वार्ड नंबर-23 से जीएमसी काउंसिल का चुनाव लड़ा। 2016 में डिप्टी मेयर चुनी गईं। बिजुली ने दो कार्यकालों के लिए पार्टी की राज्य महिला मोर्चा अध्यक्ष की कमान भी संभाली। वह असम में भाजपा की कोर कमेटी की सदस्य भी हैं।
बिजुली कलिता मेधी इस बात से इन्कार करती हैं कि सियासत में पुरुषों का अब भी दबदबा है। वह कहती हैं कि महिलाएं राजनीति में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। वह कहती हैं, मैं पार्टी में सेवा के लिए आई हूं। मैं यहां पार्टी कार्यकर्ता के रूप में हूं न कि पुरुष या महिला कार्यकर्ता के रूप में। भाजपा महिला उम्मीदवारों को लगातार मौके दे रही है।
महिलाओं के दर्द से अच्छी तरह वाकिफ
मेधी ने बताया कि महिला होने के नाते उन्हें महिलाओं के दर्द का अच्छी तरह अंदाजा है। भाजपा सरकार पहले से ही महिला सशक्तीकरण के लिए काम कर रही है। वह महिलाओं के मुद्दों को प्रमुखता से उठाएंगी। प्रचार के दौरान जब वह महिलाओं से मिलती हैं, तो सबसे ज्यादा शिकायत सार्वजनिक शौचालय की होती है। चुनाव जीतने के बाद प्राथमिकता से इस समस्या को दूर करेंगी। मेधी पूरे आत्मविश्वास से कहती हैं कि गुवाहाटी सीट से सांसद रहे दिग्गजों की विरासत को वह बरकरार रखेंगी।
गुवाहाटी सीट पर एक नजर
1952 में गुवाहाटी सीट का प्रतिनिधित्व कांग्रेस नेता रोहिणी कुमार चौधरी ने किया था। वह 1952 में भारत की संविधान सभा के सदस्य भी थे। 1957, 1962 और 1967 में असम के सबसे बड़े साहित्यकार और समाजवादी शख्सियतों में से एक हेम बरुआ और 1971 और 1985 में पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री व असम गण परिषद नेता दिनेश गोस्वामी संसद में गुवाहाटी की आवाज रहे हैं।