Hassan Ground Report: हारे तो गौड़ा…जीते तो भी गौड़ा...पर कौनसा, यह वक्त ही बताएगा, पढ़ें क्या कहते हैं मतदाता
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हासन...दो परिवारों की चार दशक से सियासी अदावत का गवाह। इस बार पौत्रों के बीच लड़ाई है। पूर्व पीएम एचडी देवगौड़ा के पौत्र जदएस के प्रज्ज्वल रेवन्ना को चुनौती दे रहे हैं जी पुट्टास्वामी गौड़ा के पौत्र कांग्रेस के एम. श्रेयस पटेल। वोक्कालिगा समुदाय के दिग्गजों के पौत्रों की लड़ाई ने सियासी रोमांच बढ़ा दिया है। लोग कहते हैं, जीतेगा तो गौड़ा ही...पर कौनसा, यह वक्त बताएगा।
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विस्तार
जनता दल सेक्युलर (जदएस) के मुखिया और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा का पैतृक गांव हरदनहल्ली। यहां हर व्यक्ति का चेहरा गांव का नाम पूछने भर से ही चमक से भर उठता है। शाम करीब साढ़े चार बजे...चुनावी गर्मी के बावजूद देवगौड़ा के घर पर कोई तामझाम, तड़क-भड़क नहीं, बेहद सादगीभरा शांत वातावरण। खुद देवगौड़ा के पौत्र सांसद प्रज्ज्वल रेवन्ना के प्रत्याशी होने के बावजूद कोई चुनावी शोरशराबा नहीं। घर की मरम्मत के कार्य को अंतिम रूप देने में जुटे मजदूरों से पूछने पर कि देवगौड़ा परिवार से कभी कोई आता है? जवाब मिला, सब बंगलूरू में रहता है। कभी-कभार आता है। चुनाव में भी नहीं? इस पर कहा, पूरा गांव उनका है, बल्कि पूरा क्षेत्र ही इस परिवार को अपना मानता है।
हासन जिला मुख्यालय पर भरे चुनाव में फैले सन्नाटे को चीरने के लिए सकलेशपुर से लेकर धार्मिक नगरी बेलुर तक हमने कई गांवों की खाक छानी। हर जगह से मायूसी हाथ लगने पर हरदनहल्ली का रुख कर लिया। हासन से करीब 59 किमी दूर बंगलूरू हाईवे किनारे पहाड़ियों के बीच बसे इस गांव में भी सन्नाटा ही मिला। उत्तर भारत से जुड़ा कोई भी व्यक्ति यही उम्मीद करता है कि चुनावी माहौल तो बना ही होगा। कम से कम प्रत्याशी के जहां घर-ठिकाने होंगे, वहां तो जरूर ही। मन में सवाल यह भी आता है कि एक पूर्व प्रधानमंत्री, एक पूर्व मुख्यमंत्री, पांच बार के विधायक और एक सांसद के पैतृक घर पर तो परिंदा भी पर न मार सकेगा। लेकिन, यहां ऐसा कुछ नहीं। घर की चहारदीवारी पर ही नहीं, आसपास भी कोई सूचनापट नहीं दिखा, जिस पर इतने बड़े-बड़े नामों में से किसी एक का जिक्र मिले।
गांव के बाहर से ही हमारे साथ हो लिए युवक चंद्रूराज और वहां काम कर रहे बिहार के दरभंगा निवासी रंजीत ने बताया कि दो मंजिल का यह मकान पुराना हो गया था। इसकी मरम्मत कराई गई है। सामने पड़ी खाली जमीन पर भी निर्माण शुरू कराया गया है। चंद्रूराज ने पास के एक खपरैल के मकान की ओर इशारा करते हुए बताया कि दशकों पहले देवगौड़ा का घर भी ऐसा ही था। बाद में कंक्रीट का घर बनाया गया था।
सियासी प्रतिद्वंद्विता
हासन से सांसद और जदएस प्रत्याशी प्रज्ज्वल रेवन्ना के सामने देवगौड़ा के धुर विरोधी रहे जी पुट्टास्वामी गौड़ा के पौत्र श्रेयस पटेल कांग्रेस के टिकट पर कड़ी चुनौती पेश कर रहे हैं। पिछले साल विधानसभा चुनाव में हासन में आने वाली होलेनरासीपुर सीट पर श्रेयस ने प्रज्ज्वल के पिता एचडी रेवन्ना के खिलाफ ताल ठोकी थी। यह उनका पहला चुनाव था। कड़ी लड़ाई में रेवन्ना महज 3,152 वोटों से जीत सके। श्रेयस की यह हिमाकत देवगौड़ा परिवार की प्रतिष्ठा के लिए चुनौती बन गई है।
परंपरागत सीट बचाए रखने के लिए 92 वर्षीय देवगौड़ा प्रज्ज्वल के पक्ष में रोड शो कर चुके हैं। इसमें उन्होंने क्षेत्र की जनता से बड़ी भावुक अपीलें कीं। यहां तक कि अपने जीवन का आखिरी चुनाव भी बता दिया। हालांकि, वोक्कालिगा समुदाय से आने वाले दोनों नेताओं में हासन लोकसभा सीट पर देवगौड़ा का प्रभाव अधिक रहा। इसका अंदाजा दोनों के सियासी कद से भी लगाया जा सकता है।
क्या गुल खिलाएगी सियासी अदावत
करीब चार दशक पहले तक देवगौड़ा और पुट्टास्वामी गौड़ा के बीच अच्छे संबंध रहे। अस्सी के दशक के शुरुआती दौर में सियासी महत्वाकांक्षाओं की वजह से मनभेद की खाई इतनी गहरा गई कि परिवारों में हमेशा के लिए तलवारें खिंच गईं। 1991 के बाद पुट्टस्वामी ही ऐसे नेता रहे, जिन्होंने देवगौड़ा को हासन में शिकस्त दी।
हवा हो गई दुश्मनी खत्म होने की चर्चा
2006 में पुट्टास्वामी के निधन के बाद चर्चा चली कि दोनों परिवारों के बीच दुश्मनी खत्म हो गई। इसलिए भी कि पुट्टस्वामी के इकलौते पुत्र की मृत्यु पहले ही हो चुकी थी। लेकिन, उनकी बहू अनुपमा ने वर्ष 2008 और 2013 के विधानसभा चुनाव में एचडी रेवन्ना के खिलाफ खुलकर ताल ठोकी। हालांकि, दोनों ही चुनावों में वह कामयाब नहीं हुईं। अब बेटे श्रेयस के सहारे देवगौड़ा परिवार को उसकी मांद में ही मात देने की कोशिश में जुटी हैं।
हासन का ऐतिहासिक व पुरातात्विक महत्व : हासन जिला ऐतिहासिक और पुरातन महत्व की धरोहरों से सुसज्जित है। बेलुर में 12वीं सदी में बना भगवान विष्णु का मंदिर है, जिसे चेन्नाकेशव नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर में की गईं नक्काशियां उस दौर के संगीत और सांस्कृतिक समृद्धि की गवाही देती हैं। इसके अलावा श्रवणबेलगोला में भगवान बाहुबली की प्रसिद्ध मूर्ति भी आकर्षण का केंद्र है। यही नहीं, केजीएफ-1 व 2 जैसी चर्चित हिट फिल्म देने वाले लोकप्रिय कन्नड़ अभिनेता यश भी यहीं के रहने वाले हैं।