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Hindi News ›   Election ›   Bihar Election 2025 results since 2005 in last 20 years bihar saw only two cm nitish kumar and manjhi

2005 से अब तक का बिहार: पांच चुनाव, दो चेहरे, 10 बार मुख्यमंत्री की शपथ; कब कैसे रहे नतीजे, क्यों बदले हालात?

Mon, 10 Nov 2025 10:13 AM IST
संध्या इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला
इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला Published by: संध्या Updated Mon, 10 Nov 2025 10:13 AM IST
सार

बिहार में पिछले पांच चुनावों की बात करें तो नतीजे किसी भी पार्टी के पक्ष में गए हों, लेकिन सत्ता की चाबी केवल एक व्यक्ति के हाथ में रही। पिछले 25 वर्षों में बिहार में नीतीश कुमार की सत्ता बरकरार है। पिछले पांच चुनावों में क्या थे बिहार चुनावों के नतीजे जानें...

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Bihar Election 2025 results since 2005 in last 20 years bihar saw only two cm nitish kumar and manjhi
बिहार चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिहार में पहले चरण का मतदान हो चुका है। मंगलवार को दूसरे चरण में 20 जिलों की 122 सीटों पर वोटिंग होगी। 14 नवंबर को नतीजे आने के साथ यह तय हो जाएगा कि राज्य में किसकी सरकार बनेगी। कौन मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठेगा। पिछले पांच विधानसभा चुनावों में बिहार ने दो मुख्यमंत्रियों को देखा है। 

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पिछले पांच बार से बिहार में चुनावों का क्या पैटर्न रहा है? मतदाताओं और वोट प्रतिशत का आंकड़ा कैसे बढ़ा-घटा? इस दौरान किस पार्टी को कितनी सीट मिलती रही है? किसी पार्टी का वोट प्रतिशत कम रहा किसका ज्यादा रहा? किस गठबंधन का प्रदर्शन कैसा रहा? आइये जानते हैं…

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जब कोई नहीं बना बिहार का सीएम

2000 में बिहार राज्य का विभाजन हुआ। बिहार से अलग होकर झारखंड एक नया राज्य बना। बिहार विभाजन के बाद फरवरी 2005 में पहली बार चुनाव हुए। इस चुनाव में कुल 5,26,87,663 मतदाता वोट डालने के लिए पात्र थे। इनमें से 46.5 फीसदी ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। जो पिछले तीन चुनाव के मुकाबले बहुत कम था। 

जब चुनाव नतीजे आए तो किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला। चुनाव से पहले तक सत्ता में रही  राजद को 25.1 फीसदी वोट मिले। उसे 75 सीटों से संतोष करना पड़ा। जो बहुमत के 122 के आंकड़े से बहुत कम था। नीतीश कुमा रकी जदयू को 14.6 फीसदी वोट के साथ 55 सीटें मिलीं। भाजपा को 37 और कांग्रेस 10 सीटों पर जीत मिली। इनका वोट शेयर क्रमश: 11 और 5 फीसदी रहा। राम विलास पासवान की लोजपा को 12.6 फीसदी वोट के साथ 29 सीटों पर जीत मिली। 

एनडीए (जदयू + भाजपा) सबसे बड़ा गठबंधन था लेकिन उसे भी बहुमत से कम सीटें मिलीं। रामविलास पासवान की लोजपा “किंगमेकर” बन गई यानी उसके समर्थन से ही सरकार बन सकती थी। कई हफ्ते तक जोड़ तोड़ की कोशिश होती रही, लेकिन कोई दल या गठबंधन बहुमत के आंकड़े को नहीं जुटा सका। राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा और अक्तूबर 2005 में एक बार फिर चुनाव हुए। 

अक्तूबर 2005: एनडीए सरकार में नीतीश बने मुख्यमंत्री

अक्तूबर 2005 में फिर से राज्य में चुनाव हुए। इस चुनाव में कुल 5,13,85,891 मतदाता वोट देने के लिए पात्र थे। इसमें से 45.8 फीसदी ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। चुनाव नतीजे आए तो एनडीए को स्पष्ट बहुमत मिला। सबसे ज्यादा 88 सीटें जीतकर जदयू सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। जदयू को 20.46 प्रतिशत वोट मिले थे। वहीं गठबंधन में उसकी साथी भाजपा को 15.65 प्रतिशत वोट को साथ 55 सीटों पर जीत मिली। राजद को 54 और कांग्रेस को नौ सीटों पर संतोष करना पड़ा था। राजद भले ही तीसरे नंबर पर रही लेकिन उनका वोट शेयर सभी दलों में सबसे ज्यादा 23.45 फीसदी था। लोजपा को कांग्रेस से एक ज्यादा यानी 10 सीटें मिली थी। बाकी सीटें अन्य के खाते में गई थीं। 

जीत के बाद भाजपा और जदयू ने मिलकर सरकार बनाई। दोनों को कुल 143 सीटें मिली थीं। जदयू के नीतीश कुमार राज्य के मुख्यमंत्री बने। 

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2010: नीतीश कुमार फिर बने मुख्यमंत्री, पर बहुत कुछ बदलता गया

2010 के विधानसभा चुनाव में एक बार फिर एनडीए को जीत मिली। नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने। जदयू सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। इस चुनाव में कुल 5,51,20,656 मतदाता थे। इमने से 52.67 प्रतिशत ने वोट दिया। चुनाव नतीजे आए तो जदयू ने 141 सीटों पर चुनाव लड़कर 115 (22.58%) सीटों पर जीत दर्ज की। वहीं, भाजपा को 16.49 प्रतिशत वोट शेयर के साथ कुल 102 में से 91 सीटों पर जीत मिली। एनडीए गठबंधन ने 206 सीटों पर जीत के साथ जोरदार वापसी की। नीतीश कुमार को एक बार फिर मुख्यमंत्री बने। 

इस चुनाव में राजद और लोजपा साथ थे। इसमें राजद को 22 सीटों पर और लोजपा को केवल तीन सीटों पर जीत मिली। राजद को 18.84 और लोजपा को 6.74 प्रतिशत वोट से संतोष करना पड़ा। 

नतीजों के बाद चार साल तक तो नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री के पद पर काम किया। लेकिन 2014 के आम चुनावों के समय बिहार में बड़े सियासी बदलाव हुए। प्रधानमंत्री पद के लिए भाजपा ने नरेंद्र मोदी का नाम सामने रखा। इससे नीतीश नाराज हो गए और एनडीए से रिश्ता तोड़कर राजद और कांग्रेस के समर्थन से सत्ता में बने रहे। हालांकि, 2014 का लोकसभा चुनाव नीतीश ने इन दलों से भी अलग लड़ा। राज्य की 40 में से 38 सीटों पर जदयू ने उम्मीदवार उतारे पर उसे बड़ी हार मिली। पार्टी सिर्फ दो सीटें जीत पाई। नीतीश कुमार ने इस खराब प्रदर्शन की जिम्मेदारी लेते हुए मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ दी। जीतन राम मांझी को बिहार का नया मुख्यमंत्री बनाया गया। मांझी के मुख्यमंत्री बनने के बाद नीतीश और मांझी के रिश्ते बिगड़ने लगे। अंतत: फरवरी 2015 में मांझी को हटाकर नीतीश फिर से मुख्यमंत्री बन गए।

2015: 20 साल बाद नीतीश-लालू साथ 

2015 के चुनाव में दो दशक के बाद नीतीश कुमार और लालू यादव साथ चुनाव लड़े। जदयू राजद और कांग्रेस ने मिलकर महागठबंधन बनाया। इस चुनाव में वोट डालने के लिए पात्र 6,70,56,820 मतदाताओं में से 56.66 फीसदी ने मतदान किया। नतीजे आए तो महागठबंधन को बड़ी जीत मिली। राजद सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही बनाए गए। राजद को 18.35 फीसदी वोट शेयर के साथ कुल 80 सीटों पर जीत मिली। वहीं, उसकी साथी जदयू को 16.83 फिसदी वोट के साथ 71 सीटों पर जीत मिली। महागठबंधन की एक और साथी कांग्रेस को 27 सीटें मिलीं। इस तरह ये महागठबंधन 178 सीटें जीतने में सफल रहा। एनडीए की बात करें तो भाजपा को 53 सीटें 24.42 फीसदी वोट मिले। एनडीए में शामिल लोजपा को दो, रालोसपा को दो और हम को केवल एक सीट मिली। इस तरह एनडीए केवल 58 सीटों पर सिमट गया। 

इतने बड़े बहुमत के बाद भी नीतीश कुमार ने पांच साल में दो बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। 2015 में शपथ लेने के 20 महीने बाद ही लालू परिवार पर लग रहे भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण नीतीश कुमार ने  2017 में महागठबंधन का साथ छोड़कर एनडीए का दामन फिर से थाम लिया। इसके बाद नीतीश कुमार ने एनडीए के साथ सरकार बनाकर मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

2020: नीतीश जीते पर पाला बदल जारी रहा 

2020 के विधानसभा चुनाव में  कुल  7,06,01,372 मतदाताओं में से 58.7 प्रतिशत ने वोट डाला। नतीजों में राजद 75 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई। राजद को 23.11 फीसदी वोट मिले। वहीं, दूसरे नंबर पर भाजपा को 19.46 वोट प्रतिशत के साथ 74 सीटें मिलीं थी। जदयू को 43 सीटों के साथ 15.39 वोट शेयर पर संतोष करना पड़ा था। कांग्रेस को 19 सीटें और 9.48 वोट प्रतिशत वोट मिले।  

 महागबंधन में शामिल वाम दलों, कांग्रेस और राजद को मिलाकर 110 सीटें मिलीं। जो बहुमत से कम थीं। 125 सीटें जीतकर एनडीए की एक बार फिर सरकार बनाई। भाजपा से कम सीटें जीतने के बाद भी नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री बने।  

2022 के आते-आते भाजपा के कई नेताओं ने नीतीश के खिलाफ बयान दिया, इससे नीतीश कुमार को लगा कि भाजपा जदयू को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। आरसीपी सिंह जो जदयू के वरिष्ट नेता थे, उन्हें भाजपा ने केंद्र में मंत्री बना दिया। जदयू ने आरसीपी सिंह को पार्टी से बाहर कर दिया। जदयू को लगने लगा भाजपा पार्टी को तोड़ने की कोशिश कर रही है। इस सियासी उठापटक के बीच नीतीश ने एक बार फिर पाला बदला और 2022 में महगठबंधन के साथ आ गए। नीतीश ने इस्तीफा दिया और महागठबंधन सरकार के मुख्यमंत्री के तौर पर फिर से शपथ ली। हालांकि, ये साथ भी ज्यादा दिन नहीं चला और जनवरी 2024 में फिर नीतीश का मन बदला और उन्होंने एनडीए में वापसी कर ली। 

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