क्या है नागरिकता कानून जिसे बदलना चाहती है सरकार, करोड़ों लोगों पर क्या होगा इसका असर
- एनआरसी से पहले नागरिकता कानून में बदलाव करना चाहती है सरकार
- कानून बदला तो करोड़ों लोगों पर होगा इसका असर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सरकार देशभर में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC - National Register of Citizens) लागू करने से पहले नागरिकता संशोधन विधेयक (Citizenship Amendment Bill) पास करना चाहती है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक बार फिर वर्तमान नागरिकता कानून (Citizenship Act) में बदलाव की बात की है।
हाल में कोलकाता में लोगों को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस बारे में बात की। उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तंज कसते हुए कहा कि 'मैं सभी हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध और ईसाई शरणार्थियों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि उन्हें भारत छोड़ने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा। आप अफवाहों पर ध्यान न दें। ममता दीदी कह रही हैं कि पश्चिम बंगाल में एनआरसी लागू नहीं होगा। लेकिन हम हर घुसपैठिए को चुन कर बाहर करेंगे। जब ममता बनर्जी विपक्ष में थीं, तब वो भी यही चाहती थीं। अब वही घुसपैठिए उनके वोट बैंक बन गए हैं, तो वो उन्हें हटाना नहीं चाहतीं।'
अब सवाल है कि सरकार क्यों चाहती है कि एनआरसी से पहले नागरिकता संशोधन विधेयक पास हो जाए? यह विधेयक पास होने से वर्तमान कानून में क्या बदल जाएगा? इससे किसे फायदा मिलेगा और देश में रह रहे करोड़ों लोगों पर इसका क्या असर होगा? आगे हम इन सभी सवालों के जवाब बता रहे हैं।
नागरिकता संशोधन विधेयक में क्या है प्रस्ताव?
- पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च (PRS Legislative Research) के अनुसार, नागरिकता (संशोधन) विधेयक 2016 को 19 जुलाई 2016 को लोकसभा में पेश किया गया था।
- 12 अगस्त 2016 को इसे संयुक्त संसदीय समिति को सौंप दिया गया था। समिति ने इस साल जनवरी में इस पर अपनी रिपोर्ट दी है।
- अगर यह विधेयक पास हो जाता है, तो अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के सभी गैरकानूनी प्रवासी हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई भारतीय नागरिकता के योग्य हो जाएंगे।
- इसके अलावा इन तीन देशों के सभी छह धर्मों के लोगों को भारतीय नागरिकता पाने के नियम में भी छूट दी जाएगी। ऐसे सभी प्रवासी जो छह साल से भारत में रह रहे होंगे, उन्हें यहां की नागरिकता मिल सकेगी। पहले यह समय सीमा 11 साल थी।
विधेयक पर क्यों है विवाद?
इस विधेयक में गैरकानूनी प्रवासियों के लिए नागरिकता पाने का आधार उनके धर्म को बनाया गया है। इसी प्रस्ताव पर विवाद छिड़ा है। क्योंकि अगर ऐसा होता है तो यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन होगा, जिसमें समानता के अधिकार की बात कही गई है।
ये भी पढ़ें : क्या है SC-ST एक्ट? सुप्रीम कोर्ट के फैसला वापस लेने के बाद अब क्या हैं नियम
क्या है NRC?
- एनआरसी उन सभी लोगों की बात करता है जो गैरकानूनी तरीके से भारत में रह रहे हैं। इसमें किसी के धर्म को आधार नहीं बनाया गया है।
- अब तक सिर्फ असम में एनआरसी लागू किया गया है। यहां 24 मार्च 1971 को कटऑफ डेट बनाया गया। यानी जो लोग या जिनके पूर्वज इस तारीख से पहले से भारतीय नागरिक रहे हैं, सिर्फ उन्हें ही यहां का नागरिक माना जाएगा। वही नागरिकता पाने का दावा कर सकते हैं।
- यहां एनआरसी लागू होने के बाद करीब 3.11 करोड़ लोगों ने नागरिकता की जांच के लिए आवेदन किए। इनमें से 19 लाख लोगों को सूची से बाहर कर दिया गया, जिनमें से कई हिंदू भी हैं।
ये भी पढ़ें : क्या है 112, भारत में हर शख्स को क्यों याद रखना चाहिए ये नंबर
एनआरसी से पहले नागरिकता कानून बदला, तो क्या होगा असर?
देशभर में एनआरसी लागू होने से पहले अगर नागरिकता (संशोधन) विधेयक पास हो जाता है, तो पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के सभी गैरकानूनी प्रवासी हिंदू, जैन, ईसाई, पारसी, बौद्ध और सिखों पर कोई असर नहीं होगा। क्योंकि उन्हें पहले ही भारत की नागरिकता मिल जाएगी।
ये भी पढ़ें : हवा, जमीन, पानी... सैन्य ताकत में भारत से कितना पीछे है पाकिस्तान
कमेंट
कमेंट X