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कश्मीर मुद्दे पर चीन ने क्यों बदले बोल, अब जो कहा वो पाकिस्तान के पक्ष में नहीं

Wed, 09 Oct 2019 12:39 PM IST
रत्नप्रिया रत्नप्रिया वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: रत्नप्रिया रत्नप्रिया Updated Wed, 09 Oct 2019 12:39 PM IST
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सार
  • कश्मीर मुद्दे पर चीन ने बदला अपना बयान
  • 11 अक्तूबर को भारत दौरे पर होंगे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग
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What China said for India Pakistan on article 370 and Kashmir issue
पीएम मोदी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ (फाइल फोटो) - फोटो : Narendra Modi Twitter

विस्तार

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान चीन के दौरे पर हैं। इस बीच चीन की तरफ से कश्मीर पर जो बयान आया है, वो पाकिस्तान को खुशी देने वाला नहीं है।



चीन के विदेश मंत्रालय का कश्मीर पर बयान पहले के बिल्कुल उलट है। हाल ही में चीन ने कहा कि था कि कश्मीर समस्या का समाधान यूएन चार्टर और उसके प्रस्तावों के तहत होना चाहिए। लेकिन अब चीन ने कहा है कि कश्मीर पर भारत और पाकिस्तान द्विपक्षीय संवाद के जरिए समाधान की तलाश करें।


चीनी विदेश मंत्रालय से मंगलवार को पत्रकारों ने सवाल पूछा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान का चीन दौरा चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे के ठीक पहले हुआ है। क्या इन दोनों का आपस में कोई ताल्लुक है? पाकिस्तानी मीडिया का कहना है कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इस मुलाकात में कश्मीर का भी मुद्दा उठाएंगे। आप क्या कहते हैं?

चीनी विदेश मंत्रालय की नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने कहा, 'कश्मीर मुद्दे पर चीन के रुख में कोई परिवर्तन नहीं आया है। हमारा रुख बिल्कुल स्पष्ट है। हमारा भारत और पाकिस्तान से कहना है कि वो कश्मीर के साथ बाकी अन्य विवादों को द्विपक्षीय बातचीत के जरिए सुलझाए। इससे दोनों देशों के बीच आपसी भरोसा बढ़ेगा और उनके रिश्ते सुधरेंगे। इससे भारत और पाकिस्तान दोनों की ही समस्याएं हल होंगी।'

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अब तक क्या कह रहा था चीन

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 11 और 12 अक्तूबर को दो दिवसीय दौरे पर भारत आ रहे हैं। इससे पहले चीन ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 निष्प्रभावी करने पर कहा था कि भारत जम्मू-कश्मीर की यथास्थिति से कोई छेड़छाड़ नहीं करे। पाकिस्तान इस मामले को संयुक्त राष्ट्र के सुरक्षा परिषद में ले गया, तो वहां भी चीन का समर्थन मिला था।

इतना ही नहीं अभी कुछ दिनों पहले ही पाकिस्तान में चीन के राजदूत याओ जिंग ने कहा था कि कश्मीर विवाद पर चीन पाकिस्तान के साथ खड़ा रहेगा।

याओ जिंग ने ये भी कहा था कि 'हम कश्मीरियों को उनके मौलिक अधिकार और इंसाफ दिलाने की कोशिश कर रहे हैं।' लेकिन चीन अब कह रहा है कि भारत और पाकिस्तान कश्मीर का मुद्दा द्विपक्षीय बातचीत के जरिए सुलझाएं।

एक अन्य सवाल के जवाब में गेंग शुआंग ने पाकिस्तान को चीन का 'अहम रणनीतिक सहयोगी' बताया और कहा है कि दोनों देशों के नेताओं में करीबी बातचीत की परंपरा रही है।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ हमारा रणनीतिक और आपसी भरोसा मजबूत और व्यावहारिक है। वहीं भारत को भी गेंग शुआंग ने चीन का महत्वपूर्ण पड़ोसी बताया।

उन्होंने कहा, 'भारत और चीन दोनों विकासशील देश हैं। दोनों ही उभरते हुए बड़े बाजार हैं। पिछले साल वुहान में भारत और चीन के बीच शुरू हुई वार्ता से रिश्तों ने अच्छी लय पकड़ी है। दोनों देश विभिन्न क्षेत्रों में आपसी सहयोग के साथ आगे बढ़ रहे हैं और मतभेदों को संवेदनशीलता के साथ संभाल रहे हैं।'

कितना अहम है इमरान खान का चीन दौरा

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के दौरे के बारे में पूछे जाने पर गेंग शुआंग ने कहा, 'प्रधानमंत्री इमरान खान का दौरा चीन के लिए बहुत मायने रखता है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग, प्रधानमंत्री ली केचियांग और चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी के प्रमुख नेता ले जांग शू इमरान खान से बातचीत करेंगे। इस दौरान दोनों पक्षों में आपसी हितों के मुद्दों पर विस्तार से द्विपक्षीय बातचीत होगी।

गेंग शुआंग ने बताया, 'भारत और चीन के संबंधित विभाग दोनों पक्षों के सहयोग के लिए जरूरी समझौतों पर हस्ताक्षर भी करेंगे।'

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चीनी विदेश मंत्रालय से मिली जानकारी के मुताबिक इमरान खान इंटरनेशनल हॉर्टिकल्चर एग्जीबिशन के सपामन समारोह में भी हिस्सा लेंगे। इस बीच भारत में चीन के राजदूत सुन वेइडॉन्ग ने ट्वीट करके विजयदशमी की बधाई भी दी।

एक अन्य ट्वीट में वेइडॉन्ग ने पंचशील सिद्धांत का जिक्र करते हुए लिखा, 'अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता के माहौल में भारत और चीन को अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर आपसी सहयोग मजबूत करना चाहिए। ठीक उसी तरह जैसे हमने कभी एक साथ पंचशील समझौते पर हस्ताक्षर किया था। वही पंचशील सिद्धांत, जो अंतरराष्ट्रीय संबंधों की बुनियाद बन चुका है।'

कश्मीर पर चीन की ओर से भारत को सबसे ज्यादा असहज करने वाला बयान पाकिस्तान में चीन के राजदूत का ही रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार भारत ने इसे लेकर शनिवार को चीन के समक्ष कड़ी आपत्ति जताई थी।

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