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सुभारती विश्वविद्यालय के डिप-कॉन समारोह में पहुंचे वरुण गांधी
टीम डिजिटल /अमर उजाला, दिल्ली
Updated Wed, 18 May 2016 06:26 PM IST
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सुभारती विश्वविद्यालय में पहुंचे वरुण गांधी
- फोटो : subharti
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स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय में सोमवार को प्रथम डिप-कॉन समारोह आयोजित किया गया था। विश्वविद्यालय के मांगल्य प्रेक्षागृह में आयोजित सुभारती महोत्सव 2015-16 के दौरान डिप्लोमा के 1076 विद्यार्थियों को डिप्लोमा उपाधि प्रदान की गई। समारोह में 18 गोल्ड मेडल भी प्रदान किए गए। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर से सांसद वरुण गांधी मौजूद थे।
कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत दीप प्रज्वलन व मां सरस्वती की वंदना से की गई। इसके बाद मुख्य अतिथि वरुण गांधी, विश्वविद्यालय के संस्थापक डॉ. अतुल कृष्ण व डॉ मुक्ति भटनागर, सुभारती केकेबी चैरिटेबल ट्रस्ट की अध्यक्ष डॉ. शल्या राज, कुलपति डॉ. एन के आहूजा, प्रति कुलपति डॉ. वी के भटनागर तथा रजिस्ट्रार पी के गर्ग को विश्वविद्यालय के पर्यावरण बचाओ संकल्प के तहत पौधा भेंट कर स्वागत किया गया। दो चरणो में आयोजित इस समारोह के प्रथम चरण में विभिन्न सांस्कृतिक प्रतियागिताओ में विजयी छात्र-छात्राओं को विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एन के आहूजा ने प्रशस्ति पत्र एवं मेडल प्रदान किए।
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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरुण गांधी ने कहा कि चौथी सदी में भारत में शिक्षा व्यवस्था स्थापित हो गई थी और आज इसे 1700 साल हो गए हैं लेकिन आज हम विश्व के 100 प्रमुख विश्वविद्यालयों में कहीं नहीं आते। उन्होंने कहा कि सुभारती आकर और इसे देखकर उन्हें यह उम्मीद जागी है। उन्हें यहां आकर अहसास हुआ कि अतुल जी उत्तमता से कार्य कर रहे हैं। एक-एक चीज को बनाने में उनकी बहुत बड़ी सोच हैं और यही सोच देश को महान बनाती है। आज जो युवा उपाधि प्राप्त कर रहे हैं वही देश के निर्माण के लिए योगदान देंगे। भविष्य में इन्हीं लोगों की भूमिका देश में अहम होगी।
उन्होंने बताया कि आज समाज में निजी शिक्षण संस्थानों का प्रचलन बढ़ा है लेकिन शिक्षा उच्च कोटि की होनी चाहिए जो विद्यार्थियों को रोजगार प्रदान कर सके। देश में शिक्षा को सुधारने के लिए विशेष नीतियां बनाने की आवश्यकता है। अनेक ऐसे देश हैं जो शिक्षा के क्षेत्र में नए प्रयोग कर रहे हैं और देश हित में युवाओं को महत्व दे रहे हैं। शिक्षा के अलावा टेक्नोलॉजी में भी छात्रों की भागीदारी अनिवार्य है।
युवा नीति पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि आज सभी युवा को राजनीति में आने की सलाह देते हैं परंतु हकीकत यह है कि आज भी वही युवा राजनीति में आ रहे हैं जिसका संबंध पहले से ही राजनीति से रहा है। उन्होंने बताया कि आज वह भी इतनी कम उम्र में अगर यहां तक पहुंचे हैं तो इसी वजह से, वरना वह भी आम युवा होते। इस मंच पर कोई और बोल रहा होता और वह नीचे कहीं बैठ कर सुन रहे होते। उन्होंने कई देशों की शिक्षाप्रणाली और नीतियों का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत को अभी इस दिशा में बहुत काम करने की आवश्यकता है।
वहीं विश्वविद्यालय के कुलपित डॉ. एन के आहूजा ने कहा कि शिक्षा सिर्फ किताबों से नहीं मिलती बल्कि इसके अलावा भी छात्रों को कल्चर, कॉमनसेंस और कम्यूनिकेशन भी आना चाहिए। प्रत्येक विद्यार्थी को कामयाब होने के लिए तीन गुणों का होना अनिवार्य है। पहला अनुशासन जो उसे अनुशासित करता है और समय का महत्व बताता है। दूसरा जिम्मेदारी जो उसे किसी गलत कार्य को करने से रोकती है। तीसरा ईमानदारी, जो विद्यार्थियों के व्यक्तित्व को निखारती है। यह तीनों गुण आपको सफलताओं की चोटी तक पहुंचाते हैं।
विश्वविद्यालय के संस्थापक डॉ. अतुल कृष्ण ने कहा कि विश्वविद्यालय की स्थापना इसी उद्देश्य से की गई है कि यहां विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ संस्कृति व संस्कार भी मिल सके। उन्होंने छात्रों से अनुरोध किया कि जो भी यहां से शिक्षा ग्रहण कर जा रहे हैं वो इस शिक्षा का इस्तेमाल समाज व भारत के विकास में करें। डॉ. मुक्ति भटनागर ने मुख्य अतिथि सहित सभागार में उपस्थित सभी गणमान्य लोगों का धन्यवाद व्यक्त किया। सुभारती केकेबी चैरिटेबल ट्रस्ट की अध्यक्ष डॉ. शल्या राज ने डिप्लोमा प्राप्त करने वाले छात्रों को समाज व देश के हित में काम करने के तथा राष्ट्रीय चरित्र निर्माण की शपथ दिलाई।
समारोह का समापन आजाद हिंद गान गाकर किया गया। समारोह का आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. एस डी. खान ने किया था। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. जयंत शेखर ने किया। मंच का संचालन पत्रकारिता विभाग के उप प्राचार्य डॉ. नीरज कर्ण सिंह तथा इंजिनियरिंग विभाग की अर्चिता भटनागर ने किया। इस मौके पर डॉ. आलोक भटनागर, डॉ. रोहित रविंद्र, संजीव पुंडीर, सुनील भराला, मेरठ के महापौर हरिकांत आहलूवालिया, सुदीप अग्रवाल, सुनील अग्रवाल, विनोद भारतीय, सरदार अहमद आदि उपस्थित रहे। समारोह को सफल बनाने में विश्वविद्यालय के सभी विभागों के डीन, प्रिंसिपल, शिक्षकगण, कर्मचारियों व छात्र- छात्राओं का योगदान रहा।
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कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत दीप प्रज्वलन व मां सरस्वती की वंदना से की गई। इसके बाद मुख्य अतिथि वरुण गांधी, विश्वविद्यालय के संस्थापक डॉ. अतुल कृष्ण व डॉ मुक्ति भटनागर, सुभारती केकेबी चैरिटेबल ट्रस्ट की अध्यक्ष डॉ. शल्या राज, कुलपति डॉ. एन के आहूजा, प्रति कुलपति डॉ. वी के भटनागर तथा रजिस्ट्रार पी के गर्ग को विश्वविद्यालय के पर्यावरण बचाओ संकल्प के तहत पौधा भेंट कर स्वागत किया गया। दो चरणो में आयोजित इस समारोह के प्रथम चरण में विभिन्न सांस्कृतिक प्रतियागिताओ में विजयी छात्र-छात्राओं को विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एन के आहूजा ने प्रशस्ति पत्र एवं मेडल प्रदान किए।
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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरुण गांधी ने कहा कि चौथी सदी में भारत में शिक्षा व्यवस्था स्थापित हो गई थी और आज इसे 1700 साल हो गए हैं लेकिन आज हम विश्व के 100 प्रमुख विश्वविद्यालयों में कहीं नहीं आते। उन्होंने कहा कि सुभारती आकर और इसे देखकर उन्हें यह उम्मीद जागी है। उन्हें यहां आकर अहसास हुआ कि अतुल जी उत्तमता से कार्य कर रहे हैं। एक-एक चीज को बनाने में उनकी बहुत बड़ी सोच हैं और यही सोच देश को महान बनाती है। आज जो युवा उपाधि प्राप्त कर रहे हैं वही देश के निर्माण के लिए योगदान देंगे। भविष्य में इन्हीं लोगों की भूमिका देश में अहम होगी।
उन्होंने बताया कि आज समाज में निजी शिक्षण संस्थानों का प्रचलन बढ़ा है लेकिन शिक्षा उच्च कोटि की होनी चाहिए जो विद्यार्थियों को रोजगार प्रदान कर सके। देश में शिक्षा को सुधारने के लिए विशेष नीतियां बनाने की आवश्यकता है। अनेक ऐसे देश हैं जो शिक्षा के क्षेत्र में नए प्रयोग कर रहे हैं और देश हित में युवाओं को महत्व दे रहे हैं। शिक्षा के अलावा टेक्नोलॉजी में भी छात्रों की भागीदारी अनिवार्य है।
युवा नीति पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि आज सभी युवा को राजनीति में आने की सलाह देते हैं परंतु हकीकत यह है कि आज भी वही युवा राजनीति में आ रहे हैं जिसका संबंध पहले से ही राजनीति से रहा है। उन्होंने बताया कि आज वह भी इतनी कम उम्र में अगर यहां तक पहुंचे हैं तो इसी वजह से, वरना वह भी आम युवा होते। इस मंच पर कोई और बोल रहा होता और वह नीचे कहीं बैठ कर सुन रहे होते। उन्होंने कई देशों की शिक्षाप्रणाली और नीतियों का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत को अभी इस दिशा में बहुत काम करने की आवश्यकता है।
वहीं विश्वविद्यालय के कुलपित डॉ. एन के आहूजा ने कहा कि शिक्षा सिर्फ किताबों से नहीं मिलती बल्कि इसके अलावा भी छात्रों को कल्चर, कॉमनसेंस और कम्यूनिकेशन भी आना चाहिए। प्रत्येक विद्यार्थी को कामयाब होने के लिए तीन गुणों का होना अनिवार्य है। पहला अनुशासन जो उसे अनुशासित करता है और समय का महत्व बताता है। दूसरा जिम्मेदारी जो उसे किसी गलत कार्य को करने से रोकती है। तीसरा ईमानदारी, जो विद्यार्थियों के व्यक्तित्व को निखारती है। यह तीनों गुण आपको सफलताओं की चोटी तक पहुंचाते हैं।
विश्वविद्यालय के संस्थापक डॉ. अतुल कृष्ण ने कहा कि विश्वविद्यालय की स्थापना इसी उद्देश्य से की गई है कि यहां विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ संस्कृति व संस्कार भी मिल सके। उन्होंने छात्रों से अनुरोध किया कि जो भी यहां से शिक्षा ग्रहण कर जा रहे हैं वो इस शिक्षा का इस्तेमाल समाज व भारत के विकास में करें। डॉ. मुक्ति भटनागर ने मुख्य अतिथि सहित सभागार में उपस्थित सभी गणमान्य लोगों का धन्यवाद व्यक्त किया। सुभारती केकेबी चैरिटेबल ट्रस्ट की अध्यक्ष डॉ. शल्या राज ने डिप्लोमा प्राप्त करने वाले छात्रों को समाज व देश के हित में काम करने के तथा राष्ट्रीय चरित्र निर्माण की शपथ दिलाई।
समारोह का समापन आजाद हिंद गान गाकर किया गया। समारोह का आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. एस डी. खान ने किया था। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. जयंत शेखर ने किया। मंच का संचालन पत्रकारिता विभाग के उप प्राचार्य डॉ. नीरज कर्ण सिंह तथा इंजिनियरिंग विभाग की अर्चिता भटनागर ने किया। इस मौके पर डॉ. आलोक भटनागर, डॉ. रोहित रविंद्र, संजीव पुंडीर, सुनील भराला, मेरठ के महापौर हरिकांत आहलूवालिया, सुदीप अग्रवाल, सुनील अग्रवाल, विनोद भारतीय, सरदार अहमद आदि उपस्थित रहे। समारोह को सफल बनाने में विश्वविद्यालय के सभी विभागों के डीन, प्रिंसिपल, शिक्षकगण, कर्मचारियों व छात्र- छात्राओं का योगदान रहा।
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