PCS-J मुख्य परीक्षा के कटऑफ अंक जारी, यहां क्लिक कर देखें
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उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) ने सोमवार को पीसीएस-जे मुख्य परीक्षा और अंतिम परिणाम के कटऑफ अंक जारी कर दिए। अनारक्षित श्रेणी में अंतिम रूप से चयनित अभ्यर्थी को अधिकतम 691 अंक मिल हैं और न्यूनतम 569 अंक तक अभ्यर्थियों को पीसीएस-जे में सफल घोषित किया गया है।
आयोग की ओर से जारी श्रेणीवार कटऑफ अंक आयोग की वेबसाइट पर 27 नवंबर तक उपलब्ध रहेंगे।
पीसीएस-जे परीक्षा 2016 का अंतिम परिणाम 13 अक्तूबर को घोषित किया गया था, जिसमें लखनऊ की स्वरांगी शुक्ला ने टॉप किया था। यूपीपीएससी के सचिव जगदीश के मुताबिक अभ्यर्थी अपने अनुक्रमांक एवं जन्म तिथि के आधार पर प्राप्तांक एवं कटऑफ अंक देख सकते हैं। परीक्षा परिणाम के संबंध में सूचना के अधिकार के तहत प्रार्थना पत्र स्वीकार नहीं किए जाएंगे और न ही उस पर विचार किया जाएगा।
आयोग की ओर से श्रेणीवार जारी अंतिम परिणाम के कटऑफ के तहत अनारक्षित श्रेणी में अंतिम रूप से सफल घोषित अभ्यर्थी को अधिकतम 691 एवं न्यूनतम 569 अंक, अनुसूचित जाति वर्ग में अधिकतम 567 एवं न्यूनतम 488 अंक, अनुसूचित जनजाति श्रेणी में अधिकतम 461 एवं न्यूनतम 432 अंक, अन्य पिछड़ा वर्ग में अधिकतम 567 एवं न्यूनतम 529 अंक, डीएफएफ श्रेणी में अधिकतम 611 एवं न्यूनतम 563 अंक और महिला वर्ग में अधिकतम 691 एवं न्यूनतम 569 अंक मिले।
वहीं, पीसीएस-जे की मुख्य परीक्षा में अनारक्षित श्रेणी में इंटरव्यू के लिए चयनित अभ्यर्थी को अधिकतम 616 एवं न्यूनतम 461 अंक, अनुसूचित जाति वर्ग में अधिकतम 515 एवं न्यूनतम 387 अंक, अनुसूचित जनजाति श्रेणी में अधिकतम 413 एवं न्यूनतम 335 अंक, अन्य पिछड़ा वर्ग में अधिकतम 543 एवं न्यूनतम 430 अंक, डीएफएफ श्रेणी में अधिकतम 540 एवं न्यूनतम 430 अंक और महिला वर्ग में अधिकतम 616 एवं न्यूनतम 472 अंक मिले थे।
पीसीएस के कई दूसरे सवालों पर भी आपत्तियां
पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा-2017 के छह सवालों को उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) ने स्वयं गलत मानते हुए हटा दिया है। इसके बावजूद अभ्यर्थियों ने कई दूसरे प्रश्नों पर भी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। प्रतियोगी छात्रों ने एनसीईआरटी, सरकारी वेबसाइटों और विशेषज्ञों की किताबों को आधार बनाकर आपत्ति दर्ज कराई है। अभ्यर्थियों की मांग है कि गलत सवाल हटाए जाएं।
पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा में सवाल पूछा गया था कि अकबर के शासनकाल में दक्कन में निम्न पद्धतियों में कौन सा भू-राजस्व वसूली का प्रचलित आधार था। जिनमें चार विकल्प कनकुट, हल की संख्या, जब्त और गल्लाबक्शी दिए गए हैं। प्रतियोगियों के मुताबिक आयोग का उत्तर है, ‘हल की संख्या’, जबकि अलग-अलग किताबों में अलग-अलग जवाब दिए गए हैं। इसी तरह एक सवाल था कि किसने ईस्ट इंडिया कंपनी के बारे में यह टिप्पणी की थी कि कंपनी एक असंगठित है परंतु यह उस व्यवस्था का भाग है जहां सबकुछ ही असंगत है? इसके सवाल के चार विकल्प दिए गए हैं, जिनमें वारेन हेस्टिंग, जीबी मैकाले, लार्ड क्लाइव एवं हेनरी डुंडास के नाम शामिल हैं। आयोग ने जीबी मैकाले को सही उत्तर माना है।
प्रतियोगियों का कहना है कि सही नाम ‘जीबी मैकाले’ नहीं, बल्कि ‘टीबी मैकाले है।’ इस तरह एक सवाल पूछा गया था कि निम्नलिखित लोहा और इस्पात कारखानों में से कौन सा कच्चे माल क्षेत्र के समीप नहीं है? आयोग ने दुर्गापुर को सही उत्तर माना है जबकि प्रतियोगियों का दावा है कि एनसीईआरटी की किताब और सरकारी वेबसाइट के आधार पर सही उत्तर सेलम है। इसी प्रकार कुछ अन्य प्रश्नों पर भी आपत्तियां की गई हैं और सरकारी वेबसाइटों, विशेषज्ञों की किताबों को इसका आधार बनाया गया है।
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