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Beyond The Bookish: किताबी ज्ञान से इतर भी दुनिया है, कौशल सीख कर लोगों से बनाएं नेटवर्क
Fri, 25 Oct 2024 08:15 AM IST
मेघा झा
अशोक कुमार सिंह, कॅरिअर सलाहकार
अशोक कुमार सिंह, कॅरिअर सलाहकार
Published by: मेघा झा
Updated Fri, 25 Oct 2024 08:15 AM IST
सार
Beyond The Bookish: किताबी कीड़ा बनने के बजाय ऐसी शिक्षा पर जोर दें। जिससे कौशल तो सीखें ही, देश-दुनिया के लोगों से नेटवर्किंग भी बना सकें।
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सांकेतिक
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
Beyond The Bookish: किताबी शिक्षा तो सभी लेते हैं, लेकिन बदलते वैश्विक परिदृश्य में, विद्यार्थियों को किताबी कीड़ा बनने की बजाय परंपरागत शिक्षा से इतर अलग-अलग क्षेत्रों और संस्कृतियों का ज्ञान अर्जित करने के बारे में भी सोचना चाहिए। शिक्षा प्रणाली का कार्य ज्ञान के आलावा संस्कृति का संचार करना भी है। ऐसे में बहुसांस्कृतिक शिक्षा बेहद जरूरी हो जाती है। यह पाठ्यपुस्तकों से परे ऐसी शिक्षा है, जो आप अपने आसपास, सहपाठियों से और संस्थान में सीखते हैं। यह विविधता को अपनाने और सीखने के बारे में भी है। बहुसांस्कृतिक शिक्षा से आपको न सिर्फ ज्ञान बढ़ाने का मौका मिलता है, बल्कि आप आलोचनात्मक विचार कौशल और नई दुनिया से खुद को जोड़ने की क्षमता भी विकसित कर सकते हैं। कुछ ऐसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थान हैं, जो ऑनलाइन कोर्सेज, इंटर्नशिप और फेलोशिप आदि के माध्यम से बहुसांस्कृतिक शिक्षा की पेशकश करते हैं।
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तौर-तरीके और संस्कृति
वर्तमान में इग्नू, दिल्ली विश्वविद्यालय, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, एएमयू, जेएनयू जैसे कई ऐसे संस्थान हैं, जहां अन्य देशों के छात्र-छात्राएं भी दाखिला लेते हैं। ऐसे विद्यार्थी आपके साथ एक ही कक्षा में बैठकर पढ़ाई भी करते हैं। हो सकता है आप किसी हिचकिचाहट के कारण उनसे बात करने में संकोच करते हों। बजाय इसके आपको डिबेट, प्रोजेक्ट, सेमिनार और प्रॉब्लम सॉल्विंग तकनीकों आदि के माध्यम से उनके तौर-तरीकों और संस्कृति को समझने का प्रयास करना चाहिए।
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