डीम्ड विश्वविद्यालय भी अब भ्रष्टाचार निरोधक कानून के दायरे में : सुप्रीम कोर्ट
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को गुजरात हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए कहा है कि डीम्ड विश्वविद्यालय भी भ्रष्टाचार निरोधक कानून (एसीबी) के दायरे में आते हैं। कोर्ट ने कहा कि डीम्ड विश्वविद्यालय अधिनियम के तहत परिभाषित ‘पब्लिक अथॉरिटी’ की श्रेणी में है। दरअसल, गुजरात हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि डीम्ड विश्वविद्यालय के ट्रस्टी के खिलाफ एसीबी के तहत अभियोग नहीं चलाया जा सकता।
जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस एम संतानागौदार और जस्टिस अजय रस्तोगी की पीठ सुमनदीप विश्वविद्यालय से जुड़े मामले में सुनवाई कर रही थी। विश्वविद्यालय के ट्रस्टी पर एक छात्र को एमबीबीएस परीक्षा में बैठने की अनुमति के लिए 25 लाख रुपये रिश्वत लेने का आरोप था।
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए कहा, यह मानना गलत है कि डीम्ड विश्वविद्यालय एसीबी के दायरे में नहीं आता। जो काम विश्वविद्यालय करते हैं कमोवेश वही काम डीम्ड विश्वविद्यालयों का भी है। भ्रष्टाचार निरोधक कानून का उद्देश्य न केवल रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार जैसी बुराइयों की रोकथाम है बल्कि कानून के दायरे में उन लोगों को शामिल करना है जो पारंपरिक रूप से ‘सरकारी नौकर’ नहीं माने जाते हैं।
हाईकोर्ट ने दे दी थी राहत
2017 में ट्रस्टी के खिलाफ एसीबी और आईपीसी की धाराओं में आरोपपत्र दाखिल हुआ था। ट्रस्टी ने ट्रायल कोर्ट में आरोपमुक्ति की याचिका दी थी जिसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद ट्रस्टी ने गुजरात हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने उसे राहत देते हुए कहा कि डीम्ड विश्वविद्यालय ‘पब्लिक अथॉरिटी’ के दायरे में नहीं आता इस लिए ट्रस्टी पर एसीबी के तहत कार्रवाई नहीं हो सकती।
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