नाश्ते की दुकान से शुरुआत, आज होती है 80 करोड़ किलो मक्खन की खपत

amarujala.com: शिवेंदु शेखर Updated Mon, 20 Mar 2017 02:27 PM IST
success story of vishan ji agrawal who started haldirams
हल्दीराम

'मैंने तिनके के सहारे पहाड़ बनाने की हिम्मत दिखाई, आज मैं तिनकों से बनी पर्वत श्रृंखला हो गया हूं'  

ये लाइन हल्दीराम के ब्रांड चेन के लिए यूंहीं जबान से निकल गई। आपको बता दें कि हल्दीराम आज दुनिया के 50 से भी ज्यादा देशों में अपनी पहुंच रखता है। वो आज के समय में हिंदुस्तान के गली-गली मोहल्ले-मोहल्ले पर राज करता है। हमारे घरों के त्योहार इस हल्दीराम के बिना पूरे नहीं होते। हल्दीराम के बिना मानो ऐसा लगता हो जैसे कुछ अधूरा सा पीछे छूट गया हो। 

हल्दीराम की शुरुआत वास्तव में 'हल्दीराम' के रूप में नहीं बल्कि बीकानेर की एक दुकान 'भुजियावाले' के नाम से शुरू हुई थी। साल 1937 की बात है, अभी आजादी को भी 10 साल बाकी थे। बीकानेर के गंगाविषण जी अग्रवाल ने एक छोटे से नाश्ते की दुकान खोली थी।

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पिता भुजिया के काम में हाथ आजमाना चाह रहे थे

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