इलाज के अभाव में बहन की हुई थी मौत, टैक्सी चलाकर बनवा दिया अस्पताल

सैदुल लश्कर Updated Tue, 27 Feb 2018 02:12 PM IST
saidul laskar
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मेरी बहन आज जिंदा होती, तो वह तीस साल की हो चुकी होती। तेरह साल पहले सीने के संक्रमण की वजह से उसकी मौत हो गई थी। उसकी मौत के पीछे बीमारी के अलावा एक दूसरी बड़ी वजह भी थी। दरअसल मेरे घरवालों की हैसियत नहीं थी कि वे मेरी बहन का महंगा इलाज करा पाते। और कोलकाता शहर की परिधि के बाहर मेरे गांव में कोई ढंग का अस्पताल नहीं था।
आज की तरह उस वक्त भी मैं कोलकाता की सड़कों पर टैक्सी चलाता था। बहन की मौत ने मुझे यह एहसास दिला दिया कि मैं कितना लाचार और गरीब हूं। इतना गरीब कि मेरी बहन इलाज के अभाव में दुनिया छोड़ गई। लेकिन उस घटना का एक सकारात्मक पहलू यह रहा कि बहन की मौत, मेरे दिमाग में गांव में एक अस्पताल खोलने के साहस का बीज बो गई। एक टैक्सी चालक के दिमाग में अपने दम पर अस्पताल खोलने का विचार आ जाए, यह किसी विशेष प्रेरणा से ही संभव था।

मगर मेरी सोच यथार्थ में बदल जाए, यह काम इतना आसान नहीं था। अस्पताल खोलने के लिए सबसे पहली जरूरत थी-जमीन की। कम से कम दो बीघा जमीन, जिसके लिए तीन लाख रुपये चाहिए थे। बचत के नाम पर घर में कुछ दिनों का राशन ही था। जमीन खरीदने के लिए मेरी बीवी ने अपने सारे जेवर बेचने का प्रस्ताव रखा। मुझे ऐसा करना सही नहीं लगा, लेकिन बीवी के समझाने के बाद मैंने उसकी बात मानकर उसके जेवर बेच दिए।
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