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शारीरिक रूप से अक्षम इस महिला के जज्बे को कीजिए सलाम

Wed, 13 Jul 2016 08:18 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 13 Jul 2016 08:18 AM IST
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Salute this India’s fastest and best women athlete

अक्सर लोग अपनी शारीरिक अक्षमता का रोना रोते हैं। यहां तक की जो लोग स्वस्थ हैं वो भी अपनी असफलता का दोष किस्मत को ही देते हैं। ऐसे लोगों को मलाथी से सबक लेनी चाहिए। पूरा शरीर लकवाग्रस्त होने के बावजूद भी इन्होंने अपनी किस्मत को कभी दोष नहीं दिया और न ही कभी हार मानी। अपने मेहनत के दम पर इन्होंने अपनी सफलता की कहानी गढ़ी है। आज ये भारत की जानी-मानी एथलीट हैं।

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मलाथी कृष्णमूर्ति होल्ला भारत की इंटरनेशनल पैरा एथलीट हैं। इनकी उपलब्धियों की वजह से उन्हें अर्जुन और पद्मश्री सम्मान भी मिल चुका है। उनका जन्म 6 जुलाई 1958 को बंगलौर में हुआ। उनके पिता एक छोटा सा होटल चलाते थे और उनकी मां घर पर रहकर अपने 4 बच्चों की देखभाल करती थीं। 
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जब वो 1 साल की थीं तो उन्हें तेज बुखार हुआ। जब तक उनके परिवार वाले कुछ समझ पाते, उनके पूरे शरीर को लकवा मार गया। लगातार 2 साल तक बिजली के झटके देकर उनका इलाज करने पर उनके ऊपरी हिस्से में तो इसका प्रभाव पड़ा, लेकिन कमर से नीचे का हिस्सा लकवाग्रस्त ही रह गया। 
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मगर मजबूत इरादों वाली मलाथी ने हार नहीं मानी और खेलों को ही अपने दर्द की दवा बना लिया। आज वो भारत की प्रेरणादायक खिलाड़ियों में से एक हैं। 

अपने 6000 बैंक कस्टमर्स का अकाउंट नंबर भी याद रख सकती हैं

Salute this India’s fastest and best women athlete

अब तक उन्हें करीब 300 मेडल मिल चुके हैं जिसमें अर्जुन और पद्मश्री अवार्ड भी शामिल है। उन्होंने 'साउथ कोरिया, बार्सिलोना, एथेंस और बीजिंग में हुए पैराओलंपिक', 'बीजिंग, बैंकॉक, साउथ कोरिया, कुआला लंपर में हुए एशियन गेम्स' और 'डेनमार्क और ऑस्ट्रेलिया में हुए वर्ल्ड मास्टर्स', 'ओपेन चैंपियनशिप' और 'कॉमनवेल्थ गेम्स' में भारत का प्रतिनिधित्व भी किया। 

मलाथी सिंडिकेट बैंक में मैनेजर के तौर पर काम करती हैं। अपनी परेशानियों से जूझती फिर भी इरादों से मजबूत ये महिला अपने दोस्तों की मदद से 'माथरु फाउंडेशन' भी चलाती है जो अभी 16 शारीरिक रुप से अक्षम बच्चों को आश्रय देता है। 

ये भी इनकी एक उपलब्धि ही कही जाएगी कि इनकी याद्दाश्त भी बहुत अच्छी है ये अपने 6000 बैंक कस्टमर्स का अकाउंट नंबर याद रख सकती हैं।

8 जुलाई 2009 को इन्होंने अपनी पहली जीवनी 'अ डिफरेंट स्पीरिट' लोगों के सामने प्रस्तुत की। जिसमें उन्होंने अपने जीवन के सारे पहलुओं को लोगों के सामने खोलकर रखा है।

आपको ये कहानी कैसी लगी? आप अपने विचार कमेंटबॉक्स में देकर हम तक पहुंचा सकते हैं। आप चाहें तो मजबूत इरादों वाली इस महिला की कहानी को सोशल मीडिया पर शेयर भी कर सकते हैं जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग इनकी सक्सेस स्टोरी से प्रेरित हो सकें। 

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