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बोल और सुन न सकने वाले थॉमस ने कबाड़ से बना दिया सबसे सस्ता जेट

Mon, 09 Nov 2015 05:32 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Mon, 09 Nov 2015 05:32 PM IST
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Saji Thomas, A Deaf-Mute, Built An Aircraft With Just Rs 14 lakh

वो बोल नहीं पाता था लेकिन हजारों जबानों से वाहवाही लूटी। वो सुन नहीं पाता था लेकिन उसके अविष्कार की झनकार से आकाश गूंज गया। गूंगा और बहरा उसके लिए महज संज्ञाएं साबित हुईं, उसने अपंगता के बावजूद आसमान का सीना छूने का निश्चय किया। और जब, उसने खुद के बनाए उस दुर्लभ और बेहद किफायती जेट से फर्राटा भरा, तो दुनिया ने उसको सलाम किया।

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जिंदगी के 45 बसंत पार कर चुके केरल के साजी थॉमस पर भारत इतरा सकता हैं तो दुनिया फक्र कर सकती है। केरल के इडुक्की के थोडुपुजा के थॉमस को गांव वालों ने उसकी बोलने और सुनने की अपंगता को लेकर यूजलैस यानी नकारा करार दिया था। लेकिन आलोचनाओं का जवाब उसने कुछ इस अंदाज में दिया कि आज वही गांव वाले उसकी तारीफ में कसीद पढ़ते नहीं थकते हैं।

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मुफलिसी में नहीं कर सका पढ़ाई, फिर भी बड़े-बड़े इंजीनियर फेल

Saji Thomas, A Deaf-Mute, Built An Aircraft With Just Rs 14 lakh

साजी थॉमस के लिए धरती और आसमान में फर्क कभी नहीं रहा। टॉपयैप्स.कॉम की खबर के मुताबिक थॉमस पर मुफलिसी हावी हुई, तो सातवीं में स्कूल छूट गया। थॉमस तय कर लिया कि परिस्थियों और शारिरिक अक्षमताओं को कमजोरी नहीं बनने देगा। उसने पुराने स्कूटर-बाइक्स और इलैक्ट्रोनिक सामानों का कबाड़ इकट्ठा करना शुरू किया।

सामने परिवार की जिम्मेदारी थी तो रबड़ के पौधे रोपने के काम में मजूरी करने लगा। दिमाग तेज था ही तो टीवी ठीक करने का काम सीख लिया। और फिर शादियों में वीडियोग्राफर बन गया।

अपना और परिवार का खर्च निकालकर उसके पास जो भी बचता उसे वो अपने लक्ष्य के लिए समर्पित कर देता था।

और फिर उसने लड़की के तख्तों से जेट के विंग्स बनाए, स्कूटर के शॉकर और बाइक का इंजन इस्तेमाल कर आसमान में फर्राटा भरने वाला जेट बना लिया। इस काम में इंजन की आवाज सुनने की मदद पत्नी मारिया ने की।

विंग कमांडर ने भी थॉमस का लोहा माना

Saji Thomas, A Deaf-Mute, Built An Aircraft With Just Rs 14 lakh

बेहद किफायती जेट बनकर तैयार तो हो गया था, अब बारी थी उड़ान भरने की। जेट में लगे यामाहा इंजन ने सपोर्ट नहीं किया और थॉमस का ये पहला किफायती जेट उड़ान नहीं भर सका। इस नाकामयाबी को थॉमस ने अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया और एक बार फिर अपने काम को अंजाम देने के लिए जी-जीन से लग गया।

उसी दौरान साल 2008 में थॉमस तिरुवनंतपुरम के विंग कमांडर एसकेजी नैयर से मिला। नैयर थॉमस के मेंटर बन गए। उन्होंने अपने स्कूल में थॉमस को एयरक्राफ्ट उड़ाने की मंजूरी दे दी।

और वो दिन भी आ गया जब नैयर की देखरेख में थॉमस ने उस सफलता का स्वाद चख लिया, जिसका ख्वाब बचपन से उसके सीने में दफन था।

थॉमस ने कबाड़ से ही बाजार में मिलने वाले किफायती जेट के मुकाबले बेहतर जेट बना दिया।

विंग कमांडर नैयर ने भी थॉमस की प्रतिभा का लोहा माना और उसकी तारीफ में कहा कि शारिरिक तौर पर अक्षम एक व्यक्ति के तौर पर ये एक करिश्माई उपलब्धी है। मैं इससे पहले कई बार एक्स एयर क्राफ्ट से उड़ चुका हूं। लेकिन मुझे लगता है कि थॉमस का एयरक्राफ्ट बाजर में उपलब्ध एक्स एयरक्राफ्ट से बेहतर है आप उसे बस एक डिजाइन दिखा दो वो कैसा भी एयरक्राफ्ट बना देगा।

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क्या हैं कबाड़ के जेट की खूबियां?

Saji Thomas, A Deaf-Mute, Built An Aircraft With Just Rs 14 lakh

ये जेट बाजार के 25 लाख के जेट के मुकाबले मात्र 14 लाख रुपए का है। यानी तकरीबन आधी कीमत का। इस उपलब्धी को जल्द ही डिसकवरी चैनल पर दिखाया जाने वाला है। डिस्कवरी के एचआरएक्स सुपरहीरोज प्रोग्राम में थॉमस को भी बुलाया गया है।

वहीं इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में थॉमस पहले ही अपना नाम दर्ज करा चुके हैं। थॉमस को अब एक लाइसेंस की जरूरत है, जिसके लिए उसने डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविलियन एवियेशन से गुहार की है।

थॉमस एयरोनॉटिक्स मैकेनिक के तौर पर जॉब भी चाहते हैं। इन्हें पूरा यकीन है कि कोई जानी-मानी कंपनी जॉब जरूर देगी।

पत्नी मारिया ने बताया कि थॉमस को को किताबें पढ़ना पसंद है। थॉमस इंटरनेट के एक्टिव यूजर हैं। इलैक्ट्रोनिक्स और एयरोनॉटिक्ट में थॉमस को काफी समझ है।

सरकारी अनदेखी झेलने को मजबूर थॉमस

Saji Thomas, A Deaf-Mute, Built An Aircraft With Just Rs 14 lakh

थॉमस का परिवार सरकारी रवैये से नाखुश है। पत्नी मारिया ने बताया कि मुख्यमंत्री ओमन चांदी से मदद की गुहार लगाने पर भी नतीजा सिफर है। सिवाय आश्वसनों के कुछ भी नजर नही आ रहा है।

थॉमस की चाहत है कि वो एक दो इंजन वाला ऐसा एयरक्राफ्ट बनाएं जिसे उड़ने के लिए रनवे की जरूरत न पड़े।

थॉमस की इस उपलब्धी से हिंदुस्तान के लाखों युवा प्रेरणा ले सकते हैं। अमर उजाला की टीम भी थॉमस को उनकी उपलब्धी के लिए बधाई देती है और दुआ करती है कि उन्हें उनकी मंजिल जरूर मिले साथ ही सरकार से अनुरोध करती है कि थॉमस जैसी शख्सियतों की मदद के लिए जरूर आगे आए।

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