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धार्मिक एकता बढ़ाने के लिए मंदिर के पुजारी कर रहे हैं फेसबुक का इस्तेमाल

Mon, 13 Jun 2016 06:03 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला,दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला,दिल्ली Updated Mon, 13 Jun 2016 06:03 AM IST
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priest making effort to spread communal harmony
मंदिर के पुजारी सी.आर नटराजा शास्त्री - फोटो : facebook

समाज में आपसी भाईचारे बढ़ाने के लिए 63 वर्षीय मंदिर के पुजारी सी.आर नटराजा शास्त्री सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहे हैं। समाज में धार्मिक भेदभाव को खत्म करने, लोगों में जागरुकता बढ़ाने और सांप्रदायिक एकता के लिए कांचीपुरम के कमाकक्षी मंदिर के पुजारी ने सोशल मीडिया की सही ताकत को पहचाना है।

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शास्त्री ने 2011 में फेसबुक पर अपने इस नेक मकसद की शुरुआत की थी। आज उनके फेसबुक पर 5,000 हजार से ज्यादा फ्रेंड्स और 1,800 से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। पुजारी जी ने बताया,'जब मैं सामाजिक विषयों पर लोगों के विचारों को सुनता तो मुझे लगता कि कुछ करना चाहिए, और इसके लिए मैं एक प्लेटफार्म का इस्तेमाल करना चाहता था।' 
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मंदिर के पुजारी सी.आर नटराजा शास्त्री  ने अपनी इस पहल को 'फेसबुक संगमम' नाम दिया है। सांप्रदायिक एकता को कायम रखने के लिए उनके साथ विभन्न धर्मों के  लोग भी जुड़ें हैं। वह इस पर अध्यात्म और जॉब फेयर जैसे विभन्न प्रकार के इवेंट और ऐक्टिविटीज भी करते हैं।

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लोग मंदिर, मस्जिद और चर्च की बिल्डिंग में नहीं जाते

priest making effort to spread communal harmony
अनेकता में एकता का संदेश

अनेकता में एकता के संदेश के लिए शास्त्री की पहली मीटिंग 'फेसबुक संगमम' में करीब कांचीपुरम से 300 लोगों ने हिस्सा लिया। लोगों का सकारात्मक रुख देखकर उन्होंने अगले महीने एक और 'फेसबुक संगमम' रखने का निर्णय लिया है।

मंदिर के पुजारी नटराजा शास्त्री ने विभिन्न धर्मों के लोगों के बीच में स्वतंत्र होकर विचारों के आदान-प्रदान करने पर जोर दिया है। पुजारी कहते हैं कि हमारे यहां हिंदू और मुसलमान दोनों आते हैं। दोनों को एकता बनाए रखनी चाहिए क्योंकि प्रार्थना के तरीके अलग हो सकते हैं लेकिन दोनों की ईश्वर की मंजिल एक ही है।

शास्त्री जी ने मीडिया से बातचीत में कहा 'लोग मंदिर, मस्जिद और चर्च की बिल्डिंग में नहीं जाते बल्कि वे यहां इसलिए जाते है ताकि शांति हासिल कर सकें।हिंदू ,मुस्लिम, क्रिश्चियन और बाकी सब लोगों को भी आपस में भाई बहन की तरह रहना चाहिए। हम सबको धार्मिक ग्रंथों से सकारात्मक चीजें सीखना चाहिए।'
 

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