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दिव्यांग बैंक अफसर ने 64 की उम्र में पास की नीट, डॉक्टर बनने के सपने को किया साकार

Sun, 27 Dec 2020 04:21 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, भुवनेश्वर
एजेंसी, भुवनेश्वर Published by: देव कश्यप Updated Sun, 27 Dec 2020 04:21 AM IST
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Physically challenged Retired Odisha banker passes NEET Exam now a first-year MBBS studentat 64 age
नीट - फोटो : Self

मन में कुछ करने का दृढ़ संकल्प हो तो उम्र कोई मायने नहीं रखती। ओडिशा के बरगढ़ निवासी 64 वर्षीय जयकिशोर प्रधान ने इस बात को सच साबित कर दिखाया। एसबीआई में अफसर रहे जयकिशोर बचपन का सपना पूरा करने के लिए मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं। सेवानिवृत्ति के चार साल बाद वह नीट परीक्षा में बैठे और पास कर एमबीबीएस कोर्स में दाखिला लिया है।

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इस सपने को पूरा करने का सफर आसान नहीं था। दरअसल, नीट परीक्षा में बैठने के लिए अधिकतम उम्र सीमा 25 वर्ष होती है। जयकिशोर ने 2018 में सुप्रीम कोर्ट में इस संबंध में याचिका दायर की। कोर्ट के फैसले पर उन्हें इस साल सितंबर में हुई परीक्षा में बैठने का मौका मिला। उन्होंने न केवल अच्छी रैंक हासिल की, बल्कि प्रतिष्ठित वीर सुरेंद्र साई इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च (वीआईएमएसएआर) में दिव्यांग आरक्षण कोटे से एमबीबीएस में दाखिला लिया। अगर वह अपनी पढ़ाई पूरी करते हैं तो उन्हें 70 साल की उम्र में एमबीबीएस की डिग्री मिलेगी। उन्होंने 12वीं के बाद भी मेडिकल प्रवेश परीक्षा दी थी लेकिन असफल रहे थे।
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पारिवारिक जिम्मेदारी बनी रोड़ा
जयकिशोर ने बताया, नौकरी शुरू करने के बाद भी वह एमबीबीएस प्रवेश परीक्षा में बैठना चाहते थे, लेकिन परिवार की जिम्मेदारियों ने नौकरी छोड़ने की इजाजत नहीं दी। उन्होंने 1974 में मेडिकल प्रवेश परीक्षा दी थी लेकिन नाकाम रहे थे। 10 साल पहले एक हादसे में दिव्यांग हुए जयकिशोर की जुड़वा बेटियां जय प्रावा और ज्योति प्रावा मध्यप्रदेश के निजी कॉलेज से बीडीएस की पढ़ाई कर रही थीं। उनकी बेटी जय का इसी साल 20 नवंबर को निधन हो गया। उनका इकलौता बेटा जॉयजीत 10वीं में है।
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बेटियों की किताबें पढ़ की तैयारी
जयकिशोर ने बताया, जब मेरी बेटियां मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रही थीं तो मैंने उनकी किताबें पढ़ीं। प्रवेश परीक्षा में सुप्रीम कोर्ट द्वारा उम्र संबंधी सीमा हटाने के बाद मैं ज्यादा गंभीर हुआ और इस साल परीक्षा में शामिल हुआ। बेटी की मौत ने उन्हें नीट के लिए बैठने और एमबीबीएस कोर्स पूरा कर डॉक्टर बनने को प्रेरित किया। उन्होंने कहा, उनकी इच्छा जीवित रहने तक लोगों की सेवा करने की है।









शिक्षक की नौकरी छोड़ बैंक से जुड़े
1977 में बीएससी की डिग्री हासिल करने वाले जयकिशोर ने अट्टाबिरा एमई स्कूल में बतौर शिक्षक नौकरी की। इसके बाद बैंक प्रवेश परीक्षा दी और इंडियन बैंक में नौकरी करने लगे। वह 1983 में एसबीआई में शामिल हुए और सेवानिवृत्त होने तक यहीं रहे।

देश के मेडिकल शिक्षा इतिहास में दुर्लभ मामला
वीआईएमएसएआर निदेशक ललित मेहर ने बताया, यह देश में मेडिकल शिक्षा के इतिहास में दुर्लभ मामलों में से एक है। इतनी उम्र में मेडिकल छात्र के तौर दाखिला लेकर जयकिशोर ने उदाहरण पेश किया है। वीआईएमएसएआर के डीन ब्रजन मोहन मिश्रा ने कहा कि मैंने कभी किसी के 64 साल की उम्र में मेडिकल डिग्री में दाखिला लेने के बारे में नहीं सुना।

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