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यूपीएससी सिविल सर्विस परीक्षा में 108वीं रैंक हासिल करने वाली मेघा अरोड़ा ने खोले सफलता के राज

Mon, 30 Apr 2018 06:46 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 30 Apr 2018 06:46 PM IST
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Megha Arora- who achieved 108th rank in the UPSC Civil Service Examination

राजनीति विरासत में मिल जाती है, लेकिन सिविल सेवा परीक्षा पास करने के लिए जबरदस्त मेहनत और जबरदस्त किस्मत बहुत जरूरी है। वहीं अगर हमारे सिस्टम में महिलाओं की भागीदारी की बात करें तो वह काफी कम है। राजनीति में ही सिर्फ 12 फीसदी महिलाएं हैं और उसमें से भी एक बड़ा हिस्सा पारिवारिक राजनीति का है। जब तक वुमन एम्वारमेंट ही नहीं बढ़ेगी, तब तक महिलाओं की सुरक्षा के प्रति संवेदना नहीं बढ़ेगी। यह कहना है मेघा अरोड़ा का, जिन्होंने इस बार यूपीएससी की सिविल सर्विस परीक्षा में 108वीं रैंक हासिल की है।

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मेघा का मानना है कि इस तरह की फिल्में और गाने आते हैं, जिसमें महिलाओं पर अत्याचार दिखाया जाता है। अब जरूरत बदलाव की है और हमारे सिस्टम को चाहिए पब्लिक स्पेस को महिलाओं के लिए सुरक्षित करें। पुलिस फोर्स में लड़कियों की नौकरी का दायरा बढ़ना चाहिए। क्योंकि अगर ज्यादा महिलाएं फोर्स में आएंगी, तो इस तबके में आत्मविश्वास बढ़ेगा। मेघ के मुताबिक, कई ऐसे मामले आते हैं, जो महिलाएं अत्याचार सहती हैं, लेकिन उसे रिपोर्ट नहीं करती। जब फोर्स में महिलाओं की मौजूदगी पर्याप्त होगी, तो वे बगैर भय के अपनी बात कह पाएंगी।
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जीवन परिचय
नाम- मेघा अरोड़ा
पिता- सुरेश अरोड़ा, डीजीपी पंजाब
मां- सोनाली अरोड़ा, आईआरएस ऑफिसर
स्कूली शिक्षा- कार्मल कान्वेंट, चंडीगढ़
ग्रेजुएशन- फोरेन अफेयर्स, एमोरी यूनिवर्सिटी अमेरिका
पोस्ट ग्रेजुएशन- फोरेन अफेयर्स, यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन
हॉबी- नॉवल पढ़ना

खुद को प्रेरित करना जरूरी

सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारी पर मेघा ने कहा कि यह काफी लंबी परीक्षा है। अच्छा पेपर देने के बाद भी पक्के तौर पर यह नहीं मान सकते की आप चुन लिए गए हैं। इसलिए खुद को प्रेरित करना बेहद जरूरी है। इस परीक्षा को पास करने के लिए जो आप टाइम टेबल बनाते हैं, उसका कम से कम 80 फीसदी तो फॉलो करें।

लोग क्या कहेंगे, यह सोचकर बीच में न छोड़ें पढ़ाई
मेघा के मुताबिक, इस परीक्षा को पास करने पर जितना हल्ला मचता है, उतना ही पास न कर पाने पर भी। कभी मन में ऐसी बात न आने दें कि अगर फेल हो गए तो लोग क्या कहेंगे? असल में यह पढ़ाई की एक तरह की ओवरडोज है। मेघा के मुताबिक,  उन्हें कई बार लगा कि किस चक्कर में पड़ गए, लेकिन यह गलत है। ऐसी भावना मन में कभी न आने दें।

पापा से सीखा है तनाव में स्थिति संभालना
मेघा अरोड़ा के रोल मॉडल उनके पिता डीजीपी सुरेश अरोड़ा हैं और उनकी मां आईआरएस सोनाली अरोड़ा भावनात्मक सपोर्ट देती हैं। मेघा ने एक किस्से का जिक्र किया। जब पठानकोट में आतंकी हमला होने के पहले पंजाब पुलिस को इनपुट मिले। मेघा ने बताया कि उन्होंने पिता डीजीपी पंजाब को रूटीन में कॉल किया, तब रात के साढ़े 11 बज रहे थे। पिता ने जवाब दिया कि आतंकी हमले के इनपुट मिले हैं, उसी पर बैठक कर रणनीति बना रहे हैं। मेघा ने बताया कि तब उन्हें एहसास हुआ कि इतनी तनाव की स्थिति में भी खुद को संभालना पड़ता है। मेघा ने बताया कि तब उन्हें लगा कि परीक्षा की तैयारी में तो कुछ भी मुश्किल नहीं है। जो ग्राउंड लेवल पर जाकर काम कर रहे हैं, असली परीक्षा तो वो है।

आईएफएस बनीं तो व्यापार को बढ़ावा देने पर करेंगी काम
मेघा अरोड़ा ने बताया कि परीक्षा में अपनी पहली पसंद के तौर इंडियन फोरेन सर्विस भरा था। चूंकि पढ़ाई भी फोरेन अफेयर्स में की है और यूपीएससी परीक्षा के लिए विषय भी राजनीति अंतरराष्ट्रीय संबंध चुना था। जो रैंक आई है, अगर उससे आईएफएस अलॉट हो गया तो पड़ोसी देशों में ट्रेडिंग को बढ़ावा देने पर काम करेंगी। दूसरे देशों से शांति वार्ता और विजा लिब्रेशन पर काम करना काफी चुनौतीपूर्ण है।

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