UPSC CSE Success Story: दूसरे ही प्रयास में IAS बनीं गंधर्व राठौर, बिना कोचिंग गए ऐसे पाई सफलता
UPSC CSE IAS Gandharv Rathore Success Story: कॉलेज के दौरान ही गंधर्व ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के लिए कड़ी मेहनत शुरू कर दी थी। 2016 में उन्होंने अपने दूसरे प्रयास में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास कर ली थी। इस परीक्षा के उन्होंने 93वीं रैंक हासिल की।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
IAS Gandharv Rathore UPSC CSE Success Story: संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा विश्व की सबसे जटिल परीक्षाओं में से एक परीक्षा है। हर साल लाखों छात्र अपने सपनों को साकार करने की आस में UPSC सिविल सेवा परीक्षा देते हैं। उन लाखों में से हजारों का चयन होता है और कुछ ही आईएएस और आईपीएस बन पाते हैं।
इन प्रतिभावान छात्रों के परिश्रम को तब पहचान मिलती है जब वो इस परीक्षा को पास करते हैं। समाज तब ही इनकी सराहना करता है जब वो सफलता के साथ रिजल्ट में अपना नाम इंगित करा लेते हैं। एक ऐसा ही नाम 2016 बैच की आईएएस अधिकारी गंधर्व राठौर का है, जिनकी कहानी भावी परीक्षार्थियों के लिए बहुत बड़ा सक्सेस मंत्र हो सकती है।
जयपुर में स्कूलिंग, डीयू के एसआरसीसी से ग्रेजुएट
मूल रूप से जयपुर, राजस्थान की गंधर्व राठौर ने अपनी स्कूली शिक्षा जयपुर में ग्रहण की थी। 2013 में दिल्ली विश्वविद्यालय के श्री राम कॉलेज फॉर कॉमर्स-एसआरसीसी से उन्होंने स्नातक की उपाधि प्राप्त की थी। इसके बाद 2015 में उनका पोस्ट ग्रेजुएशन पूरा हुआ। इसके बाद उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के लिए कड़ी मेहनत शुरू कर दी थी। वर्ष 2016 में उन्होंने अपने दूसरे प्रयास में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास कर ली थी। इस परीक्षा के उन्होंने 93वीं रैंक हासिल की थी।
पहले प्रीलिम्स में 2-3 नंबर से रह गईं थीं गंधर्व!
अपनी शुरुआत के साथ ही गंधर्व ने जब अपना पहला प्रीलिम्स दिया था तो वो 2 से 3 नंबर से चूक गई थीं। इसके बाद गंधर्व ने सीख लेते हुए आकलन करने के लिए कई साथी उम्मीदवारों, दोस्तों और सफल उम्मीदवारों से बात की कि क्या अध्ययन करना है और किन प्रयासों में और समय देना है।
बिना कोचिंग के UPSC सिविल सेवा परीक्षा की पास
इस परीक्षा के लिए कोचिंग कितनी अहम है इसका अंदाजा दिल्ली के मुखर्जी नगर में जाकर लगाया जा सकता है। यहां हर दरवाजे पर एक नए कोचिंग संस्थान का बोर्ड टंगा मिल जाएगा। लेकिन गंधर्व राठौर उन प्रशासनिक अधिकारियों में आती हैं जिन्होंने अपनी पढ़ाई बगैर कोचिंग किए पूरी की।
हालांकि, उन्होंने कोचिंग नहीं ली लेकिन उन्होंने सबसे पहले दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर में स्ठित सभी कोचिंग इंस्टीट्यूट और बुक स्टोर्स का दौरा किया। यहां से उन्होंने सभी विषयों के जरूरी नोट्स प्राप्त किए। इसके बाद उन्होंने हर एक विषय के सिलेबस और स्टडी मटेरियल को गहनता से पढ़ा। इसके साथ ही गंधर्व ने अपने उन मित्रों से सहायता ली जो किसी न किसी कोचिंग संस्थान में पढ़ते थे।
मेन्स समझकर की प्री की परीक्षा की तैयारी
गंधर्व के अनुसार उम्मीदवारों को शुरू से ही मेन्स परीक्षा को ध्यान में रखते हुए तैयारी करनी चाहिए। गंधर्व ने बताया कि वो अपना 80 प्रतिशत समय मेन्स की तैयारी में ही लगाती थीं, जिसमें से आधा समय वह ऑप्शनल सब्जेक्ट को देती थीं। उनके अनुसार ऑप्शनल सब्जेक्ट एक ऐसा सब्जेक्ट हैं, जो सिविल सेवा की परीक्षा पास कराने में अहम भूमिका अदा करता है। गंधर्व ने स्वयं पहले मेन्स और ऑप्शनल और फिर प्रीलिम्स की तैयारी की थी।
मैं सकारात्मक इंसान हूं और अपनी क्षमताओं पर विश्वास करती हूं; मैं इस पूरे सफर के दौरान आशावादी थी। - गंधर्व राठौर, आईएएस अधिकारी
कमेंट
कमेंट X