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गार्ड की नौकरी करते हुए पंकज ने लिख दी सफलता की इबारत, पास की यू-सेट परीक्षा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
Updated Thu, 24 May 2018 07:21 AM IST
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guard pankaj
- फोटो : amar ujala
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती...। महाकवि हरिवंशराय बच्चन की लिखी ये पंक्तियां कुमाऊं विश्वविद्यालय के डीएसबी परिसर में गार्ड की नौकरी करने वाले पंकज कुमार पर सटीक बैठती हैं।
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पंकज ने अपने संघर्षपूर्ण जीवन में चुनौतियों को सामना करते हुए यू-सेट की परीक्षा पास की है। डीएसबी परिसर छात्र संघ ने बुधवार को पंकज को सम्मानित किया।
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पंकज कुमार मूल रूप से भीमताल ब्लॉक के जंगलियां गांव के रहने वाले हैं। सामान्य परिवार से ताल्लुक रखने वाले पंकज के पिता सुंदर लाल किसान हैं और मां इंद्रा देवी गृहणी हैं। उनके बड़े भाई किशोर एक एनजीओ के तहत लोहाघाट के एक स्कूल में शिक्षक के रूप में तैनात हैं। उन्होंने प्राथमिक शिक्षा भीमताल के ही एक सरकारी स्कूल से प्राप्त की। माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षा सितारगंज के जीआईसी से प्राप्त की। पंकज ने स्नातक और परास्नातक डीएसबी परिसर से पास किया।
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2017 में हुई यू-सेट परीक्षा में मेहनत के बल पर परीक्षा पास कर ली
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परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न होने का कारण वे डीएसबी परिसर में गार्ड की नौकरी करने लगे। लेकिन पंकज ने नौकरी के दौरान भी अध्ययन जारी रखा। उन्होंने 2015 में यू-सेट की परीक्षा दी लेकिन कुछ नंबर कम होने के कारण वे मेरिट में आने से चूक गए। लेकिन उन्होंने 2017 में हुई यू-सेट परीक्षा में मेहनत के बल पर परीक्षा पास कर ली।
पंकज ने बताया कि गार्ड की नौकरी करते हुए पढ़ाई के लिए समय निकाल पाना बहुत मुश्किल था। उन्होंने कहा कि वे अब नेट और पीएचडी की तैयारी कर रहे हैं और वे शिक्षण के क्षेत्र में ही आगे बढ़ना चाहते हैं।
अपने पैरों पर खड़े होने के बाद उनका उद्देश्य ऐसे मेधावी छात्रों की मदद करना होगा जिनके परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय डीएसबी में भूगोल विभाग के पूर्व एचओडी प्रो.जीएल साह और डॉ. मनीषा त्रिपाठी को दिया है।
पंकज ने बताया कि गार्ड की नौकरी करते हुए पढ़ाई के लिए समय निकाल पाना बहुत मुश्किल था। उन्होंने कहा कि वे अब नेट और पीएचडी की तैयारी कर रहे हैं और वे शिक्षण के क्षेत्र में ही आगे बढ़ना चाहते हैं।
अपने पैरों पर खड़े होने के बाद उनका उद्देश्य ऐसे मेधावी छात्रों की मदद करना होगा जिनके परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय डीएसबी में भूगोल विभाग के पूर्व एचओडी प्रो.जीएल साह और डॉ. मनीषा त्रिपाठी को दिया है।
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