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भाई के मूलमंत्र लेकर कर ली फतह
एजुकेशन डेस्क
Updated Wed, 01 Oct 2014 11:39 AM IST
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लक्ष्य के प्रति लगन और उसके अनुकूल की गई मेहनत का परिणाम हमेशा ही सकारात्मक होता है। इस तरह की गई कोशिश से सफलता जरूर हासिल होती है। उत्तर प्रदेश के इटावा के रहने वाले दीपेंद्र कुमार सिंह ने भी अपने लिए सिविल सेवा की राह चुनी। वह वर्तमान में कानपुर में सेंट्रल एक्साइज एवं कस्टम ऑफिसर के रूप में तैनात हैं। मेहनत को ही अपना मूलमंत्र मानने वाले दीपेंद्र से उनकी सफलता के बारे में बात हुई। पेश है, उस
बातचीत के मुख्य अंश :
सिविल सेवा में मिली सफलता के बाद अब कैसा लग रहा है?
मेरे भाई आईएएस हैं। मैंने भी आईएएस बनने का सपना देखा और इसे ही अपना लक्ष्य बनाया। 2010 से तैयारी शुरू की। 2010 और 2011 में सिविल सेवा की परीक्षा में शामिल हुआ, लेकिन मैं मुख्य परीक्षा तक ही पहुंच पाया। इसके बाद 2012 की परीक्षा में इंटरव्यू तक पहुंचा और आखिरकार 2013 की सिविल सेवा परीक्षा में मुझे सफलता मिली।
मुख्य परीक्षा के लिए किस विषय का चुनाव किया?
मैंने इतिहास विषय से इस परीक्षा में सफलता प्राप्त की।
आपकी तैयारी की रूपरेखा क्या रही?
मैं 2010 से लगातार सेल्फ स्टडी में जुटा रहा और खुद से नोट्स बनाकर तैयारी की। मैंने मेंस के लिए कोई कोचिंग नहीं ज्वॉइन की। ग्रुप स्टडी और किताबों की मदद से रोजाना तीन से चार घंटे तैयारी करता था। एग्जाम से तीन महीने पहले 6 से 10 घंटे पढ़ाई करता था। इंटरव्यू के लिए मैंने देवीशंकर तिवारी सर से टिप्स लिए थे। उन्होंने मुझे बहुत ज्यादा प्रोत्साहित किया, साथ ही तैयारी में हर तरह से सहायता की। इसके अलावा न्यूजपेपर और मैग्जीन से भी तैयारी में मुझे काफी मदद मिली।
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इंटरव्यू कैसा रहा?
कुल मिलाकर मेरा इंटरव्यू अच्छा गया था। 6 मई, 2014 को इंटरव्यू था और विनय मित्तल बोर्ड के हेड थे। एक इंटरव्यू पहले दे चुका था, इसलिए किसी तरह की नर्वसनेस नहीं थी। सब्जेक्ट पर पकड़ थी और पूरी तैयारी से मैं गया था। हालांकि शुरू में थोड़ा परेशान सा था, लेकिन जब इंटरव्यू होने लगा, तो फिर किसी तरह की दिक्कत नहीं हुई।
अपनी शैक्षणिक पृष्ठभूमि के बारे में जानकारी दें?
मैंने कानपुर के डिफेंस कॉलोनी स्थित सरस्वती विद्या मंदिर से 81.33 प्रतिशत अंकों के साथ दसवीं पास की। फिर इसी स्कूल से 80 प्रतिशत अंकों के साथ 12वीं की। बीएनडी कॉलेज, कानपुर से 58 प्रतिशत अंकों के साथ बीएससी की डिग्री हासिल की। उसके बाद डीएवी कॉलेज, कानपुर से इतिहास से एमए किया।
अपनी मेहनत के अलावा इस सफलता का श्रेय किसको देना चाहेंगे?
मेरी सफलता मेरे परिवार की सफलता है। माता-पिता का आशीर्वाद सदैव मेरे साथ रहा। परिवार के सभी सदस्यों के साथ से ही तैयारी के दौरान मुझे काफी बल मिलता रहा।
तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को आप क्या सलाह देना चाहेंगे?
लक्ष्य पर हमेश फोकस बनाए रखें। हर काम उत्साह से करें और कठिनाइयों में भी सकारात्मक सोच बनाए रखें। टापर्स को लेकर लिखी गई रचनाएं पढ़ने से काफी प्रेरणा मिलती है। इसके अलावा पढ़ाई के दौरान नोट्स इस तरह तैयार करें, ताकि रिवीजन में मदद मिले।
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बातचीत के मुख्य अंश :
सिविल सेवा में मिली सफलता के बाद अब कैसा लग रहा है?
मेरे भाई आईएएस हैं। मैंने भी आईएएस बनने का सपना देखा और इसे ही अपना लक्ष्य बनाया। 2010 से तैयारी शुरू की। 2010 और 2011 में सिविल सेवा की परीक्षा में शामिल हुआ, लेकिन मैं मुख्य परीक्षा तक ही पहुंच पाया। इसके बाद 2012 की परीक्षा में इंटरव्यू तक पहुंचा और आखिरकार 2013 की सिविल सेवा परीक्षा में मुझे सफलता मिली।
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मुख्य परीक्षा के लिए किस विषय का चुनाव किया?
मैंने इतिहास विषय से इस परीक्षा में सफलता प्राप्त की।
आपकी तैयारी की रूपरेखा क्या रही?
मैं 2010 से लगातार सेल्फ स्टडी में जुटा रहा और खुद से नोट्स बनाकर तैयारी की। मैंने मेंस के लिए कोई कोचिंग नहीं ज्वॉइन की। ग्रुप स्टडी और किताबों की मदद से रोजाना तीन से चार घंटे तैयारी करता था। एग्जाम से तीन महीने पहले 6 से 10 घंटे पढ़ाई करता था। इंटरव्यू के लिए मैंने देवीशंकर तिवारी सर से टिप्स लिए थे। उन्होंने मुझे बहुत ज्यादा प्रोत्साहित किया, साथ ही तैयारी में हर तरह से सहायता की। इसके अलावा न्यूजपेपर और मैग्जीन से भी तैयारी में मुझे काफी मदद मिली।
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इंटरव्यू कैसा रहा?
कुल मिलाकर मेरा इंटरव्यू अच्छा गया था। 6 मई, 2014 को इंटरव्यू था और विनय मित्तल बोर्ड के हेड थे। एक इंटरव्यू पहले दे चुका था, इसलिए किसी तरह की नर्वसनेस नहीं थी। सब्जेक्ट पर पकड़ थी और पूरी तैयारी से मैं गया था। हालांकि शुरू में थोड़ा परेशान सा था, लेकिन जब इंटरव्यू होने लगा, तो फिर किसी तरह की दिक्कत नहीं हुई।
अपनी शैक्षणिक पृष्ठभूमि के बारे में जानकारी दें?
मैंने कानपुर के डिफेंस कॉलोनी स्थित सरस्वती विद्या मंदिर से 81.33 प्रतिशत अंकों के साथ दसवीं पास की। फिर इसी स्कूल से 80 प्रतिशत अंकों के साथ 12वीं की। बीएनडी कॉलेज, कानपुर से 58 प्रतिशत अंकों के साथ बीएससी की डिग्री हासिल की। उसके बाद डीएवी कॉलेज, कानपुर से इतिहास से एमए किया।
अपनी मेहनत के अलावा इस सफलता का श्रेय किसको देना चाहेंगे?
मेरी सफलता मेरे परिवार की सफलता है। माता-पिता का आशीर्वाद सदैव मेरे साथ रहा। परिवार के सभी सदस्यों के साथ से ही तैयारी के दौरान मुझे काफी बल मिलता रहा।
तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को आप क्या सलाह देना चाहेंगे?
लक्ष्य पर हमेश फोकस बनाए रखें। हर काम उत्साह से करें और कठिनाइयों में भी सकारात्मक सोच बनाए रखें। टापर्स को लेकर लिखी गई रचनाएं पढ़ने से काफी प्रेरणा मिलती है। इसके अलावा पढ़ाई के दौरान नोट्स इस तरह तैयार करें, ताकि रिवीजन में मदद मिले।
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