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सूखी धरती पर बागवानी कर दस लाख सालाना कमाता है ये किसान

Sat, 14 May 2016 07:23 AM IST
चंद्रभान यादव/ अमर उजाला, हमीरपुर
चंद्रभान यादव/ अमर उजाला, हमीरपुर Updated Sat, 14 May 2016 07:23 AM IST
सार

  • हमीरपुर के रामरतन ने जल संकट से बचने का रास्ता निकाला, परंपरागत खेती छोड़ी
  • बागवानी से हर साल कमा रहे आठ से दस लाख रुपये, किसानों को दे रहे गुरुमंत्र

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Drought never becomes hurdle for this Bundelkhand Farmer
सूखे को मात देने वाले रामरतन - फोटो : चंद्रभान यादव और गेटी इमेजिस

विस्तार

सूखे की मार झेल रहे बुंदेलखंड में कोई किसान अगर अपनी उपज के भरोसे लखपति बन जाए तो सुनने में यह अटपटा लगेगा, लेकिन बिंवार के रामरतन प्रजापति ने ऐसा कर दिखाया है। 60 साल के रामरतन ने परंपरागत खेती छोड़कर बागवानी शुरु की और आठ से दस लाख रुपये सालाना कमा रहे हैं। उनकी कामयाबी देखकर आसपास के तमाम किसानों ने बागवानी पर हाथ आजमाना शुरू कर दिया है।

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बकौल रामरतन, सरकारी नौकरी लगने के बाद उनके बड़े भाई जब लखनऊ चले गए तो खेती की जिम्मेदारी उनके सिर आ पड़ी। करीब 25 बीघे में धान और गेहूं उगाने लगे, लेकिन हर साल घाटा लगता। 
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साल 1990 में बागवानी की शुरुआत की। दो बीघे में मौसमी लगाई। दो वर्ष बाद दो बीघे के इस बाग से हुई आमदनी 20 बीघे गेहूं के बराबर ही थी। फिर अगले साल 12 बीघे में मौसमी लगा दी। 

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सूखे से जूझ रहे किसानों को देते हैं गुरुमंत्र

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साल 2000 के बाद इलाके में जल संकट बढ़ने लगा। बोरिंग जवाब दे गया, नहर में भी पानी कभी-कभी ही आता। सो बाकी बचे खेत में अमरूद और थाईलैंड की प्रजाति के बेर लगवा दिए। गेहूं, धान सिर्फ खाने भर का उगाते हैं। 

रतन बताते हैं कि पंपसेट के जवाब देने पर रिबोर कराने के लिए भाई से पैसा उधार लेना पड़ा, लेकिन मौसमी की फसल आई तो उन्हें करीब दो लाख का मुनाफा हुआ। पिछले साल मौसमी लखनऊ की मंडी में भेजी थी। 12 बीघे से करीब पांच लाख की आमदनी हुई। बेर और अमरूद से भी करीब डेढ़-डेढ़ लाख रुपये मिले। इस तरह औसतन हर साल आठ से 10 लाख रुपये खेती से मिल रहे हैं।

रामरतन ने अब एक पौधशाला भी बना ली है। मौसमी और नीबू को मिलाकर एक नई किस्म इजाद कर रहे हैं। सरकारी मदद से पॉली हाउस भी बना लिया है। पौधशाला में पानी की खपत पर काबू रखने के लिए ड्रिप सिंचाई प्रणाली अपनाते हैं।

परिवार और पड़ोसी उड़ाते थे मजाक

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70 किसान चल रहे हैं रामरतन के रास्ते पर - फोटो : pti

रामरतन ने जब पहली बार बागवानी शुरू की तो परिवार और पड़ोसी दोनों उनका मजाक उड़ाते थे। अब लोग आते हैं और उनसे बागवानी करने के तरीके पूछते हैं। रामरतन की देखादेखी उनके इलाके में करीब 70 किसान बागवानी कर रहे हैं। इस बार ब्लॉक में बागवानी मिशन के तहत करीब आठ सौ किसानों ने आदेवन किया है।

बागवानी में कम पानी खर्च होता है। मौसमी, अमरूद और बेर में पौधरोपण के दौरान ही पानी की जरूरत पड़ती है। बेर बिना पानी के दोबारा फल देता है। सूखे से प्रभावित इलाके में बागवानी के जरिए किसानों की जिंदगी संवारी जा सकती है।
- डॉ. सुशील कुमार यादव (बागवानी विशेषज्ञ, कृषि विज्ञान केंद्र, शिवली)

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