फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
Hindi News ›   Education ›   Stopping Funds for States Rejecting PM SHRI Scheme Unjustified: Parliamentary Panel

PM SHRI Scheme: पीएम श्री योजना लागू न करने पर राज्यों का फंड रोकना अनुचित, संसदीय समिति ने दिया सुझाव

Wed, 26 Mar 2025 05:55 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: आकाश कुमार Updated Wed, 26 Mar 2025 05:55 PM IST
सार

PM SHRI Scheme: संसदीय समिति ने कहा कि पीएम श्री योजना लागू न करने वाले राज्यों को सर्व शिक्षा अभियान (SSA) का फंड रोकना अनुचित है। तमिलनाडु, केरल और पश्चिम बंगाल को करोड़ों रुपये की राशि नहीं मिली। समिति ने तुरंत फंड जारी करने की सिफारिश की।
 

विज्ञापन
Stopping Funds for States Rejecting PM SHRI Scheme Unjustified: Parliamentary Panel
दिग्विजय सिंह - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर

विस्तार

PM SHRI Scheme: संसद की एक समिति ने कहा है कि जिन राज्यों ने पीएम श्री स्कूल योजना लागू करने से इनकार किया है, उन्हें फंड न देना उचित नहीं है। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब केंद्र और तमिलनाडु सरकार के बीच विवाद चल रहा है। तमिलनाडु सरकार ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) और तीन-भाषा फॉर्मूला को लागू करने से इनकार कर दिया, जिसके बाद राज्य को 2,100 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी नहीं की गई।

विज्ञापन

फंड रोकने पर आपत्ति

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली शिक्षा, महिला, बाल विकास, युवा और खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने सिफारिश की है कि शिक्षा मंत्रालय सर्व शिक्षा अभियान (SSA) के तहत फंड आवंटन की समीक्षा करे और किसी भी राज्य को नुकसान न पहुंचे, चाहे उन्होंने NEP 2020 या पीएम श्री योजना स्वीकार की हो या नहीं।

समिति ने रिपोर्ट में बताया कि कुछ राज्यों को SSA का फंड इसलिए नहीं दिया गया क्योंकि उन्होंने पीएम श्री योजना लागू करने के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर नहीं किए। पश्चिम बंगाल को 1,000 करोड़ रुपये, केरल को 859.63 करोड़ रुपये और तमिलनाडु को 2,152 करोड़ रुपये मिलने बाकी हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, देश के 36 में से 33 राज्य और केंद्रशासित प्रदेश इस योजना को लागू कर रहे हैं और राष्ट्रीय स्तर पर मूल्यांकन और पाठ्यक्रम में समानता लाने के लिए पीएम श्री के तहत स्कूल विकसित कर रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

फंड जल्द जारी करने की सिफारिश

समिति ने शिक्षा मंत्रालय से अनुरोध किया है कि वह इस मुद्दे को राज्यों के साथ मिलकर सुलझाए और लंबित फंड को प्राथमिकता के आधार पर जारी करे।

सरकार ने समिति को बताया कि पीएम श्री योजना, नई शिक्षा नीति के तहत एक मॉडल स्कूल योजना है, और एसएसए इसके लक्ष्यों को प्राप्त करने का कार्यक्रम। इसी वजह से जिन राज्यों ने पीएम श्री योजना को स्वीकार नहीं किया, उनकी एसएसए राशि रोक दी गई।

हालांकि, समिति का मानना है कि यह तर्क गलत और अनुचित है। SSA योजना पीएम श्री से पहले से चल रही थी और इसका उद्देश्य शिक्षा के अधिकार (RTE) कानून को लागू करना है। RTE संसद द्वारा पारित एक कानून है जो हर बच्चे को शिक्षा का मौलिक अधिकार देता है। एसएसए इस कानून के तहत बच्चों को शिक्षा देने के लिए बनी योजना है, जिसे NEP जैसी नीतियों के कारण रोका नहीं जा सकता।

विज्ञापन

शिक्षा में अच्छा प्रदर्शन करने वाले राज्यों को नुकसान

समिति ने कहा कि केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों का सकल नामांकन अनुपात (GER) राष्ट्रीय औसत से कहीं बेहतर है।

लेकिन एसएसए फंड जारी न करने और देरी से मिलने के कारण इन राज्यों में स्कूलों का बुनियादी ढांचा, शिक्षकों का प्रशिक्षण और छात्रों को मिलने वाली सुविधाएं प्रभावित हो रही हैं। इन राज्यों को अपने बजट से शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की सैलरी देनी पड़ी क्योंकि केंद्र से राशि नहीं मिली।

वित्तीय वर्ष 2024-25 में तमिलनाडु को एसएसए के तहत 3,586 करोड़ रुपये मिले थे, जिसमें केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 2,152 करोड़ रुपये थी, लेकिन बार-बार अनुरोध के बावजूद यह राशि जारी नहीं की गई। इससे शिक्षकों की सैलरी, RTE के तहत दी जाने वाली आर्थिक सहायता और दूर-दराज के इलाकों में छात्रों की परिवहन व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

तत्काल फंड जारी करने की मांग

समिति ने साफ कहा कि एसएसए के फंड को पीएम श्री योजना से जोड़कर रोकना अनुचित है। समिति ने केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के लिए एसएसए फंड तुरंत जारी करने की सिफारिश की है, ताकि शिक्षकों की सैलरी, प्रशिक्षण कार्यक्रम और स्कूलों के रखरखाव में कोई रुकावट न आए।

समिति ने शिक्षा मंत्रालय को यह सुनिश्चित करने के लिए भी कहा कि एसएसए फंड का आवंटन जरूरतों के आधार पर हो, न कि किसी नीति या योजना को लागू करने की शर्त पर। इससे सभी राज्यों को समान रूप से सहायता मिल सकेगी और शिक्षा व्यवस्था सुचारू रूप से चलेगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें शिक्षा समाचार आदि से संबंधित ब्रेकिंग अपडेट।

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed