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Hindi News ›   Education ›   Shaheed Diwas on March 23: Deliver This Inspiring Speech to Honor the Heroes

Shaheed Diwas 2025: 23 मार्च को वीरों की शहादत को नमन, जगाएं देशभक्ति का जज्बा; इस दिन दें ये प्रेरणादायक भाषण

Sat, 22 Mar 2025 11:31 AM IST
शाहीन परवीन एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: शाहीन परवीन Updated Sat, 22 Mar 2025 11:31 AM IST
सार

Shaheed Diwas par Speech Hindi: 23 मार्च शहीद दिवस उन वीर सपूतों की याद में मनाया जाता है जिन्होंने भारत की आजादी के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को आज से 94 साल पहले 1931 में इसी दिन फांसी दी गई थी। उन्होंने निडर होकर देश के लिए बलिदान दिया और स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी।

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Shaheed Diwas on March 23: Deliver This Inspiring Speech to Honor the Heroes
Shaheed Diwas 2025 - फोटो : Adobe Stock's

विस्तार

Shaheed Diwas 2025: 23 मार्च को पूरे भारत में शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन उन वीर सेनानियों को श्रद्धांजलि देने का एक महत्वपूर्ण अवसर है, जिन्होंने देश की स्वतंत्रता और संप्रभुता की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।

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भारत में यह दिन विशेष रूप से भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की याद में मनाया जाता है, जिन्हें 1931 में ब्रिटिश हुकूमत ने फांसी दे दी थी। वे भारत को आजाद कराने के लिए आखिरी दम तक लड़े और अपने बलिदान से देश के युवाओं को प्रेरित किया।
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इसी तरह, पाकिस्तान में भी 23 मार्च को एक ऐतिहासिक दिन माना जाता है, जब वहां के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को याद किया जाता है। यह दिन पूरे उपमहाद्वीप के लिए बलिदान और देशभक्ति की मिसाल है।
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शहीद दिवस पर भाषण-1

आदरणीय प्रधानाचार्य, शिक्षकगण, तथा मेरे प्रिय साथियों,

आज हम सब यहां 23 मार्च शहीद दिवस के अवसर पर एकत्रित हुए हैं, जो हमारे देश के उन अमर शहीदों को श्रद्धांजलि देने का दिन है, जिन्होंने भारत की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। विशेष रूप से, इस दिन को भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की शहादत को याद करने के लिए मनाया जाता है, जिन्होंने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ संघर्ष करते हुए अपना जीवन बलिदान कर दिया।

भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु भारत की आजादी के लिए लड़े और देशवासियों में क्रांतिकारी भावना जगाई। भगत सिंह का मानना था कि "इंकलाब जिंदाबाद" केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक विचारधारा है, जो देश को गुलामी से मुक्त कर सकती है। 23 मार्च 1931 को इन्हें फांसी दे दी गई, लेकिन उनका साहस और बलिदान हमेशा अमर रहेगा।
 
आज का दिन हमें याद दिलाता है कि देश के लिए प्रेम और त्याग ही सच्ची देशभक्ति है। हमें इनके विचारों से प्रेरणा लेकर अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझना चाहिए।

अंत में, मैं बस यही कहना चाहूंगा कि हम अपने शहीदों के बलिदान को कभी न भूलें और उनके सपनों के भारत को साकार करने के लिए हमेशा प्रयासरत रहें।

जय हिंद वंदे मातरम्

शहीद दिवस पर भाषण-2

आदरणीय प्रधानाचार्य, शिक्षकगण और मेरे प्रिय साथियों,

आज हम यहां एक बहुत ही महत्वपूर्ण अवसर पर एकत्र हुए हैं। 23 मार्च यह दिन हमें उन वीर सपूतों की याद दिलाता है जिन्होंने अपने देश की स्वतंत्रता और सम्मान के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। विशेष रूप से, यह दिन भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की शहादत को समर्पित है, जो न सिर्फ हमारे लिए बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी देशभक्ति और बलिदान की मिसाल हैं।
  
23 मार्च 1931 को इन तीनों वीरों को ब्रिटिश हुकूमत ने फांसी दे दी थी। लेकिन क्या उन्होंने मौत को डरकर अपनाया? नहीं! उन्होंने हंसते-हंसते फांसी का फंदा चूमा और अपने प्राणों की आहुति दी। उनका एक ही सपना था- भारत को आजाद देखना। भगत सिंह ने कहा था, "यदि बहरों को सुनाना है, तो आवाज को बहुत जोरदार होना पड़ेगा"

उनका संघर्ष सिर्फ हथियारों तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने अपने विचारों से भी अंग्रेजों के शासन को हिला दिया। वे चाहते थे कि भारत न केवल स्वतंत्र हो, बल्कि समाज में समानता और न्याय भी हो।

हम आजाद भारत में सांस ले रहे हैं, लेकिन यह आजादी हमें मुफ्त में नहीं मिली। यह उन लाखों शहीदों की कुर्बानियों का परिणाम है। आज हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम भी अपने देश के विकास और सुरक्षा में योगदान देंगे।

शहीदों की कुर्बानी को कभी न भूलें, उनकी यादों को अपने दिल में संजोकर रखें और उनके सपनों का भारत बनाने का प्रयास करें।

आइए, आज हम सभी मिलकर इन अमर शहीदों को नमन करें और उनके दिखाए रास्ते पर चलने का संकल्प लें। हमारा देश तभी सच्चे अर्थों में समृद्ध होगा, जब हम उनके बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने देंगे।

"शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले,
वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशां होगा!"

जय हिंद वंदे मातरम्

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