रेलवे क्रॉसिंग पर हादसे रोकने के लिए आया रोबोट, संस्कृति यूनिवर्सिटी के छात्रों ने किया कमाल
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पिछले महीने उत्तर प्रदेश में एक हादसा हुआ था। कुशीनगर में मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग पर हुए भीषण हादसे में 13 स्कूल के छात्रों की मौत हो गई थी। इस हादसे ने पूरे देश में मावनरहित रेलवे क्रॉसिंग को लेकर सवाल खड़े कर दिए थे। यहां तक कि भारतीय रेलवे बोर्ड चेयरमैन अश्विनी लोहिया ने 31 मार्च 2020 तक सभी मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग खत्म करने की घोषणा कर डाली थी।
सरकार समस्या को लेकर गंभीर है, लेकिन एक सच यह भी है कि देश में आज भी सैकड़ों मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग हैं, जो हादसों को न्योता दे रही हैं। इसी समस्या का एक प्रयास मथुरा की संस्कृति यूनिवर्सिटी के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के कुछ छात्रों ने खोज निकाला है। इनके नाम हैं- शिवा ओझा, दिलीप यादव, दीपक और जीतेंद्र। संस्कृति यूनिवर्सिटी के इन होनहारों ने एक ऐसा रोबोटिक मॉडल तैयार किया है, जिससे रेलवे क्रॉसिंग पर होने वाले हादसों को रोका जा सकता है।
दरअसल, रेलवे क्रॉसिंग पर अधिकतर हादसे गेटमैनों की गलती से होते हैं। कई जगहों पर तो ये होते भी नहीं है। ऐसे में छात्रों का यह रोबोट ट्रेन के आने का संकेत मिलते ही काम करने लगता है। संस्कृति यूनिवर्सिटी के छात्रों का यह रोबोटिक मॉडल इतना हाई-टेक कि ट्रेन के आने का संकेत मिलते ही यह गेट अपने आप बंद कर देता है और जब ट्रेन चली जाएगी तो गेट खुद-ब-खुद खुल जाएगा।
संस्कृति यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट शिवा ओझाा, दिलीप यादव, दीपक और जीतेंद्र ने दावा किया कि उनके रोबोटिक मॉडल से देश की मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग को बेहद सुरक्षित बनाया जा सकेगा। इन छात्रों ने रेलवे के विशेषज्ञों के सामने अपने रोबोटिक मॉडल को पेश भी किया है। छात्रों ने रेलवे के शीर्ष अधिकारियों के सामने रोबोट का एकदम लाइव टेस्ट करके दिखाया, जिसे देखकर अधिकारी काफी खुश हुए और इस टेक्नोलॉजी को बेहद फायदेमंद बताया।
बीते एक साल में भारतीय रेलवे ने करीब 1464 मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग को खत्म किया है
बीते एक साल में भारतीय रेलवे ने करीब 1464 मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग को खत्म किया है। मार्च 2018 तक के आंकड़ों के मुताबिक, देशभर में अब भी 3479 रेलवे क्रॉसिंग मानवरहित हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि अप्रैल 2016 तक देशभर में 9,340 रेलवे क्रॉसिंग मानवरहित थीं। हालांकि, इन्हें तेजी से कम किया जा रहा है। ऐसे में यह रोबोटिक मॉडल रेलवे के लिए एक प्रकार से मील का पत्थर साबित हो सकता है।
छात्रों के इस सराहनीय प्रयास की संस्कृति यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति सचिन गुप्ता, उपकुलाधिपति राजेश गुप्ता, कुलपति डॉक्टर देवेंद्र पाठक, कार्यकारी पिदेशक पीसी छाबड़ा, इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के डायरेक्टर राकेश धीमान ने जमकर प्रशंसा की।
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