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विश्व खाद्य दिवस: भूखे सोते हैं 19 करोड़ लोग, संस्कृति यूनिवर्सिटी में हुआ मंथन

Tue, 13 Nov 2018 05:45 PM IST
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Advertorial Updated Tue, 13 Nov 2018 05:45 PM IST
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Sanskrit University Organized brainstorming program on world food day
Sanskriti university

मथुरा। संस्कृति विश्वविद्यालय में विश्व खाद्य दिवस मनाया गया। इस दौरान एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट के छात्रों को अन्न की बर्बादी रोकने और गुणवत्तापूर्ण अन्न उत्पादन की दिशा में काम करने की सलाह दी गई। इस अवसर पर कुलाधिपति सचिन गुप्ता ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रयासों से आज ही के दिन 16 अक्टूबर को खाद्य एवं कृषि संगठन की स्थापना की गई थी। इसलिए इस दिन को विश्व खाद्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। कुलाधिपति सचिन गुप्ता ने बदलती जीवन शैली और खान-पान के तौर तरीकों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पुराने लोग थाली में आए अन्न को बर्बाद नहीं करते थे, लेकिन वर्तमान में अन्न की बर्बादी एक बड़ी समस्या बन गई है, इसे रोकना होगा। ओएसडी मीनाक्षी शर्मा ने कहा कि आधुनिकता की दौड़ में हम यह भूल जाते हैं कि आज भी हजारों लोग भोजन की कमी के चलते भूखे सो जाते हैं। युवाओं को इस दिशा में काम करना चाहिए। उन्होंने भूखे लोगों को भोजन कराने वाले कुछ उदाहरण प्रस्तुत करते हुए अपील की कि अन्न की बर्बादी रोकने का हम सभी को संकल्प लेना चाहिए। कुलपति डॉक्टर राणा सिंह ने कहा कि लोग अब स्वास्थ्य के प्रति बेहद जागरूक हुए हैं। अब लोगों को खाना चाहिए, लेकिन उसका हेल्दी होना भी जरूरी होता जा रहा है। ऐसे में कृषि स्नातक और परास्नातक की शिक्षा पा रहे युवाओं का दायित्व बनता है कि वह अभी से इस दिशा में सोचना शुरू करें। उप कुलपति डॉक्टर अभय कुमार ने कहा कि वैज्ञानिक विभिन्न पोषक तत्वों की प्रचुरता वाले चावल आदि की किस्में तैयार कर रहे हैं। हमारे कृषि स्नातक बेहद गुणवत्तायुक्त बाजरा जैसी फसलों के उत्पाद बनाने की दिशा में काम कर सकते हैं। उन्होंने जैविक खेती आदि की दिशा में सरकार के प्रयासों का जिक्र करते हुए कहा कि किसान जानकारी के अभाव में असंतुलित उर्वरकों का प्रयोग कर रहे हैं, इससे चारे व अन्न में भी इनका असंतुलन बना हुआ है। यह मानव, पशु एवं पक्षियों सभी के लिए नुकसानदायक हुआ है। जैविक तत्वों के डालने से इसके दुष्प्रभाव रुकने की संभावना है।

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अन्न की बर्बादी से जुड़े कुछ आंकड़े -

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) ने एक रिपोर्ट जारी की है, जिसके अनुसार भारतीय प्रतिदिन 244 करोड़ रुपए का भोजन बर्बाद कर देते हैं। मतलब एक साल में 89060 करोड़ रुपए का खाना बेकार हो जाता है। दूसरी ओर भारत में प्रतिदिन 19 करोड़ 40 लाख लोग भूखे सोते हैं। यह आंकड़ा चीन में भुखमरी के शिकार लोगों से कहीं अधिक है।

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