NIRF: एनआईआरएफ रैंकिंग में होने जा रहा बड़ा बदलाव, अब निगेटिव मार्किंग भी होगी; जल्द आएंगे ड्राफ्ट नियम
NIRF: नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क अब रिट्रैक्टेड रिसर्च पेपर और गलत डेटा पर निगेटिव मार्किंग लागू करेगा। यह बदलाव शोध की गुणवत्ता और संस्थानों की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा है। ड्राफ्ट नियम जल्द घोषित किए जाएंगे।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
NIRF Ranking New Rule: नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF) में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब तक केवल पॉजिटिव वेटेज के आधार पर रैंकिंग दी जाती थी, लेकिन जल्द ही निगेटिव मार्किंग भी शामिल की जाएगी। यह व्यवस्था विशेष रूप से उन संस्थानों पर लागू होगी जिनके रिसर्च पेपर रिट्रैक्ट किए गए हैं या जिनके कार्य में भ्रामक उद्धरण और डेटा की गड़बड़ी पाई गई है।
जल्द सार्वजनिक किए जाएंगे ड्राफ्ट नियम
गौरतलब है कि एनआईआरएफ रैंकिंग के दसवें संस्करण की रैंकिंग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने जारी की थी। संस्थान के इतिहास में इससे पहले निगेटिव मार्किंग का प्रावधान नहीं रहा है।
नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रेडिटेशन (NBA) के चेयरमैन अनिल सहस्रबुद्धे ने बताया कि पहली बार एनआईआरएफ अपने मूल्यांकन में दंडात्मक प्रावधान शामिल करने जा रहा है। उनके अनुसार, "रिसर्च में कदाचार और डेटा में हेरफेर रोकने के लिए यह कदम जरूरी है। ड्राफ्ट नियम जल्द ही सार्वजनिक किए जाएंगे।"
फिलहाल इन पांच मानकों के आधार पर मिलती है रैंकिंग
एनआईआरएफ फिलहाल संस्थानों को पांच प्रमुख मानकों पर परखता है -
- टीचिंग और लर्निंग
- ग्रेजुएशन आउटकम
- रिसर्च
- आउटरीच
- परसेप्शन
2024 साइकिल में इसमें 8,700 से अधिक संस्थानों ने भाग लिया था। इन नतीजों को छात्र, भर्ती एजेंसियां और नीति निर्माता एक अहम पैमाने के रूप में देखते हैं।
पिछले कुछ वर्षों में कई संस्थानों से बड़ी संख्या में रिसर्च पेपर वापस लिए गए हैं। इस कारण उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं। अब तक, रिट्रैक्टेड पेपरों का असर रैंकिंग पर नहीं पड़ता था, जिससे कुछ संस्थान उच्च रैंक हासिल कर लेते थे।
इस मुद्दे को हाल ही में मद्रास हाई कोर्ट में दायर एक जनहित याचिका (PIL) में भी उठाया गया था। याचिका में आरोप लगाया गया था कि NIRF रैंकिंग केवल संस्थानों द्वारा दी गई जानकारी पर आधारित होती है, बिना किसी स्वतंत्र सत्यापन या ऑडिट के। हालांकि केंद्र सरकार ने दखल देकर कोर्ट को आश्वस्त किया कि एनआईआरएफ वैज्ञानिक तरीके से रैंकिंग जारी करता है, जिसके बाद रोक हटा दी गई।
कमेंट
कमेंट X