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Reed Snake: मिजोरम में खोजी गई नई रीड स्नेक प्रजाति, भारत के सरीसृप जीव-जंतुओं में हुआ विस्तार

Tue, 06 Jan 2026 10:43 AM IST
शाहीन परवीन एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: शाहीन परवीन Updated Tue, 06 Jan 2026 10:43 AM IST
सार

Reed Snake: मिजोरम में वैज्ञानिकों ने रूस, जर्मनी और वियतनाम के सहयोग से एक नई रीड स्नेक प्रजाति की खोज की है, जिसे भारत के सरीसृप जीव-जंतुओं में शामिल किया गया है।

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New reed snake species identified in Mizoram
रीड सांप - फोटो : PTI

विस्तार

Calamaria Mizoramensis: मिजोरम के वैज्ञानिकों की एक टीम ने रूस, जर्मनी और वियतनाम के शोधकर्ताओं के सहयोग से राज्य में रीड स्नेक की नई प्रजाति की पहचान की है। इस खोज से लंबे समय से चली आ रही वर्गीकरण संबंधी गलतियों को सुधारा गया है और भारत के सरीसृप जीव-जंतुओं में एक पहले से अज्ञात प्रजाति को शामिल किया गया है।

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मिजोरम विश्वविद्यालय के प्राणी विज्ञान विभाग के प्रोफेसर और शोध दल के प्रमुख एचटी लालरेमसांगा के अनुसार, इस नई प्रजाति का नाम कैलामरिया मिजोरामेंसिस रखा गया है, जो राज्य के नाम पर आधारित है।

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उन्होंने कहा कि गहराई से शरीर के आकार की जांच और DNA विश्लेषण के बाद यह निष्कर्ष सोमवार को अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिका जूटैक्सा में प्रकाशित हुआ।
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मिजोरम का रीड सांप है अनोखा और अलग प्रजाति

लालरेमसांगा के अनुसार, इस सांप के नमूने सबसे पहले 2008 में मिजोरम से लिए गए थे। पहले इन्हें दक्षिणपूर्व एशिया की सामान्य प्रजातियों का हिस्सा माना जाता था।

उन्होंने बताया कि नए अध्ययन से साबित हुआ है कि मिजोरम की यह आबादी राज्य के लिए खास और अलग वंश का प्रतिनिधित्व करती है।

शोध दल ने आइजोल, रीएक, सिहफिर और सॉलेंग के आसपास के जंगलों, साथ ही मामित और कोलासिब जिलों के कुछ हिस्सों से पिछले एक दशक में एकत्र किए गए नमूनों का अध्ययन किया।

आनुवंशिक तुलना से पता चला कि मिजोरम रीड सांप अपने सबसे करीब के रिश्तेदारों से 15 प्रतिशत से अधिक अलग है। यह अंतर नई प्रजाति मानने के लिए पर्याप्त है।

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मिजोरम में नई रीड स्नेक प्रजाति विषैली नहीं

उन्होंने कहा कि फिलहाल इस प्रजाति की पुष्टि केवल मिजोरम से ही हुई है, हालांकि पड़ोसी क्षेत्रों में इसकी उपस्थिति से इनकार नहीं किया जा सकता है।

अध्ययन में कहा गया है, "भारत के अन्य हिस्सों में इसकी मौजूदगी की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यह मणिपुर, नागालैंड और असम जैसे पड़ोसी राज्यों में मौजूद होने की संभावना है। बांग्लादेश के चटगांव क्षेत्र में इसके संभावित विस्तार की भी आगे पुष्टि की आवश्यकता है।"

कैलामरिया वंश में विश्व स्तर पर 69 मान्यता प्राप्त प्रजातियां शामिल हैं, जिनमें से अधिकांश छोटी, गुप्त और कम अध्ययन की गई हैं। मिजोरम में हाल ही में पहचानी गई प्रजाति विषैली नहीं है और मनुष्यों के लिए कोई खतरा नहीं है।

इस अध्ययन में बताया गया है कि निशाचर और अर्ध-भूमिगत बताए जाने वाले ये सांप नम, पहाड़ी जंगलों वाले वातावरण में रहते हैं और इन्हें समुद्र तल से 670 से 1,295 मीटर की ऊंचाई तक के क्षेत्रों में देखा गया है, जिनमें मिजोरम विश्वविद्यालय परिसर जैसे मानव बस्तियों के निकट के क्षेत्र भी शामिल हैं।

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नई खोज से मिजोरम के सरीसृप और उभयचरों की अद्यतन सूची तैयार

उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर, शोधकर्ताओं ने आईयूसीएन रेड लिस्ट मानदंडों के तहत इस प्रजाति को 'कम चिंताजनक' श्रेणी में रखा है, क्योंकि यह कई स्थानों पर पाई जाती है और इससे संबंधित कोई बड़ा मानवजनित खतरा नहीं है।

इसके अतिरिक्त, अध्ययन में मिजोरम के सरीसृप और उभयचर जीवों की एक अद्यतन सूची प्रस्तुत की गई है, जिसमें 52 उभयचरों और 117 सरीसृपों सहित 169 प्रजातियों का दस्तावेजीकरण किया गया है।

शोधकर्ताओं ने कहा कि इस खोज से पूर्वोत्तर भारत में, विशेष रूप से वनों से आच्छादित पहाड़ी क्षेत्रों में, जहां कई प्रजातियों का दस्तावेजीकरण ठीक से नहीं हुआ है, निरंतर जैविक सर्वेक्षणों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया है।

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