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राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण 2021: 8वीं-10वीं कक्षा में जाते ही छात्रों के औसत प्रदर्शन में गिरावट, 48 फीसदी छात्र पैदल जाते हैं स्कूल
Thu, 26 May 2022 06:31 AM IST
देव कश्यप
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: देव कश्यप
Updated Thu, 26 May 2022 06:31 AM IST
सार
रिपोर्ट में पाया कि जैसे-जैसे छात्र उच्च कक्षा में जाते हैं, उनमें सीखने के स्तर (उपलब्धियों) में गिरावट आती है। राष्ट्रीय स्तर पर 500 के स्कैल में किए स्कोर में छात्रों का औसत प्रदर्शन उच्च कक्षाओं में घटने लगता है।
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विद्यार्थी (सांकेतिक तस्वीर)।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कक्षा तीसरी, पांचवीं की तुलना में आठवीं और दसवीं कक्षा तक आते-आते छात्रों में सीखने की क्षमता घट रही है। यह खुलासा राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण 2021 की रिपोर्ट में हुआ है। इसमें भाषा, गणित, पर्यावरण विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और अंग्रेजी में योग्यता-आधारित मूल्यांकन पर केंद्रित था।
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इसमें पाया कि जैसे-जैसे वे उच्च कक्षा में जाते हैं, छात्रों में सीखने के स्तर (उपलब्धियों) में गिरावट आती है। राष्ट्रीय स्तर पर 500 के स्कैल में किए स्कोर में छात्रों का औसत प्रदर्शन उच्च कक्षाओं में घटने लगता है। कक्षा तीसरी में छात्र का भाषा में राष्ट्रीय औसत प्रदर्शन 500 में से 323 है तो दसवीं कक्षा में यह घटकर 260 रहा गया है। वहीं, गणित में कक्षा तीसरी के स्तर पर राष्ट्रीय औसत स्कोर 306 है, जो घटकर 284 हो जाता है। कक्षा पांचवीं और कक्षा आठवीं में 255 और कक्षा दसवीं में यह 220 पर पहुंच गया है। खास बात यह है कि दिल्ली सरकार के स्कूलों में तीसरी और पांचवीं कक्षा की रिपोर्ट बेहद अच्छी है। राष्ट्रीय औसत की तुलना में यह बेहद कम है।
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केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग ने राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण 2021 की रिपोर्ट बुधवार शाम को जारी की है। यह तीन साल की चक्र अवधि के साथ कक्षा तीसरी, पांचवीं, आठवीं और दसवीं कक्षा में बच्चों की सीखने की क्षमता का व्यापक मूल्यांकन सर्वेक्षण करके देश में स्कूली शिक्षा प्रणाली के स्वास्थ्य का आकलन करती है। यह स्कूली शिक्षा प्रणाली के समग्र मूल्यांकन को भी दर्शाती है। इससे पहले पिछली रिपोर्ट 2017 में जारी की गई थी।
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रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण 2021 के लिए देशभर में 12 नवंबर को परीक्षा आयोजित की गई थी। इसमें देश के सभी सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों के छात्र शामिल हुए थे। इसमें कुल 34,01,158 छात्र और लगभग 1,18,274 स्कूलों के 26, 824 शिक्षकों ने सर्वेक्षण में भाग लिया था। अधिकतर राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की स्कूली प्रदर्शन की यह रिपोर्ट अच्छी नहीं है। लेकिन पंजाब, केरल, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हिमाचल, महाराष्ट्र व चंडीगढ़ की रिपोर्ट राष्ट्रीय औसत में बेहतर है।
38 फीसदी छात्रों का मानना महामारी में शिक्षा कठिन थी
देशभर में तीसरी, पांचवीं, आठवीं और 10 वीं कक्षा के 3.4 मिलियन स्कूली छात्रों में से 38 फीसदी ने कहा कि महामारी में उनकी शिक्षा के लिए कठिन चरण था। जबकि 24 फीसदी ने कहा कि उनके घर पर डिजिटल उपकरणों की पहुंच नहीं है। इसका अर्थ है कि लगभग एक चौथाई स्कूली छात्रों के पास घर पर डिजिटल उपकरण तक की पहुंच नहीं है। वहीं, 80 फीसदी बच्चों को लगता है कि वे अपने साथियों की मदद से स्कूल में बेहतर सीखते हैं। सर्वेक्षण में यह भी बताया गया है कि भारत में 48 फीसदी छात्र पैदल ही स्कूल जाते हैं।
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