इन्वर्टिस के मेधावी छात्र वैभव सिंह बने आई.ए.एस
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बहुत समय बाद सबसे मिलकर उन्हें स्नेह प्राप्त हुआ। वैभव ने अपनी सफलता के बारे में बताते हुए सभी विद्यार्थियों के साथ अपना अनुभव साझा किया । स्नातक स्तर की पढ़ाई समाप्त करने के बाद अनेक सॉफ्टवेर कम्पनीज जैसे एच.सी.एल एवं कॉग्निजेंट मे काम किया। परंतु देश की सेवा करने की इच्छा उनमें हमेशा से ही रही इसी कारण जॉब छोड़ कर वह सिविल सर्विसेज की तैयारी में जुट गए, उनके इस फैसले में माता पिता के सिवा किसी ने उनका साथ नहीं दिया।
वैभव ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता पिता को दिया क्योंकि जीवन में सबसे महत्वपूर्ण माता पिता का ही साथ होता है। उन्होंने बताया की उनकी जिंदगी में हमेशा से यक्ष प्रश्न रहा था की जीवन से उन्हें क्या चाहिए ।
'देश की सेवा के लिए सिविल सर्विसेज जरूरी'
उन्होंने बताया की देश की सेवा के लिए सिविल सर्विसेज जरूरी है। उनका हमेशा से ही यह लक्ष्य था की देश की सेवा में वो भी अपनी भागीदारी दें। आई ए एस वैभव ने बताया की हमें अपने सपने बड़े रखने चाहिए और अपने सपने को उड़ान देना ही एक सच्चे इंसान की पहचान है ।
जब उन्होंने कॉलेज के दिनों के बारे में बताया तो उन्होंने कहा कि इन्वर्टिस में बिताया हर एक पल उनको याद है और उन लम्हों को भूल पाने का वो कभी सोच भी नहीं सकते। कैंटीन की मस्ती क्लास रूम की जमकर पढ़ाई और टीचर्स के द्वारा दी गई सजा का भी कुछ अलग ही मजा था । हमें लगता है की कॉलेज मे आकर क्लास बन्किंग और कॉलेज अफेयर्स ये सब मस्ती है पर ये सब समय की बर्बादी है।आईएएस वैभव के साथ उनके मित्र ऋषिपाल राणा भी उपस्थित रहे जो की पेटीएम में कार्यरत हैं।
इन्वर्टिस यूनिवर्सिटी के चांसलर डॉ. उमेश गौतम ने वैभव सिंह को आईएएस बनने पर शुभकामनाएं दीं और इन्वर्टिस में बिताए गए उनके सफर को साझा किया। उन्होंने आईएएस बनने के उनके दृढ़ संकल्प को सलाम करते हुए छात्रों को उनसे प्रेरणा लेने को कहा । इन्वर्टिस के टीचर्स से मिलने के बाद उन्होंने अपने पुराने दिनों को याद किया। साथ ही अपने टीचर्स डॉ मिनाक्षी वर्मा ,डीन इंजीनियरिंग डॉ आर के शुक्ला ,चीफ प्रॉक्टर डॉ जीतेन्द्र नाथ श्रीवास्तव से मिलकर उनका धन्यवाद दिया ।
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