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इन्वर्टिस विश्वविद्यालय के एम. बी. ए. छात्रों द्वारा लाइव परियोजना
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Updated Tue, 25 Sep 2018 05:06 PM IST
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इन्वर्टिस विश्वविद्यालय बरेली में स्थित प्रख्यात विश्वविद्यालयों में से एक है। यहां विद्यार्थियों के सम्पूर्ण विकास पर ध्यान दिया जाता है। उन्हें केवल चार दिवारों में सीमित रख कर किताबी ज्ञान ही नहीं दिया जाता, अपितु उन्हें प्रायोगिक शिक्षा भी दी जाती है। समय-समय पर उनसे प्रैक्टिकल प्रोजेक्ट्स अथवा लाइव प्रोजेक्ट्स भी कराये जाते हैं तथा ट्रेनिंग भी दी जाती है। इससे छात्रों को भविष्य में उनके द्वारा चुने गए कार्यक्षेत्र में प्राथमिकता व सफलता प्राप्त करना सहज हो सकता है । इसी प्रकार का एक सफल लाइव परियोजन बिग बाजार का है जो एम. बी. ए. छात्रों द्वारा प्रदर्शित किया गया। गत माह अगस्त में इन्वर्टिस विश्वविद्यालय के एम. बी. ए. के अठारह मेधावी छात्रों ने बिग बाजार फोनिक्स मॉल में अपना लाइव प्रोजेक्ट पूरा किया। यह प्रोजेक्ट 11 अगस्त से 16 अगस्त तक चला।
प्रोजेक्ट में योगदान देने वाले अठारह छात्रों में से पन्द्रह छात्र एम. बी. ए. प्रथम सेमेस्टर के थे जिनके नाम कुछ इस प्रकार है — पूजा बोहरा, संगम, रोजा मरियम, चारू गंगवार, दर्शिका शर्मा, प्रियंका गुप्ता, जय अग्रवाल, अनुराग शर्मा, किरण पाठक, वंशिका गंगवार, राम्नीत कपूर, गुलफाम खान, हर्षित गुप्ता, आकाश राठौर तथा अभिषेक गुप्ता। साथ ही एम.बी.ए. रिटेल तृतीय सेमेस्टर के आशीष सिंह, शिवांचल दिवेदी तथा ट्विंकल गुप्ता भी इसमें शामिल थे। इन सभी ने अपने कार्यों को सही समयसीमा पर पूरा किया। सभी कार्यों को छोटे-छोटे भागों में विभाजित कर उनका एक सटीक समयबद्ध क्रम प्रस्तुत किया जो उन छात्रों के कार्य कुशलता व बुद्धिमत्ता का परिचय देता है।
प्रोजेक्ट की सफलता से सभी छात्र प्रसन्नता के साथ एक दूसरे को बधाई देते हैं तथा विश्वविद्यालय के ओर से ऐसा अवसर देने के लिए आभार प्रकट करते हैं। छात्रों के अभिभावक (माता - पिता) भी बहुत हर्षित व गौरवान्वित महसूस करते हुए इन्वर्टिस के शिक्षकों को धन्यवाद देते हैं। कुलपति प्रोफेसर जगदीश राय ने छात्रों के कठिन मेहनत को सराहते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। एम. बी. ए. विभागाध्यक्ष प्रोफेसर शैलेश्र्वर घोष ने छात्रों व माता पिता को बधाई देते हुए कहा कि इन्वर्टिस में वे और उनके सभी कर्मचारी सदैव छात्रों को नये अवसर प्रदान करने में लगे रहते हैं ताकि वे अपना भविष्य संवार सकें।
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शिक्षा का उद्देश्य मनुष्य का सर्वांगीण विकास करना है। विकास के इस पथ पर प्रैक्टिकल अध्ययन की भूमिका अतुलनीय है। वैज्ञानिक शोध में यह साबित किया गया है कि प्रैक्टिकल अध्ययन मस्तिष्क व तंत्रिका तंत्र को अधिक सक्रिय बनाती है जिससे कोई भी बात या कथन बहुत जल्दी समझ आ जाती है। यही कारण है कि एक शिक्षित युवक से अधिक एक अनुभवी बुजुर्ग की सलाह मानना ज्यादा सही व सटीक होता है। यदि शिक्षा के साथ अनुभव का भी मिश्रण हो तो ऐसी स्थिति सोने पर सुहागा के समान है। इन्वर्टिस विश्ववविद्याल के छात्रों ने अपनी सूझ बूझ से इस कथन की पुष्टि की तथा सफलता के साथ पूरा किया।
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प्रोजेक्ट में योगदान देने वाले अठारह छात्रों में से पन्द्रह छात्र एम. बी. ए. प्रथम सेमेस्टर के थे जिनके नाम कुछ इस प्रकार है — पूजा बोहरा, संगम, रोजा मरियम, चारू गंगवार, दर्शिका शर्मा, प्रियंका गुप्ता, जय अग्रवाल, अनुराग शर्मा, किरण पाठक, वंशिका गंगवार, राम्नीत कपूर, गुलफाम खान, हर्षित गुप्ता, आकाश राठौर तथा अभिषेक गुप्ता। साथ ही एम.बी.ए. रिटेल तृतीय सेमेस्टर के आशीष सिंह, शिवांचल दिवेदी तथा ट्विंकल गुप्ता भी इसमें शामिल थे। इन सभी ने अपने कार्यों को सही समयसीमा पर पूरा किया। सभी कार्यों को छोटे-छोटे भागों में विभाजित कर उनका एक सटीक समयबद्ध क्रम प्रस्तुत किया जो उन छात्रों के कार्य कुशलता व बुद्धिमत्ता का परिचय देता है।
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प्रोजेक्ट की सफलता से सभी छात्र प्रसन्नता के साथ एक दूसरे को बधाई देते हैं तथा विश्वविद्यालय के ओर से ऐसा अवसर देने के लिए आभार प्रकट करते हैं। छात्रों के अभिभावक (माता - पिता) भी बहुत हर्षित व गौरवान्वित महसूस करते हुए इन्वर्टिस के शिक्षकों को धन्यवाद देते हैं। कुलपति प्रोफेसर जगदीश राय ने छात्रों के कठिन मेहनत को सराहते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। एम. बी. ए. विभागाध्यक्ष प्रोफेसर शैलेश्र्वर घोष ने छात्रों व माता पिता को बधाई देते हुए कहा कि इन्वर्टिस में वे और उनके सभी कर्मचारी सदैव छात्रों को नये अवसर प्रदान करने में लगे रहते हैं ताकि वे अपना भविष्य संवार सकें।
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शिक्षा का उद्देश्य मनुष्य का सर्वांगीण विकास करना है। विकास के इस पथ पर प्रैक्टिकल अध्ययन की भूमिका अतुलनीय है। वैज्ञानिक शोध में यह साबित किया गया है कि प्रैक्टिकल अध्ययन मस्तिष्क व तंत्रिका तंत्र को अधिक सक्रिय बनाती है जिससे कोई भी बात या कथन बहुत जल्दी समझ आ जाती है। यही कारण है कि एक शिक्षित युवक से अधिक एक अनुभवी बुजुर्ग की सलाह मानना ज्यादा सही व सटीक होता है। यदि शिक्षा के साथ अनुभव का भी मिश्रण हो तो ऐसी स्थिति सोने पर सुहागा के समान है। इन्वर्टिस विश्ववविद्याल के छात्रों ने अपनी सूझ बूझ से इस कथन की पुष्टि की तथा सफलता के साथ पूरा किया।
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