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सरकार ने तय की प्री-प्राइमरी से 12वीं तक के लिए ऑनलाइन पढ़ाई की समय सीमा

एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Wed, 15 Jul 2020 06:53 AM IST

सार

  • बारहवीं तक के लिए ऑनलाइन पढ़ाई की समय सीमा तय
  • मोबाइल, लैपटॉप पर पढ़ाई से स्क्रीन टाइम बढ़ने पर थी चिंता
  • मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने मंगलवार को ‘प्रज्ञता’ गाइडलाइन जारी की
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online class - फोटो : pixabay

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विस्तार

लॉकडाउन के चलते मोबाइल और लैपटॉप पर हो रही ऑनलाइन पढ़ाई से बच्चों का स्क्रीन टाइम बढ़ने से परेशान अभिभावकों की चिंता का सरकार ने निदान कर दिया है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने मंगलवार को ‘प्रज्ञता’ गाइडलाइन जारी की। इसके तहत प्री-प्राइमरी के बच्चों के लिए रोज 30 मिनट और 1 से 12वीं तक के बच्चों के लिए 30 से 45 मिनट के अधिकतम चार सत्रों की समय सीमा तय की गई है। स्कूलों को इन निर्देशों के आधार पर ही ऑनलाइन पढ़ाई करानी होगी।
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केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने मंगलवार को ‘प्रज्ञता’ गाइडलाइन जारी की। इसके मुताबिक नर्सरी और केजी के बच्चों को रोज अधिकतम 30 मिनट ही ऑनलाइन पढ़ाया जाएगा। पहली से 8वीं तक के बच्चों के 30 से 45 मिनट के दिन में दो सत्र हो सकेंगे।


वहीं 9वीं से 12वीं तक के लिए अधिकतम चार सत्र होंगे। सीबीएसई बोर्ड, केंद्रीय विद्यालय, नवोदय से लेकर सभी राज्यों को अपने-अपने राज्य शिक्षा बोर्ड के स्कूलों में इसी गाइडलाइन को लागू करना होगा। गौरतलब है कि सरकार ने कोरोना संकट देखते हुए देशभर के स्कूल कालेजों को 16 मार्च से बंद कर दिया था। हालांकि अब अनलॉक प्रक्रिया शुरू हो गई है लेकिन स्कूल-कालेज बंद हैं।

जानिए सभी वर्गों की समय सीमा
  • केजी-नर्सरी के लिए रोज सिर्फ 30 मिनट की क्लास
  • 1 से 8वीं तक के लिए 30 से 45 मिनट के दो सत्र
  • 9वीं से 12वीं के लिए 30 से 45 मिनट के चार सत्र
  • 24 करोड़ बच्चे हो रहे कोरोना संकट से प्रभावित

आठ बिंदुओं पर बनी गाइडलाइन
मंत्रालय ने आठ बिंदुओं पर गाइडलाइन तैयार की है। ये हैं योजना, समीक्षा, व्यवस्था, मार्गदर्शन, वार्ता, कार्य, निगरानी और सराहना।

बच्चों की सेहत का रखा ध्यान : निशंक
छात्रों, शिक्षकों, स्कूल प्रबंधन से लेकर अभिभावकों की दिक्कतों को ध्यान में रखकर गाइडलाइन बनाई गई है। इससे ऑनलाइन पढ़ाई सुरक्षित और सुचारू रहेगी। बच्चों के मूल्यांकन की जरूरत, पढाई अवधि, ऑनलाइन संतुलन, ऑफलाइन गतिविधि आदि को लेकर चिंताओं का समाधान किया गया है। शारीरिक, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े हर आयाम को ध्यान में रखा गया है। साइबर सुरक्षा पर भी जोर दिया गया है।
- रमेश पोखरियाल निशंक, मानव संसाधन विकास मंत्री
 
अभिभावकों की थी ये चिंता

अभिभावकों की सबसे बड़ी चिंता थी कि बच्चों को स्कूल की तरह सभी पीरियड ऑनलाइन पढ़ाए जा रहे हैं। इससे उनका मोबाइल और लैपटॉप के साथ स्क्रीन टाइम बढ़ रहा है। इसके चलते नजर कमजोर होने समेत कई शारीरिक मुश्किलों का खतरा बढ़ने की आशंका थी।

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