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हिन्दुस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट में शोध सम्मेलन, विशेषज्ञों ने दिए रिसर्च के लिए खास टिप्स

Mon, 20 Aug 2018 06:36 PM IST
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Updated Mon, 20 Aug 2018 06:36 PM IST
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hindustan college organized a Research seminar
शोध सम्मेलन - फोटो : अमर उजाला

मथुरा। शारदा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट्स के हिन्दुस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड कम्प्यूटर स्टडीज (फरह, मथुरा) के एमडीपी हॉल में शोध सम्मेलन 'नौंवी डॉक्टोरल कॉन्फ्रेंस' का आयोजन किया गया। सम्मेलन की शुरुआत प्रबंधन क्षेत्र में हो रहे शोध कार्यों पर पैनल डिस्कशन के साथ हुई। पैनल डिस्कशन में डॉक्टर नवीन गुप्ता, डॉक्टर राजेश कुमार, डॉक्टर संजीव स्वामी, डॉक्टर एसके शर्मा, डॉक्टर पीडी सैनी, डॉक्टर पूर्णिमा जैन और डॉक्टर आशिमा ने अपने विचार रखे।

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पैनल डिस्कशन के बाद कार्यक्रम में उपस्थित सभी गणमान्य प्रोफेसरों ने अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त एसआईएस जर्नल और संस्थान द्वारा मुद्रित जेएमडीआईटी जर्नल का विमोचन किया। प्रोफेसर नवीन गुप्ता (निदेशक-एचआईएमसीएस) ने बताया कि आज शैक्षणिक संस्थानों और औद्योगिक क्षेत्र में परस्पर समन्वय की जरूरत है।

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शोधा सम्मेलन के बारे में जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा मंच है, जहां शोधार्थी अपने-अपने क्षेत्र में दक्ष विशेषज्ञ प्रोफेसरों की मदद से शोध से जुड़ी समस्याओं का हल निकाल सकते है। उन्होंने इस बात पर खास जोर दिया कि आज जो शोध हो रहे हैं, उनमें व्यवहारिकता की कमी है। उन्होंने शोध करने वालों से अपील करते हुए कहा कि ऐसी रिसर्च करें जिससे समाज को कुछ लाभ मिल सके।

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शोध सम्मेलन में एक्सपर्ट के तौर पर उपस्थित प्रोफेसर राजेश कुमार (शारदा यूनिवर्सिटी, ग्रेटर नोएडा) ने कहा कि आज के दौर में बहुत से औद्योगिक संस्थान रिसर्च एंड डिवेलपमेंट सेल चला रहे हैं। इनमें जरूरत के हिसाब से विकास सुनिश्चित किया जा सकता है।


उन्होंने शोधार्थियों को सलाह देते हुए बताया कि उन्हें सबसे पहले रिसर्च गैप का पता लगाना चाहिए। इसके बाद लिटरेचर रिव्यू के माध्यम से शोध को नई दिशा देनी चाहिए। साथ अपने लिखे शोध कार्य को यूजीसी के जर्नल्स में प्रकाशित भी कराना चाहिए।

दयालबाग यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर संजीव स्वामी ने कहा कि शोध के दौरान अंतर्राष्ट्रीय समस्याओं की बजाय घरेलू समस्याओं पर ज्यादा ध्यान केंद्र किया जाना चाहिए। ऐसी दिक्कतें जो अपने आस-पास पेश आ रही हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि शोध कार्य समूह में किया जाना चाहिए, इससे अधिक लोगों को लाभ मिल सकेगा। प्रोफेसर संजीव स्वामी ने कहा कि आज के शोधार्थी को शोध की रेलेवेंस एवं स्ट्रैटिजिक इंटेंट के साथ कार्य को गति देनी चाहिए। उन्होंने शोध के दौरान सिद्धांत और ईमानदारी पर भी बल दिया।

सम्मेलन में प्रोफेसर पूर्णिमा जैन ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि अगर व्यक्ति की स्कूली शिक्षा एक मानक तक नहीं, तो वह उस मानक तक पहुंचने के लिए अपने आईक्यू को बढ़ाए। साथ नियमित सीखने की प्रवृति भी बेहद अहम है। सम्मेलन के समापन पर शोध क्षेत्र में अहम योगदान के लिए अवॉर्ड दिए गए, जो इस प्रकार हैं , आनंदी देवी पालीवाल अवॉर्ड, बेस्ट रिसर्च मैथडोलॉजी अवॉर्ड, श्री लक्ष्मी नारायण गंगल अवॉर्ड और प्रोफेसर केपी जैन अवॉर्ड।

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