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Hijab Controversy: हिजाब वाली छात्राओं को वापस भेजने पर प्रिंसिपल को जान से मारने की धमकी, 58 निलंबित, 15 पर एफआईआर

Sun, 20 Feb 2022 03:45 PM IST
देवेश शर्मा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: देवेश शर्मा Updated Sun, 20 Feb 2022 03:45 PM IST
सार

Karnataka Hijab Row Updates: कर्नाटक पुलिस ने तुमकुर में गर्ल्स एम्प्रेस गवर्नमेंट पीयू कॉलेज के बाहर प्रदर्शन करने वाली करीब 10 छात्राओं के खिलाफ एआईआर दर्ज की है। इन छात्राओं पर निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने का आरोप है।

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Hijab Row Controversy updates FIR filed against 10 girls in Karnataka over protest
Hijab Row Controversy Updates - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

Hijab Row Updates: कर्नाटक में हिजाब विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। हिजाब वाली छात्राओं को कॉलेज में प्रवेश नहीं देने और घर वापस भेजने को पर एक जूनियर कॉलेज प्रिंसिपल को जान से मारने की धमकी दी गई है। मदिकेरी जिला पुलिस ने इस मामले में प्रिंसिपल विजय की शिकायत पर मोहम्मद तौसीफ नामक युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच भी शुरू कर दी है।

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उधर, पुलिस और प्रशासन ने हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश और प्रशासनिक समझाइश के बावजूद धरना-प्रदर्शन करने माहौल खराब करने वालों पर भी सख्ती शुरू कर दी है। जहां, तुमकुर में गुरुवार को प्रदर्शन में शामिल 15 छात्राओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। वहीं, शिवमोग्गा जिले में एक प्री यूनिवर्सिटी कॉलेज की 58 छात्राओं को विरोध-प्रदर्शन करने के कारण निलंबित कर दिया गया है। 
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कर्नाटक पुलिस ने हिजाब को लेकर पारित अंतरिम आदेश और सीआरपीसी की धारा-144 के तहत जारी निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने के आरोप में शनिवार को कम से कम 10 लड़कियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 143, 145, 188 और 149 के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। छात्राओं ने तुमकुर में गर्ल्स एम्प्रेस गवर्नमेंट पीयू कॉलेज के बाहर गुरुवार, 17 फरवरी को प्रदर्शन किया था। इन छात्राओं पर निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया है। 
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पूर्व मुख्यमंत्री ने शांति अपील को बताया ड्रामा
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने मामले पर कहा कि ड्रेस कोड को कक्षाओं के सत्र की शुरुआत में लाना चाहिए था। जनवरी और फरवरी के बीच इसे जानबूझकर लागू किया जा रहा है। भाजपा की साजिश मुस्लिम लड़कियों को शिक्षा से दूर रखना है। सिद्धारमैया ने सरकार की ओर से शांति बनाए रखने की अपील को भी ड्रामा बताया। उन्होंने कहा कि सरकार इस विवाद को सुलझा सकती थी। जब छात्र पगड़ी पहन सकते हैं तो हिजाब में क्या दिक्कत है? लड़कियां काफी पहले से हिजाब पहन रही थी, तब शांति भंग होने का कोई भी मामला नहीं था। 

दक्षिण कन्नड़ जिले में स्कूल कॉलेजों के आसपास प्रतिबंध 26 तक बढ़ा
हालात को देखते हुए दक्षिण कन्नड़ जिला प्रशासन ने स्कूल व कॉलेजों के आस पास लगाए गए प्रतिबंध को 26 फरवरी तक बढ़ा दिया है। उपायुक्त केवी राजेंद्र ने कहा, हिजाब विवाद के तनाव को देखते हुए शनिवार शाम 6 बजे से 26 फरवरी शाम 6 बजे तक स्कूल कॉलेज के 200 मीटर के दायरे में प्रतिबंध लागू रहेंगे।

बाहरी लोग विवाद भड़का रहे: बोम्मई
मुख्यमंत्री बसावराज बोम्मई ने कहा, यह सारा विवाद बाहरी लोग भड़का रहे हैं। प्रधानाचार्य, छात्राओं और उनके अभिभावकों द्वारा इस मुद्दे का समाधान निकाल सकते हैं। इसके लिए जरूरी है कि माहौल शांत रखा जाए। मगर कुछ लोग ऐसा होने नहीं दे रहे। 

छात्राओं ने रोक के बावजूद किया था प्रदर्शन

हिजाब विवाद को लेकर कर्नाटक उच्च न्यायालय में सुनवाई अभी लंबित है और अंतरिम आदेश के अनुसार, कक्षाओं में छात्र-छात्राओं के हिजाब, बुर्का और भगवा गमछे आदि पहनने पर रोक लगी है। इसके बावजूद कई छात्राएं लगातार हिजाब पहनने पर अड़ी हुई हैं। गुरुवार को भी जब छात्राओं को हाईकोर्ट के आदेशानुसार हिजाब नहीं उतारने पर कक्षाओं में प्रवेश नहीं दिया गया तो छात्राएं प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज के बाहर ही धरने पर बैठ गई और रोक के बावजूद प्रदर्शन व नारेबाजी शुरू कर दी थी।
 

हाईकोर्ट में दलील- हिजाब इस्लाम में अनिवार्य नहीं

वहीं, कर्नाटक उच्च न्यायालय में शुक्रवार को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने दलील दी कि हिजाब इस्लाम की आवश्यक धार्मिक प्रथा यानी अनिवार्य नहीं है और इसके उपयोग को रोकना भारतीय संविधान के अनुच्छेद-25, जोकि धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देता है, का उल्लंघन नहीं करता है। वहीं, मुस्लिम लड़कियों की ओर से पेश वकील विनोद कुलकर्णी ने याचिका में कहा है कि हिजाब पर प्रतिबंध पवित्र कुरान पर प्रतिबंध लगाने जैसा है।  
 

अल्पसंख्यक विभाग ने जारी किया था सर्कुलर

कर्नाटक उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए स्कूल-कॉलेज के अधिकारी परिसर में प्रवेश देने से पहले ही सभी छात्र-छात्राओं से हिजाब, बुर्का और भगवा गमछे आदि उतरवा रहे हैं। शिक्षक भी दायरे में शामिल हैं। हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश तब तक प्रभावी रहेगा जब तक अदालत हिजाब प्रतिबंध के खिलाफ दायर याचिकाओं पर अपना अंतिम फैसला नहीं सुनाती। इस बीच, गुरुवार, 17 फरवरी को राज्य अल्पसख्ंयक कल्याण विभाग की ओर से भी हिजाब सहित अन्य धार्मिक वस्त्रों और प्रतीक चिह्नों को कक्षाओं में पहनने पर रोक लगा दी गई थी। 

रूढ़िवादी सोच से ऊपर उठे मुस्लिम समाज
संघ से जुड़े मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने शनिवार को अल्पसंख्यक समुदाय से रूढ़िवादी सोच से ऊपर उठने और प्रगतिशील विचारों को अपनाने की अपील की। मंच के राष्ट्रीय समन्वयक और प्रवक्ता शाहिद सईद ने कहा, हिजाब पहनने की तुलना में इसकी प्रगति के लिए शिक्षा अधिक महत्वपूर्ण है। भारत में सबसे अधिक 43 फीसदी असाक्षरता दर मुसिलमों में है। इसी के कारण सबसे अधिक बेरोजगारी भी इसी समुदाय में है। ऐसे में जरूरी है कि हिजाब पहनने जैसी मान्यताओं को तरजीह देने के बजाय शिक्षा को महत्व दिया जाए। आपको किताब की जरूरत अधिक है।

हिजाब मुद्दे पर कांग्रेस में दो फाड़
कर्नाटक के राजस्व मंत्री आर अशोक ने शनिवार को कहा, हिजाब मुद्दे पर कांग्रेस पार्टी में दो फाड़ है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार इस मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष व पूर्व सीएम सिद्धरमैया का समर्थन नहीं कर रहे। शिवकुमार कांग्रेस नेताओं को खुलकर यह जाहिर नहीं करने दे रहे कि वे हिजाब के पक्ष में हैं, जबकि सिद्धरमैया इस मुद्दे पर अलग रुख रखते हैं। कांग्रेस इस मुद्दे को विधानसभा में उठाने के लिए फिलहाल तैयार नहीं है। 

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