फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
Hindi News ›   Education ›   Hijab Controversy SC asks about authentic figure on dropout of students Adv Ahmadi Claimed 17000

Hijab Controversy: हिजाब मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पूछी ड्रॉपआउट की संख्या, वकील बोले- 17 हजार ने छोड़ी पढ़ाई

Wed, 14 Sep 2022 10:13 PM IST
देवेश शर्मा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: देवेश शर्मा Updated Wed, 14 Sep 2022 10:13 PM IST
सार

Karnataka Hijab Controversy: इस पर याचिकाकर्ताओं में से एक अधिवक्ता ने दावा किया कि हाईकोर्ट के फैसले के बाद 17 हजार छात्र-छात्राओं के पढ़ाई छोड़ने की जानकारी सामने आई है।

विज्ञापन
Hijab Controversy SC asks about authentic figure on dropout of students Adv Ahmadi Claimed 17000
Karnataka Hijab Controversy - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

Karnataka Hijab Controversy: कर्नाटक के शैक्षणिक संस्थानों में जारी हिजाब विवाद को लेकर बुधवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि क्या हिजाब प्रतिबंध और इस मुद्दे पर उच्च न्यायालय के बाद के फैसले के कारण कर्नाटक में शैक्षणिक संस्थानों से छात्रों को छोड़ने के संबंध में कोई प्रामाणिक आंकड़ा है? इस पर याचिकाकर्ताओं में से एक अधिवक्ता ने दावा किया कि हाईकोर्ट के फैसले के बाद 17 हजार छात्र-छात्राओं के पढ़ाई छोड़ने की जानकारी सामने आई है। 

विज्ञापन

कोर्ट ने मांगी थी ड्रॉपआउट की प्रामाणिक संख्या

सुनवाई के दौरान जब याचिकाकर्ताओं में से एक ने छात्रों, विशेषकर लड़कियों के स्कूल छोड़ने का मुद्दा उठाया। जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस सुधांशु धूलिया की पीठ ने वकील के पेश होने के बाद पूछा, क्या आपके पास वे प्रामाणिक आंकड़े हैं कि इस हिजाब प्रतिबंध और उच्च न्यायालय के बाद के फैसले के कारण 20, 30, 40 या 50 छात्र ड्रॉपआउट हो गए हैं? इस पर याचिकाकर्ताओं में से एक का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी ने एक रिपोर्ट का हवाला दिया और कहा कि इसमें कई छात्रों की जानकारी है। अहमदी ने दावा किया कि मेरे दोस्त ने मुझे सूचित किया कि इस विशेष फैसले के बाद 17,000 छात्र-छात्राओं ने वास्तव में परीक्षा छोड़ दी थी। 

विज्ञापन

हिजाब पहनकर स्कूल जाने पर आपत्ति क्यों?

अहमदी ने कहा कि इस मामले में सरकारी आदेश का असर यह होगा कि जो लड़कियां पहले स्कूलों में जाकर सेक्युलर शिक्षा ले रही थीं, उन्हें मदरसों में वापस जाने के लिए मजबूर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसी को ऐसा क्यों महसूस होना चाहिए कि एक धार्मिक क्रिया किसी भी तरह से कानूनन या धर्मनिरपेक्ष शिक्षा या एकता में बाधा डालेगी? अगर कोई हिजाब पहनकर स्कूल जाती है तो उससे किसी को क्यों आपत्ति होनी चाहिए? अन्य छात्रों को समस्या क्यों होनी चाहिए?
 

अखबारों में जो लिखा है, कोर्ट उस पर नहीं चलता

वहीं, अन्य याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन ने तर्क दिया कि इस मामले का एक सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यह है कि हिजाब पहनने वाले व्यक्ति के साथ धर्म और लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा, इस मामले के महत्वपूर्ण होने का कारण यह है कि जब यह फैसला किया गया था, तो हेडलाइंस यह नहीं थे कि ड्रेस कोड को बरकरार रखा गया, हेडलाइंस थे कि कर्नाटक उच्च न्यायालय ने हिजाब को प्रतिबंधित कर दिया। इस पर पीठ ने कहा कि अखबारों में जो लिखा है, कोर्ट उस पर नहीं चलता।

विज्ञापन
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें शिक्षा समाचार आदि से संबंधित ब्रेकिंग अपडेट।

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed