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मातृ दिवस: एना जार्विस ने 'ममता-त्याग' को समर्पित किया था यह दिन, फिर क्यों चलाया इसे खत्म करने का अभियान

Sun, 09 May 2021 09:58 AM IST
वर्तिका तोलानी एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: वर्तिका तोलानी Updated Sun, 09 May 2021 09:58 AM IST
सार

अपनी मां की इच्छाओं को पूरा करने के लिए साल में एक दिन जरूर समर्पित करने, उनकी अतुलनीय सेवाओं के लिए उनका सम्मान करने के विचार से शुरू हुआ मातृ दिवस।

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Happy Mothers Day: Who started mothers day? why mothers celebrated on second sunday of may?
मातृ दिवस: एना जार्विस - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

प्रत्येक वर्ष मई माह के दूसरे रविवार को भारत में मातृ दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर कुछ लोग अपनी जिन्दगी में मां या मां का किरदार अदा करने वाली महिलाओं को उनके त्याग और समर्पण के लिए शुक्रिया अदा करते हैं। वहीं कुछ अपनी मां के लिए सरप्राइज पार्टी रखता हैं, तो कुछ भेट स्वरूप महंगे-महंगे तोहफे देते हैं। लेकिन क्या आपको पता हैं कि इस दिन की शुरुआत कैसे हुई और इसे शुरू करने के पीछे का क्या मकसद था? आइए जानते हैं...

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सौ साल पहले हुई थी मातृ दिवस की शुरुआत
तकरीबन 100 साल पहले की बात है। एना जार्विस की मां, एन रीव्स जार्विस ने अपना सम्पूर्ण जीवन अन्य महिलाओं को यह समझाने में बिता दिया कि उन्हें कैसे अपने बच्चों का पालन-पोषण करना चाहिए। साल के 365 दिन अपने बच्चों की ख्वाहिशों को पूरा करने वाली इन मांओं को देखकर एन रीव्स ने कहा, मुझे उम्मीद है, और मैं इसके लिए प्रार्थना भी करती हूं कि कभी कोई अपनी मां की इच्छाओं को पूरा करने के लिए साल में एक दिन जरूर समर्पित करेगा। उनकी अतुलनीय सेवाओं के लिए उनका सम्मान किया जाएगा।

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इस वजह से लिया मातृ दिवस मनाने का संकल्प 
गौरतलब है कि एन रीव्स के नौ बच्चों की मौत हो गई थी। जिसमें से पांच बच्चों का निधन किसी-न-किसी बीमारी की चलते हुआ था। इसलिए एन रीव्स जार्विस मातृ दिवस नामक नेटवर्क चलाती थीं। इसका मुख्य उद्देश्य ऊंची शिशु मृत्यु दर और बाल मृत्यु दर को कम करना था। एन रीव्स इस नेटवर्क के जरिए महिलाओं को साफ-सफाई से जुड़ी अहम बातें बताती थीं। जैसे पानी को उबालकर पीने के फायदे, आस-पास सफाई रखने का लाभ आदि। लेकिन साल 1905 में एन रीव्स जार्विस का निधन हो गया। दुख की इस घड़ी में एना ने अपनी मां के सपना को पूरा करने की कसम खाली।

इस वजह से मई माह के दूसरे रविवार को मनाया जाता है मातृ दिवस
साल में एक दिन जब हम अपनी मां द्वारा किए गए त्याग को याद करके उनकी सराहना करें। एना ने अपने इस विचार को चारों तरफ फैलाना शुरू किया। इसके लिए एना ने मई के दूसरे रविवार का दिन चुना। क्योंकि ये दिन उनकी मां एन रीव्स की पुण्यतिथि यानी 9 मई के करीब पड़ता था। एन रीव्स की मृत्यु के तीन साल बाद यानी 1908 में ग्रेफट्न के एंड्रयूज मेथॉडिस्ट चर्च में पहली बाद मातृ दिवस का आयोजन किया गया। एना के यह कार्यक्रम विदेशों में भी तेजी के साथ बढ़ने लगी। 1910 में ये वेस्ट वर्जिनिया स्टेट और साल 1914 में राष्ट्रपति वुड्रो विल्सन ने अमेरिका का राजकीय दिवस बन गया।

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मातृ दिवस को खत्म करने के लिए चलाया अभियान
एना जार्विस के इस अभियान की सफलता के पीछे सबसे बड़ी वजह इसका व्यावसायिक पक्ष था। एक स्थानीय अखबार फिलेडेल्फिया इनक्वायरर की खबर के मुताबिक मातृ दिवस के मौके पर मांओं को भेट देने के लिए कार्नेशन फूल, ग्रीटिंग कार्ड, टॉफी-चॉकलेट की कमी पड़ने लगी थी। लेकिन एना इस दिन के व्यवसायीकरण के बिल्कुल खिलाफ थी, इसलिए उन्होंने मई का दूसरा रविवार मदर्स डे के नाम से कॉपीराइट भी करवा लिया। अखबार न्यूजवीक के एक आर्टिकल के अनुसार, वर्ष 1944 तक एना के 33 कानूनी मामले लंबित थे। व्यावसायीकरणा के खिलाफ उन्होंने 80 साल की उम्र तक लड़ाई लड़ी थी। आखिर में थक-हार कर उन्होंने इस दिन को ही खत्म करने का निर्णय लिया। इन दिन को खत्म किए जाने की दरख्वास्त वाले कागजों पर उन्होंने लोगों के घर-घर जाकर कागजों पर दस्तखत भी करवाए थे। लेकिन एक दिन अचानक हृदयाघात से उनकी मृत्यु हो गई। 

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