इस कॉलेज को मिली 100 सीटों की मान्यता, नीट से काउंसलिंग के बाद होगी भर्ती
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कासना स्थित गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस (राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान) को मेडिकल कॉलेज के लिए 100 सीटों की मान्यता मिल गई है। 20 मई को मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने संस्थान के निदेशक को सूचना दी। ऑल इंडिया नीट के माध्यम से उत्तीर्ण छात्र 15 जून को काउंसलिंग में सीट का चयन कर सकते हैं, जिसके बाद दाखिले शुरू होंगे। एक अगस्त से वर्ष 2019- 20 सत्र का शिक्षण कार्य प्रारंभ होगा। ब्रिगेडियर डॉ. राकेश कुमार गुप्ता ने प्रेस वार्ता में यह जानकारी दी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए यह 300 बेड के मेडिकल कॉलेज का सपना पूरा होने जैसा है। मेडिकल कॉलेज की पढ़ाई गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में होगी। पूर्व में जीबीयू परिसर में ही मेडिकल कॉलेज के लिए भूमि दी गई थी लेकिन निर्माण नहीं हो सका। शासन के कहने पर बौद्ध दर्शन विभाग की इमारत में जगह दी गई। हाल ही में शासन ने की टीम ने दौरा कर भूमि का निरीक्षण किया है। आने वाले वर्षों में शिक्षण के लिए इमारत तैयार होगी।
मायावती ने रखी थी आधारशिला
13 मई 2008 में पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने अस्पताल की आधारशिला रखी थी। इसका नाम ‘मान्यवर कांशीराम मल्टी स्पेशिएलिटी अस्पताल’ रखा गया था। 4 दिसंबर 2012 में अस्पताल बनकर तैयार हुआ। डेपुटेशन पर 17 डॉक्टरों की टीम के साथ ओपीडी सेवा शुरू की गई, लेकिन बसपा सरकार जाने के बाद मेडिकल कॉलेज का सपना सात वर्ष पीछे चला गया। 15 फरवरी 2016 को इसका नाम राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान रखा गया। इसे संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट लखनऊ से संबद्ध कर इंडोर अस्पताल भी शुरू कर दिया गया।
योगी सरकार में मिली अनुमति
हालांकि, वर्ष 2014 से लगातार पांच वर्षों से मेडिकल कॉलेज के लिए एमसीआई को आवेदन किया जा रहा। प्रत्येक छह माह में टीम आई। दसवीं बार में एमसीआई ने हरी झंडी दिखाई है। बसपा, सपा के बाद 2017 में भाजपा सरकार आने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 100 सीटों के लिए मेडिकल कॉलेज की घोषणा कर बजट तय किया। 21 मई 2018 में मौजूदा ब्रिगेडियर डॉ. राकेश कुमार गुप्ता निदेशक बने और सारे कार्य पूर्ण कराए।
सरकार को नहीं देनी पड़ी अंडरटेकिंग
एमसीआई ने मेडिकल कॉलेज के लिए पूर्ण रूप से स्वीकृति दे दी है। सारे मानक पूरे होने के चलते सरकार को अंडर टेकिंग नहीं देनी पड़ी है। जबकि प्रदेश में कुल सात सरकारी संस्थानों ने मेडिकल कॉलेज के लिए आवेदन किया था। लेकिन अभी मान्यता केवल ग्रेनो को ही मिली है। जरूरी मान्यता के लिए 60 विशेषज्ञ डॉक्टर और फैकल्टी को नियुक्त किया गया है। जबकि 18 सीनियर रेजिडेंट, 42 जूनियर रेजिडेंट की नियुक्ति हो गई है। वहीं, जीबीयू में मेडिकल कॉलेज के लिए आठ विभाग, लाइब्रेरी, लैब, क्लासरूम और जरूरी मेडिकल उपकरण तैयार हैं। बस विद्यार्थियों का इंतजार है।
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