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कुलपति नियुक्ति पर विवाद: डीएमके नेता का आरोप- केंद्र सरकार कर रही आग में घी डालने का काम

Tue, 26 Apr 2022 03:57 PM IST
सुभाष कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: सुभाष कुमार Updated Tue, 26 Apr 2022 03:57 PM IST
सार

तमिलनाडु सरकार ने सोमवार, 25 अप्रैल, 2022 को राज्य विधानसभा में बिल को पास कराया था। इस बिल के प्रावधानों के अनुसार अब राज्य के विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति का अधिकार राज्यपाल से छीन लिया गया है।

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dmk leader saidt that constitution is under constant attack by union govt & adding fuel to the fire
DMK Leader A Saravanan - फोटो : ANI

विस्तार

तमिलनाडु सरकार द्वारा राज्यपाल से विश्वविद्यालयों में कुलपति की नियुक्ति के अधिकार को वापस लेने के मामले में बयानबाजी का दौर जारी है। अब राज्य में सत्ताधारी दल डीएमके के नेता ए सरावनन ने भी मामले पर बयान दिया है। उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि हम ऐसे समय में हैं जहां केंद्र सरकार की ओर से संविधान की विशेषताओं पर लगातार हमले हो रहे हैं। केंद्र सरकार आग में घी डालने का काम कर रही है और राज्यपाल भी केंद्र सरकार की नीतियों का ही अनुसरण कर रहे हैं।

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राज्यपाल अपने अधिकार से बाहर बोल रहे
डीएमके नेता ने आगे कहा कि राज्यपाल अपने अधिकार से बाहर बोल रहे हैं। उन्हें राष्ट्रीय शिक्षा समाज के बारे में बात नहीं करनी चाहिए। दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि राज्यपाल ऐसा कर रहे हैं। राज्यपाल को तमिलनाडु के लोगों के बिल को प्रतिबिंबित करना चाहिए। तमिलनाडु के लोगों के हितों की बात करनी चाहिए, न कि कुछ विधायकों की। 
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शिक्षा का विकेंद्रीकरण होना जरूरी
डीएमके के नेता ए सरावनन ने आगे कहा कि शिक्षा का विकेंद्रीकरण होना जरूरी है। जो लोग तमिलनाडु की स्थितियों से अवगत नहीं है, वह राज्य में कभी नहीं बस सकते। यह बहुत दुखद है कि वे भाजपा से डरे हुए हैं। एआईएडीएके पार्टी भी विधानसभा के भीतर इन नेताओं के व्यवहार से निराश हैं। 
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क्या है मामला?
तमिलनाडु सरकार ने सोमवार, 25 अप्रैल, 2022 को राज्य विधानसभा में बिल को पास कराया था। इस बिल के प्रावधानों के अनुसार अब राज्य के विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति का अधिकार राज्यपाल से छीन लिया गया है। अब उनकी नियुक्ति राज्य सरकारी ही करेगी। सीएम स्टालिन ने सरकार के फैसले का बचाव करते हुए कहा था कि पीएम मोदी के गृह राज्य गुजरात में भी, कुलपतियों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा नहीं बल्कि राज्य सरकार द्वारा ही की जाती है। 

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