Minority Scholarship Scam: अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति घोटाले में सीबीआई ने दर्ज किया केस, जानें क्या है मामला
CBI: केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 144 करोड़ रुपये के अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति घोटाले में अज्ञात अधिकारियों, नोडल अधिकारियों और पीएसयू बैंक कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। शिकायत अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने दर्ज कराई है।
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CBI Minority Scholarship Scam: केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 144 करोड़ रुपये के अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति घोटाले में अज्ञात अधिकारियों, नोडल अधिकारियों और पीएसयू बैंक कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। शिकायत अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने दर्ज कराई है। सीबीआई द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के अनुसार, अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति के वितरण के संबंध में अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ 144.33 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का मामला उजागर किया है।
एफआईआर आईपीसी की धारा 120 बी, आरडब्ल्यू 420, 468, और 461 और पीसी अधिनियम 1988 की धारा 13 (2), 13 (1) (सी), और (डी) के तहत दर्ज की गई है। आरोपों में आपराधिक साजिश,धोखाधड़ी , जालसाजी, जाली दस्तावेजों को असली के रूप में उपयोग करना, और आपराधिक कदाचार शामिल है।
संदिग्ध आरोपियों में सरकार के अनाम अधिकारी, कई पीएसयू बैंकों के अधिकारी और 18 राज्यों में स्थित 830 विभिन्न संस्थानों के नोडल अधिकारी शामिल हैं। शिकायत में कहा गया है कि पिछले 5 वर्षों से, वर्ष 2017-22 के बीच, लगभग 65 लाख छात्रों को केंद्र सरकार से 3 अलग-अलग योजनाओं प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति, पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति और मेरिट-कम मीन्स के तहत हर साल छह अल्पसंख्यक समुदायों यानी मुस्लिम, ईसाई, सिख, जैन, बौद्ध और पारसियों के छात्रों के लिए अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति मिलती है।
ये सभी छात्रवृत्तियां डीबीटी योजनाएं हैं, जहां छात्रों को सीधे उनके बैंक खातों में धनराशि प्राप्त होती है। फंड गबन की रिपोर्टों को दोबारा जांचने के बाद, मंत्रालय ने छात्रवृत्ति योजना के तीसरे पक्ष के मूल्यांकन को पूरा करने के लिए नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (एनसीएईआर) को नियुक्त किया है। संदिग्ध संस्थानों और आवेदनों को चिह्नित करने के लिए राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल के माध्यम से एक मूल्यांकन भी किया गया था। मूल्यांकन के आधार पर कुल 830 संस्थान फर्जी, आंशिक रूप से फर्जी या निष्क्रिय पाए गए।
इस घोटाले में सरकारी खजाने को कुल 144.33 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान लगाया गया है। मंत्रालय ने एफआईआर में कहा है कि ऐसी संभावना है कि जालसाजी और इस प्रकार, छात्रवृत्ति का फर्जी गबन 2017 से पहले से चल रहा है। हालांकि, 2017 और 2022 के बीच वितरित छात्रवृत्ति के लिए डिजिटल रूप से सत्यापित डेटा एकत्र किया जा सकता है।
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