बच्चों को Engineer बनाना खतरे से खाली नहीं, ये हैं प्रमुख कारण
एक समय में डॉक्टर, आईएस, आईपीएस, पीसीएस के साथ 12वीं के बाद बच्चों को इंजीनियर बनाना हर मां-बाप की उम्मीद हुआ करती थी। लेकिन आज के समय में अगर बच्चे को इंजीनियर की पढ़ाई कराई जाती है तो उसको कोर्स खत्म करने के बाद बढ़िया नौकरी मिले, इस बात की गारंटी नहीं है। देश भर में जितने इंजीनियर्स इस वक्त बेरोजगार हैं, उतने और किसी पेशे में फिलहाल नहीं है। विश्व की जानी मानी कंसलटिंग फर्म केपीएमजी, मैकेंजी और Aspiring Minds ने अपनी अलग-अलग रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया है।
ये हैं प्रमुख कारण
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई कंपनियों में ऑटोमेशन और नई तकनीकों के ज्यादा इस्तेमाल से अब बच्चों को इंजीनियरिंग की पढ़ाई कराना फायदे का सौदा नहीं रहा है। कंपनियां जहां पहले से मौजूद अपने कर्मचारियों को निकाल रही हैं। यह छंटनी केवल सॉफ्टवेयर (आईटी) ब्रांच मे ही नहीं, बल्कि सिविल, इलेक्ट्रोनिक्स और मेकेनिकल ब्रांच में भी देखने को मिल रही है।
केवल आईआईटी से पास ऑउट बच्चों को मिल रही है जॉब
रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनियां केवल उन्हीं बच्चों को जॉब देने में प्राथमिकता दिखा रही हैं, जिन्होंने अपनी पढ़ाई आईआईटी या फिर इसके समकक्ष संस्थान से की हुई है। इसके अलावा कंपनियां उन इंजीनियरिंग ग्रैजुएट्स को नहीं ले रही हैं, जिन्होंने अन्य कॉलेजों या फिर आईटीआई से डिप्लोमा किया हुआ है। ऐसे कॉलेज और आईटीआई की संख्या देशभर में सबसे ज्यादा है, जिनसे पास आउट हुए 60 फीसदी से अधिक बच्चे बेरोजगार हैं।
15 फीसदी कोर्सेस को मिली है एनबीए से मान्यता
रिपोर्ट के मुताबिक, देश भर में मौजूद 3200 कॉलेजों में से केवल 15 फीसदी इंजीनियरिंग कोर्सेस को एनबीए से मान्यता मिली हुई है।
बच्चों को नहीं आता है सही से कोडिंग करना
रिपोर्ट के मुताबिक 95 फीसदी इंजीनियरिंग छात्रों को ठीक तरीके से कोडिंग करना भी नहीं पता है। कंपनियां जब कॉलेजों में कैंपस प्लेसमेंट के लिए जाती हैं तो ज्यादातर बच्चों को बेसिक जानकारी भी नहीं पता थी, जिसकी वजह से कंपनियां अब कैंपस प्लेसमेंट करने से भी कतराने लगी हैं।
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