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वाई-फाई हुआ पुराना लाई-फाई का है जमाना
एजुकेशन डेस्क/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 13 Nov 2014 12:58 PM IST
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वायरलेस संचार प्रणाली यानी वाई-फाई और सेल्युलर कम्युनिकेशन से सभी परिचित ही हैं। जल्द ही संचार के इन माध्यमों का स्थान लाई-फाई (Li-Fi) प्रणाली लेने वाली है। प्रकाशीय संचरण पर आधारित लाई-फाई प्रणाली का प्रयोग जापान, कोरिया और जर्मनी में हो रहा है।
युवा वैज्ञानिक यह 5जी तकनीक जल्द भारत में लाना चाहते हैं। आगरा के एमडी जैन इंटर कालेज में मंडलस्तरीय 42वीं जवाहर लाल नेहरू विज्ञान, गणित और पर्यावरण प्रदर्शनी के दौरान कालेज के ही छात्र ब्रजेश कुमार ने लाई-फाई प्रणाली पर मॉडल प्रस्तुत किया।
लाई-फाई प्रणाली को लेकर उत्साहित ब्रजेश ने कहा कि यह साइबर वर्ल्ड की नई पीढ़ी है। उन्होंने कहा कि विजुअल लाइट कम्युनिकेशन पर आधारित लाई-फाई रेडियो कम्युनिकेशन का विकल्प है। जैसा कि लगातार आगाह किया जाता है मोबाइल और अन्य कम्युनिकेशन डिवाइस से निकली रेडियो तरंग मानव शरीर के लिए हानिकारक हैं। लाई-फाई एक प्रकाश के सिद्धांत पर आधारित है जिसे हम एलईडी के जरिए प्रयोग करेंगे।
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हैकिंग का खतरा नहीं
प्रकाश दीवार के आरपार नहीं जा सकता इसलिए लाई-फाई में हैंकिंग का खतरा नहीं है। वाई-फाई की तुलना में लाई-फाई इंटरनेट के लिए कई गुना अधिक स्पीड देगी। कक्षा 12 के छात्र ब्रजेश का सॉफ्टवेयर इंजीनियर बन इस क्षेत्र में काम करना चाहते हैं। प्रदर्श में उनके सहयोगी छात्र सजल गौड़ और अंशू चौहान रहे।
लाई-फाई (Li-Fi) का सफर
इडिनबर्ग यूनिवर्सिटी के प्रो. हेराल्ड हास ने 2011 में सबसे पहले लाई-फाई शब्द का प्रयोग किया।
विजुअल लाइट कम्युनिकेशन तकनीक को 2012 में लाई-फाई का प्रयोग कर प्रदर्शित किया गया।
अगस्त 2013 में इसके प्रयोग से इक रंग की एलईडी द्वारा 1.6 जीबीपीएस डाटा ट्रांसफर का प्रयोग।
अक्तूबर 2013 में चाइनीज कंपनी द्वारा लाई-फाई तकनीक पर काम करने की सूचना जारी की गई।
अप्रैल 2014 में रसियन कंपनी स्टिन कॉमन्स का 1.25 से 5 जीबीपीएस तक डाटा ट्रांसफर प्रयोग।
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युवा वैज्ञानिक यह 5जी तकनीक जल्द भारत में लाना चाहते हैं। आगरा के एमडी जैन इंटर कालेज में मंडलस्तरीय 42वीं जवाहर लाल नेहरू विज्ञान, गणित और पर्यावरण प्रदर्शनी के दौरान कालेज के ही छात्र ब्रजेश कुमार ने लाई-फाई प्रणाली पर मॉडल प्रस्तुत किया।
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लाई-फाई प्रणाली को लेकर उत्साहित ब्रजेश ने कहा कि यह साइबर वर्ल्ड की नई पीढ़ी है। उन्होंने कहा कि विजुअल लाइट कम्युनिकेशन पर आधारित लाई-फाई रेडियो कम्युनिकेशन का विकल्प है। जैसा कि लगातार आगाह किया जाता है मोबाइल और अन्य कम्युनिकेशन डिवाइस से निकली रेडियो तरंग मानव शरीर के लिए हानिकारक हैं। लाई-फाई एक प्रकाश के सिद्धांत पर आधारित है जिसे हम एलईडी के जरिए प्रयोग करेंगे।
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हैकिंग का खतरा नहीं
प्रकाश दीवार के आरपार नहीं जा सकता इसलिए लाई-फाई में हैंकिंग का खतरा नहीं है। वाई-फाई की तुलना में लाई-फाई इंटरनेट के लिए कई गुना अधिक स्पीड देगी। कक्षा 12 के छात्र ब्रजेश का सॉफ्टवेयर इंजीनियर बन इस क्षेत्र में काम करना चाहते हैं। प्रदर्श में उनके सहयोगी छात्र सजल गौड़ और अंशू चौहान रहे।
लाई-फाई (Li-Fi) का सफर
इडिनबर्ग यूनिवर्सिटी के प्रो. हेराल्ड हास ने 2011 में सबसे पहले लाई-फाई शब्द का प्रयोग किया।
विजुअल लाइट कम्युनिकेशन तकनीक को 2012 में लाई-फाई का प्रयोग कर प्रदर्शित किया गया।
अगस्त 2013 में इसके प्रयोग से इक रंग की एलईडी द्वारा 1.6 जीबीपीएस डाटा ट्रांसफर का प्रयोग।
अक्तूबर 2013 में चाइनीज कंपनी द्वारा लाई-फाई तकनीक पर काम करने की सूचना जारी की गई।
अप्रैल 2014 में रसियन कंपनी स्टिन कॉमन्स का 1.25 से 5 जीबीपीएस तक डाटा ट्रांसफर प्रयोग।
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