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GLA का मिशन, हर हाल में बच्चों को मिले नौकरी: नीरज अग्रवाल

Mon, 06 Jun 2016 11:05 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 06 Jun 2016 11:05 AM IST
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niraj make life of thousands students
नीरज अग्रवाल

देश के शीर्ष शैक्षणिक संस्थानों में शुमार जी.एल.ए विश्वविद्यालय के सी.ई.ओ नीरज अग्रवाल से अमर उजाला के विशेष कार्यक्रम रुबरु में सीधे तौर बातचीत की सिद्धार्थ शिल्पी ने.....

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रूबरू की पहली कड़ी में पूछे गए सवाल - 
अमर उजाला- आपकी सफलता का मंत्र क्या है?


नीरज- मेरी सफलता का मंत्र अनुशासन, खुद के प्रति ईमानदार रहना और सही समय पर सही निर्णय लेना है।

अमर उजाला- अनुशासन की आपके जीवन में क्या अहमियत है?

नीरज- अनुशासन का सबके जीवन में बहुत महत्व होता है। मेरे लिए अनुशासन का मतलब है कि आप अपनी जिंदगी में खुद को कहां देखते हैं? जीवन में सफलता के पथ पर आगे बढ़ते रहना ही अनुशासन है।  
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अमर उजाला- आपकी जिंदगी का मिशन क्या है?

नीरज- हर आदमी फेम का भूखा होता है, इसी तरह मैं भी चाहता हूं कि जीएलए विश्वविद्यालय का शिक्षा की दुनिया में नाम हो। मैं मथुरा को शिक्षा का हब बनाना चाहता हूं। 
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अमर उजाला- जी.एल.ए के लिए आपका क्या विजन है?

नीरज- दुनिया के शीर्ष शिक्षण संस्थानों में जी.एल.ए का भी नाम हो। जी.एल.ए के छात्र पूरी दुनिया में जी.एल.ए का नाम रोशन करें। 

अमर उजाला- आपकी लाइफ में बड़ा टर्निंग प्वाइंट कब आया?

नीरज- 2012 में शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी गिरावट आई थी, जिसका असर हमारे संस्थान को भी पड़ा। मगर मैंने हार नहीं मानी, धैर्य से काम लिया और संस्थान को इस स्थिती से उबारा। 

अमर उजाला- आप शिक्षा के बारे में क्या कहेंगे?

नीरज- हर जगह नंबर 1 ही सब कुछ होता है। दूसरे नंबर की कोई अहमियत नहीं होती। मैं हर अच्छे तरीके से जी.एल.ए विश्वविद्यालय को टॉप पर लाना चाहता हूं। 

अमर उजाला- अपने बचपन के बारे कुछ बताएं?

नीरज- बचपन में एकदम बिंदास जिया। पढ़ाई के साथ-साथ पाठ्यसहगामी क्रियाओं में भी बढ़-चढ़ के भाग लेता था। 





रूबरू की दूसरी कड़ी में पूछे गए सवाल -

अमर उजाला- अमर उजाला के माध्यम से आप अपने परिवार को क्या संदेश देना चाहेंगे?
नीरज अग्रवाल-
सबसे पहले तो मैं अपने पापा को थैंक्स बोलना चाहूंगा क्योंकि उन्होंने मुझ पर इतना विश्वास करके अपने शैक्षिक संस्थान की बागडौर मेरे हाथ में दे दी। एक मशहूर शेर है -'किसी को मिला मकां, किसी के हिस्से दुकां आई, मैं घर में सबसे छोटा था, मेरे हिस्से में मां आई' मेरी मां बहुत पढ़ी लिखी नहीं हैं। वो बिजनेस भी नहीं जानती, लेकिन वो जितना मुझे जानती हैं, मेरी सफलता के लिए उतना ही काफी है। 

अमर उजाला- अमर उजाला के माध्यम से आप अपनी पत्नी को क्या संदेश देना चाहेंगे?
नीरज अग्रवाल-
शादी के समय मैंने अपनी पत्नी से बहुत झूठे-सच्चे वादे किए थे कि मैं तुम्हें घुमाउंगा और भी बहुत कुछ। लेकिन बहुत कुछ नहीं कर पाया। फिर भी मेरी पत्नी इंदू कोई शिकायत नहीं करतीं। वो यही कहती है कि ये 4 लोगों का परिवार हमारा परिवार नहीं है, पूरी जी.एल.ए यूनिवर्सिटी मेरा परिवार है। इंदू के इस सपोर्ट के लिए उनको धन्यवाद करना चाहता हूं।


अमर उजाला- आपका पसंदीदा सिंगर कौन है?
नीरज अग्रवाल-
जगजीत सिंह मेरे फेवरेट सिंगर हैं।

अमर उजाला- आपका पसंदीदा स्पोर्ट्स क्या है?
नीरज अग्रवाल-
टेबल टेनिस

अमर उजाला- आपका पसंदीदा एक्टर कौन है?
नीरज अग्रवाल-
नाना पाटेकर मेरे पसंदीदा एक्टर हैं।

अमर उजाला- आपका पसंदीदा मूवी कौन सी है?
नीरज अग्रवाल-
बागबान
 
अमर उजाला- सुना है कि आपको लिटरेचर का बहुत शौक है।
नीरज अग्रवाल-
हां मुझे शेर शायरी, कविताओं और कहानियों का बहुत शौक है। 

अमर उजाला- अच्छा आपका शौक क्या है?
नीरज अग्रवाल-
वर्क ही मेरा शौक है। 

अमर उजाला- आपका सोर्स ऑफ मोटीवेशन क्या है?
नीरज अग्रवाल-
फेम जो किसी भी अच्छे तरीके से मिली हो।

अमर उजाला- अगर आप शिक्षा के क्षेत्र में न होते तो क्या होते?
नीरज अग्रवाल-
तो मैं एक सोशल वर्कर होता और लोगों की मदद करता।

अमर उजाला- आपका जीएलए के लिए ग्रोथ प्लान क्या है?
नीरज अग्रवाल-
दिल्ली एनसीआर में मैं जीएलए को बढ़ाना चाहता हूं।

अमर उजाला- आपका कमजोर छात्रों से अतिरिक्त जुड़ाव होता है।
नीरज अग्रवाल-
मैं बच्चों से बिंदास मिलता हूं। उन्हें बहुत सी चीजें बताता हूं, जो बतानी चाहिए और जो नहीं भी बताई जानी चाहिए, जिससे वो खुलें और मेरी गलतियों से सीखें।


नीचे वीडियो पर क्लिक करके देखें इंटरव्यू की दूसरी किस्त




रूबरू की तीसरी कड़ी में पूछे गए सवाल -

नीरज अग्रवाल के बारे में क्या है छात्रों का खयाल? कैसे दूर करते हैं बच्चों की मुश्किलें? शिक्षा से लेकर कामयाबी तक के सफर को कैसै बनाते हैं शानदार? छात्र ही नहीं फैकल्टी के लोग भी हैं उनके फैन। आइए सबसे होते हैं रूबरू- 


 

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