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बजट 2019: महिलाएं बोलीं, सिर्फ घोषणाएं नहीं अमल भी जरूरी, कहीं खुशी तो कहीं निराशा

Sat, 06 Jul 2019 12:32 PM IST
Garima Garg एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: Garima Garg Updated Sat, 06 Jul 2019 12:32 PM IST
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Budget 2019: Not just announcements also necessary to work on it

महिलाओं को बजट में कई तरह की उम्मीदें थीं। कुछ पूरी हो गई हैं, वहीं कुछ में निराशा हाथ लगी है। बजट पर शहर की महिलाओं की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं रहीं। पहली बार संसद में महिला वित्तमंत्री को बजट पेश करते देख महिलाएं खुश थीं। 

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निजी सेक्टर में कार्यरत लोगों के लिए पीएफ सहित कई प्रावधानों में खामियां देखने को मिलती हैं। सरकार को बजट के दौरान इन मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए था। हालांकि टैक्स स्लैब बेहतर स्थिति में हैं, जिसका लाभ मध्यम वर्ग को मिलेगा। बजट के कुछ प्रावधान अच्छे हैं। कुछ को और बेहतर बनाया जा सकता था। 
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डॉ. रश्मि चावला, नौकरीपेशा 

योजनाएं बनाना काफी नहीं है, समय से घोषणाओं को पूरा करना भी आवश्यक है। अकसर देखा जाता है कि बजट में हुई घोषणाओं के पूरा होने में कई साल लग जाते हैं। उम्मीद है कि इस बजट में जो भी अच्छे प्रावधान हैं, वह समय से लागू होंगे। शिक्षा और मेडिकल क्षेत्र के लिए और बेहतर करने की आवश्यकता है। 
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 नीरजा आनंद , प्रोफेसर

बजट में महिला सुरक्षा के मुद्दों पर ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। बेहतर व्यवस्था पर खर्च करना चाहिए। साथ ही जल संरक्षण की जो बात प्रधानमंत्री मोदी ने शुरू की है। उसे मुहिम बनाने के लिए विशेष खर्च का प्रावधान करना बेहतर रहता। 

दीप्ती वर्मा,  लेक्चरार

महिलाओं के लिए अलग से कुछ प्रावधान किए जा सकते थे। हालांकि मध्यम वर्ग पर ज्यादा बोझ नहीं बढ़ाया गया, यह अच्छी बात है। लुभावने वादे की जगह प्रैक्टिकल बातों को प्रमुखता दी गई है । 
डॉ. शालिनी पाठक, विदेशी लैंग्वेज टीचर

एक महिला को बजट पेश करते देखना सुखद अनुभूति है। सही मायनों में महिला सशक्तिकरण की झलक दिखती है । महिलाओं के लिए यह खुशी का पल है ।     
वर्षा छबारिया, रेडियो चैनल हैड

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