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Hindi News ›   Education ›   AMU Minority Status remain, Supreme Court overrules 1967 judgment; Know the history of institution disprj

एएमयू को अल्पसंख्यक दर्जा: सात छात्रों ने की थी स्थापना, आज पढ़ते हैं 37000 छात्र, ऐसे मिलता है एडमिशन

Fri, 08 Nov 2024 04:31 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: आकाश कुमार Updated Fri, 08 Nov 2024 04:31 PM IST
सार

AMU History: सुप्रीम कोर्ट ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को अल्पसंख्यक दर्जे का हकदार माना है। कोर्ट ने यह भी कहा कि अन्य समुदायों को भी इस विश्वविद्यालय में बराबरी का अधिकार है। आइए जानते हैं इस विश्वविद्यालय का इतिहास...
 

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AMU  Minority Status remain, Supreme Court overrules 1967 judgment; Know the history of institution disprj
AMU - फोटो : आधिकारिक वेबसाइट (@amu.ac.in.)

विस्तार

AMU: सुप्रीम कोर्ट ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) को अल्पसंख्यक दर्जे का हकदार ठहराया है। यह निर्णय 1967 में दिए गए अपने पुराने फैसले को बदलते हुए दिया गया है, जिसमें कहा गया था कि AMU अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान का दर्जा नहीं प्राप्त कर सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि अन्य समुदायों को भी इस विश्वविद्यालय में बराबरी का अधिकार है।

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यह फैसला सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच ने सुनाया, जिसमें 7 न्यायधीश शामिल थे। इनमें से 4 ने AMU के पक्ष में और 3 ने विरोध में निर्णय दिया। इस मामले को आगे की जांच के लिए 3 जजों की एक नियमित बेंच के पास भेज दिया गया है, जो यह निर्धारित करेगी कि क्या AMU की स्थापना अल्पसंख्यकों द्वारा की गई थी।

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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का इतिहास

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) भारत के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में से एक है। इसकी स्थापना का इतिहास 1875 से शुरू होता है। ब्रिटिश काल में, यह विश्वविद्यालय कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय की तर्ज पर भारत का पहला उच्च शिक्षण संस्थान माना जाता था। 1875 में, सर सैयद अहमद खान ने मुसलमानों को आधुनिक शिक्षा देने के उद्देश्य से मुस्लिम एंग्लो ओरिएंटल स्कूल की स्थापना की। चूंकि उस समय निजी विश्वविद्यालयों की अनुमति नहीं थी, इसे एक स्कूल के रूप में प्रारंभ किया गया था।

बाद में, इसे मुस्लिम एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज का रूप दिया गया और 1920 में इसे अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का दर्जा प्रदान किया गया। उसी वर्ष, ब्रिटिश सरकार की सेंट्रल लेजिस्लेटिव असेंबली ने AMU एक्ट पारित कर इसे केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिया। बताया जाता है कि इस विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए सर सैयद ने काफी संघर्ष किया। उन्होंने विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए अनोखे तरीके अपनाए, जैसे कि चंदा एकत्र करना, नाटकों में भाग लेना और लोगों से सहयोग की अपील करना।

कैसे मिलता है यहां प्रवेश?

आज, AMU में 37,000 से अधिक छात्र पढ़ाई कर रहे हैं, जो न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे भारत के विभिन्न हिस्सों से आते हैं। इस विश्वविद्यालय में 13 फैकल्टी, 21 सेंटर और 117 विभाग हैं। छात्र-छात्राओं के लिए 80 छात्रावासों सहित 19 हॉल उपलब्ध हैं। AMU में तकनीकी, व्यावसायिक और अनुसंधान के कई विशेष पाठ्यक्रम हैं, जिनमें इंजीनियरिंग, मेडिकल, डेंटल, जैव प्रौद्योगिकी और इस्लामिक अध्ययन के प्रमुख कॉलेज और विभाग शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त, AMU ने पश्चिम बंगाल, केरल और बिहार में अपने तीन नए केंद्र भी खोले हैं। यह विश्वविद्यालय खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी सक्रिय है, जहां क्रिकेट, फुटबॉल, हॉकी और घुड़सवारी के लिए विशेष क्लब मौजूद हैं। इसके "सामान्य शिक्षा केंद्र" में ड्रामा, संगीत और साहित्यिक क्लब जैसी पाठ्येतर गतिविधियां भी आयोजित की जाती हैं।

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